भूदान भूमि पर जवाबदेही की दस्तक — इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब कौशाम्बी के उपाध्यक्ष अमरनाथ झा ने दाखिल की RTI, 56 वर्षों के मांगे रिकॉर्ड , प्रशासन की पारदर्शिता पर उठे सवाल

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Kaushambi voice

” भूदान जमीन की वर्तमान स्थिति जानने की पहल
स्वामित्व, कब्जा और नामांतरण की जांच की मांग
राजस्व अभिलेखों की सच्चाई अब होगी उजागर
कौशाम्बी में भूदान भूमि पर बड़ा खुलासा संभव “”

👉 भूदान भूमि पर बड़ा सवाल ……
पत्रकार अमरनाथ झा ने दाखिल की RTI
56 साल के राजस्व रिकॉर्ड मांगे ,स्वामित्व और कब्जे की होगी जांच , नामांतरण व पैमाइश का पूरा ब्यौरा तलब

👉 जिलाधिकारी कार्यालय से मांगी प्रमाणित प्रतियां , प्रशासन की पारदर्शिता पर उठे गंभीर प्रश्न , कौशाम्बी में भूदान जमीन पर खुलासे की आहट…

कौशाम्बी। जिले में भूदान भूमि को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग अब एक औपचारिक जांच की दिशा में बढ़ती दिखाई दे रही है। अमरनाथ झा, जो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब कौशाम्बी के उपाध्यक्ष और वरिष्ठ पत्रकार हैं, उन्होंने UP RTI Online पोर्टल के माध्यम से जिलाधिकारी कार्यालय कौशाम्बी में एक महत्वपूर्ण सूचना का अधिकार (RTI) आवेदन दाखिल किया है। इस आवेदन का उद्देश्य भूदान में दी गई जमीन की वास्तविक स्थिति, स्वामित्व और दशकों में हुए संभावित बदलावों को सार्वजनिक करना है।
दाखिल RTI में वर्ष 1970 से लेकर 28 फरवरी 2026 तक संबंधित भूदान भूमि के समस्त राजस्व अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां मांगी गई हैं। इसमें खतौनी, नामांतरण, पैमाइश, स्वामित्व की स्थिति, कब्जे का विवरण तथा किसी भी प्रकार के प्रशासनिक आदेश या परिवर्तन से जुड़ी जानकारी शामिल है। आवेदन में यह भी स्पष्ट रूप से पूछा गया है कि भूदान के तहत प्राप्त भूमि आज किसके कब्जे में है और क्या समय के साथ उसमें किसी प्रकार का अवैध परिवर्तन या स्वामित्व बदलाव हुआ है।
अमरनाथ झा ने अपने आवेदन के माध्यम से यह जानने का प्रयास किया है कि क्या भूदान की जमीन अपने मूल उद्देश्य के अनुरूप उपयोग में है या नहीं। यदि भूमि के स्वरूप, उपयोग या स्वामित्व में कोई परिवर्तन किया गया है, तो उसके पीछे किस प्रशासनिक आदेश या प्रक्रिया का पालन किया गया — इसकी भी प्रमाणित जानकारी मांगी गई है।

सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 6(1) के अंतर्गत दाखिल इस आवेदन ने प्रशासन की कार्यप्रणाली को जवाबदेही के दायरे में ला दिया है। RTI में यह भी उल्लेख किया गया है कि निर्धारित समय सीमा में सूचना उपलब्ध न कराए जाने की स्थिति में अधिनियम की धारा 7(1) के तहत प्रतिदिन ₹250 के हिसाब से अधिकतम ₹25,000 तक का दंड लगाया जा सकता है।
भूदान जैसी सामाजिक रूप से संवेदनशील और ऐतिहासिक महत्व की भूमि पर उठे इस सवाल ने जिले में नई चर्चा को जन्म दिया है। यह RTI आने वाले समय में भूदान जमीन की वास्तविक स्थिति उजागर करने का माध्यम बन सकती है। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह पारदर्शिता दिखाते हुए दशकों पुराने रिकॉर्ड सार्वजनिक करता है या फिर यह मामला भी जवाब के इंतजार में लंबित रह जाता है।

अमरनाथ झा पत्रकार -9415254415 ,8318977396

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