सीनियर डीपीओ राजेश कुमार शर्मा पर लगे थे गंभीर आरोप, भ्रष्टाचार से लेकर बेनामी संपत्ति तक जांच की हुई थी मांग
प्रयागराज । इलाहाबाद डीआरएम कार्यालय में 5 साल पहले रहे भौकाली रेलवे अधिकारी राजेश कुमार शर्मा सीनियर डीपीओ के अपराध की लंबी जड़े रही है । इनके द्वारा दो प्राईवेट व्यक्ति रखे रहने की चर्चा होती रही है जो मध्य प्रदेश राज्य जिला रीवा से दिनकर मिश्रा मो0 नंबर ९६६९९९७८३० अपराध की हिस्ट्री से जोड़कर चर्चित रहा था जो जिला रीवा से प्राप्त किया जा सकता है। इनके बड़े पिता पुलिस विभाग अयोध्या में तैनात रहे है तथा संजय कुमार मो0 नंबर ६२६१००९६७७ जिला ग्वालियर है । श्री शर्मा के अनैतिक अपराध बनारसी लाल इंजीनियरिंग कॉलेज लखनऊ तथा उरई पंडित मो0 नंबर ९४५४१७९७२७ से इनके गृह टाउन एरिया उरई से अपराध की चर्चा रही है जिसकी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। उरई पंडित जी की हत्या में शर्मा ने अपने मामा के लड़के पंकज को भी शामिल किया था । हत्या होने के पहले ही मो नंबर 9415419462 से मो0 नंबर 9454179727 उरई पंडित जी को सूचना दी गई है जिसकी पुलिस विभाग के साइबर सेल क्राइम से जॉच कराई जाने की मांग हुई थी । शर्मा जी हत्या कराने में विफल हो जाने पर उरई पंडित को लगभग कई वर्ष पहले एससी/ एसटी मुकदमे में भी फसाया था लेकिन जॉच में एससी /एसटी घटना को पुलिस ने फर्जी बताया और उरई पंडित जी को दोष मुक्त कर दिया था। उसी दरम्यान में शर्मा ने करोड़ों रुपए की जमीन का खरीद फरोख्त भी किया है ,इनकी पत्नी के नाम करोड़ो का चेक जमीन से जुड़े मामले चर्चित रहे जो रेलवे विभाग प्रयागराज में नौकरी के दौरान अनैतिक तरीके धन अर्जित करने का आरोप लगा था ।
बता दें कि शर्मा जी का पारिवारिक पृष्ठ भूमि इनके पिता जी छोटे से नौकरशाह इनकमटैक्स विभाग में चर्तुथ श्रेणी कर्मचारी थे, सरकार के हित मे इसकी जांच कराई जाने की शिकायत काफी हुई थी। उधर तत्कालीन समय में ही शर्मा जी के सरपरस्ती में चर्चा में एक नाम उनकी करीबी रही रिषिका सिंह ने नौकरी के नाम पर पांच लाख रुपए कि ठगी करने का आरोप लगा था। इसमें शर्मा जी नाम को भी सामिल कर लिया था जिसका खुलासा दिनांक 20/8/2021 को मुख्य कर्मचारी कल्याण सूबेदारगंज ने आडियो रिकॉर्डिंग में किया है कि स्टांप पेपर Sr. DPO ने बनवाया है। महिलाओ का शौकीन सीनियर डीपीओ ने अपने को बचाने के लिए अपनी करीबी रिषिका सिंह का स्थानातरण चण्डीगढ़ कंस्ट्रक्शन में कर दिया है । उधर इनके करीबी रहे मोतीलाल मिश्रा पर कई तरह के पारिवारिक आरोप लगते रहे हैं। उनकी फ़ोटो स्टेट कि मशीन पर्सनल ब्रांच में लगी रही जो अनुचित लाभ मिलने के कारण इस मामले मे DRM’ ,GM, SDGM उसके अंतर्गत आकार्यों को जानते हुए मौन रहे है जो जांच नहीं हुई है । एक और चौकाने वाली बात यह है कि परिजन दुष्कर्म का आरोपी मोतीलाल मिश्रा पर एवं उनकी बेनामी संपत्ति फूलपुर में फार्म हाउस, बेनामी रुपया सुब्रत सहारा बैंक में जमा का आरोप परिजनों ने लगाया था, यदि इसकी जांच सीबीआई से कराई जाएगी तो रेलवे विभाग से अर्जित की गई कई करोड़ो का खुलासा होगा । तत्कालीन समय मोती लाल मिश्रा के प्रति माह पीएफ ,वीपीएफ कटौती से भी अनुमान लगाकर जांच कराई जाएंगी तो मोतीलाल मिश्रा रेलवे विभाग में किया गया भ्रष्टाचार का खुलासा होगा। मोती लाल मिश्रा को दो पत्नी रखने का आरोप तो तत्कालीन मंडल कार्मिक अधिकारी ने अपने पत्र में स्वीकार कर लिया था लेकिन तत्कालीन भ्रष्ट Sr. DPO राजेश कुमार शर्मा ने उस पत्र के आधार पर उसको नौकरी से बर्खास्त नही किया था। इस मामले मे DRM, GM SDGM को भी अनुचित लाभ देकर चुप्पी साधने का आरोप परिजनों ने लगाया था। फिलहाल यह सब मामला ठंडे बस्ते में चला गया है और तत्कालीन सीनियर डीपीओ रहे राजेश कुमार शर्मा इलाहाबाद डीआरएम ऑफिस से एनसीआर में ट्रांसफर हुए और उसके बाद झांसी ट्रांसफर हो जाने का बात बताई जा रही है।
