सावनेर तहसील के पिपला में ज्वेलरी दुकानदार पर ठगी और नियम उल्लंघन के गंभीर आरोप, कच्चे बिल देकर टैक्स चोरी,ग्राहकों से करता है ठगी

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सावनेर तहसील, पिपला की ज्वेलरी दुकान पर ठगी का आरोप
• ग्राहकों से ऑनलाइन ₹90 हजार लेकर डेढ़ साल से आभूषण नहीं दिए गए,60 हजार रूपए तोला में 2 तोला का तय हुआ था सौदा, सोना भाव बढ़ने से नियत बदली.
• केवल हाथ से बनी रसीद, GST बिल न देने का गंभीर आरोप
• दुकानदार पर आभूषण की कम शुद्धता और संदिग्ध BIS हॉलमार्क का भी आरोप
• स्टॉक और बिक्री का रिकॉर्ड छुपाने से टैक्स चोरी की आशंका, IT-GST जांच की मांग
• जिला प्रशासन से संयुक्त और गोपनीय जांच कराने की गुहार, कानूनी कार्रवाई की उम्मीद

नागपुर । जिले की सावनेर तहसील के पिपला गांव में स्थित एक ज्वेलरी दुकान के खिलाफ गंभीर आरोप सामने आए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि दुकानदार ने ग्राहकों से बड़ी राशि लेकर आभूषण नहीं दिए, जिससे जनता में भारी असंतोष फैल गया है। यह मामला केवल ठगी तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न सरकारी नियमों के उल्लंघन की आशंका भी जताई गई है।
शिकायत में आरोप है कि ग्राहक से ऑनलाइन माध्यम से भुगतान लेकर केवल हाथ से बनी रसीद दी गई, जबकि GST बिल या वैध दस्तावेज़ प्रदान नहीं किए गए। इससे न केवल उपभोक्ताओं को आर्थिक नुकसान हुआ है, बल्कि GST कानूनों का भी उल्लंघन होने की संभावना है। ऐसे मामलों में CGST अधिनियम के तहत जुर्माना और जांच की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
मामले में यह भी आरोप है कि दुकानदार ने आभूषण की शुद्धता और हॉलमार्क के नियमों का उल्लंघन किया है। 22 कैरेट का सोना बताकर कम शुद्धता के आभूषण बेचे गए और BIS हॉलमार्क संदिग्ध पाया गया। BIS अधिनियम और विधि मापतौल नियमों के तहत दुकान की आभूषण मशीन, वजन और स्टैम्पिंग की जांच की जा सकती है।
इसके अलावा शिकायत में यह कहा गया है कि दुकानदार बड़े पैमाने पर कैश लेन-देन करता है और स्टॉक तथा बिक्री का सही रिकॉर्ड नहीं रखता। इससे आयकर अधिनियम के तहत आय छुपाने और टैक्स चोरी की आशंका बढ़ जाती है। इनकम टैक्स विभाग इस तरह के मामलों में सर्वे, रेड और वित्तीय दस्तावेज़ों की जाँच कर सकता है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 406 (आपराधिक विश्वासघात) के तहत भी आता है। यदि शिकायतकर्ता पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराते हैं तो FIR के बाद दुकान के सभी दस्तावेज़, तौल मशीन और लेन-देन की जांच की जा सकती है। साथ ही उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत ग्राहकों को नुकसान की भरपाई भी कराई जा सकती है।
शिकायतकर्ताओं ने जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि मामले की गोपनीय और संयुक्त जांच की जाए। इसमें शामिल हो सकते हैं: इनकम टैक्स विभाग, GST विभाग, BIS, विधि मापतौल विभाग और पुलिस। यदि जांच पूरी होती है, तो दुकानदार के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई होने की संभावना है और अन्य आम नागरिकों के लिए चेतावनी भी बनेगी।
अमरनाथ झा पत्रकार – 9415254415 ,

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