पूर्व प्रधान को हिरासत में रखने के आरोप पर पुलिस मौन, जवाब के लिए भटकते रहे परिजन, खुलेआम मौलिक अधिकारों का हनन
👉 पश्चिम शरीरा पुलिस पर पूर्व प्रधान को अवैध हिरासत में रखने का आरोप।
👉 परिजनों का दावा, घर जाते समय पकड़कर ले गई पुलिस, नहीं दिया अरेस्ट मेमो।
👉 पत्नी ने डीजीपी निर्देशों की अनदेखी और मानवाधिकार हनन का लगाया आरोप।
👉 मामले में उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग।
कौशाम्बी। जिले के पश्चिम शरीरा थाना क्षेत्र में एक पूर्व प्रधान को कथित तौर पर अवैध हिरासत में रखने के आरोपों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का दावा है कि शुक्रवार शाम करीब 5 बजे पुलिस पूर्व प्रधान को खेत से घर जाने के दौरान रास्ते से पकड़कर थाने उठा ले गई, लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी गिरफ्तारी से जुड़ी स्पष्ट जानकारी और अरेस्ट मेमो उपलब्ध नहीं कराया गया है ।
पूर्व प्रधान की पत्नी रन्नो ने पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि परिवार को अब तक यह नहीं बताया गया कि आखिर किस मामले में उन्हें हिरासत में लिया गया है। परिजनों ने इसे मौलिक अधिकारों के हनन और मानवाधिकार उल्लंघन का मामला बताते हुए उच्च अधिकारियों से जांच की मांग की है। परिवार का कहना है कि घटना के बाद घर में चिंता का माहौल है और तनाव के कारण उनकी बेटी की तबीयत भी खराब हो गई है।इस मामले में पुलिस का पक्ष जानने के लिए जब थाना प्रभारी पश्चिम शरीरा से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनका सीयूजी फोन रिसीव नहीं हुआ।
एडिशनल एसपी को भी कई बार फोन किया गया, लेकिन उनका भी फोन नहीं उठ सका। बाद में एसपी के सीयूजी नंबर पर बात होने पर उनके पीआरओ ने कहा कि मामले की जानकारी कराई जाएगी।
वहीं, आईजी और एडीजी कार्यालय के पीआरओ से संपर्क करने पर उन्होंने जिले के अधिकारियों से बात करने की बात कही। हालांकि, मामले में देर तक किसी जिम्मेदार अधिकारी की ओर से स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई, जिससे जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
खबर लिखे जाने तक पुलिस प्रशासन की ओर से आरोपों का आधिकारिक खंडन या विस्तृत पक्ष सामने नहीं आया था। पुलिस इस मामले में सवालों से बचते नजर आ रही है जबकि पीड़िता रन्नो देवी ने पुलिस पर अवैध हिरासत का आरोप लगाया है । कौशांबी पुलिस डीजीपी के निर्देशों का भी पालन नहीं कर रही है,जब जिसे चाहे जहाँ चाहे खुलेआम गिरफ्तार कर लेती है और कई कई दिनों तक अवैध हिरासत में रखती है जो आम बात है।
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