जिला अस्पताल में बाहर की दवा लिखने का आरोप, चुनिंदा मेडिकल स्टोरों पर उपलब्धता से सवाल
👉जिला अस्पताल में बाहर की दवा लिखने का आरोप..
👉 चर्म रोग विभाग के कमरा नंबर-35 से पर्चे पर लिखी गई दवाओं पर सवाल..
👉 गेट के पास चुनिंदा मेडिकल स्टोर पर ही दवा मिलने के दावे से जांच की मांग..
👉 मानक विहीन चल रही है मेडिकल स्टोर, कब होगी जांच , बड़ा सवाल.. मेडिकल स्टोरो पर लुट रहे मरीज
मिरोपिनम जैसे इंजेक्शन बिक रहे 2000 से अधिक रेट में नहीं देते है बिल..
कौशाम्बी। जिला अस्पताल में मरीजों को बाहर की दवाएं लिखे जाने के आरोप ने अस्पताल की दवा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चर्म रोग विभाग के कमरा नंबर-35 से लिखी गई दवाओं को लेकर मरीज का दावा है कि पर्चे पर लिखी दवाएं अस्पताल के बाहर भी सभी मेडिकल स्टोरों पर उपलब्ध नहीं हैं। आरोप है कि अस्पताल गेट के आसपास स्थित कुछ चुनिंदा मेडिकल स्टोरों पर ही ये दवाएं आसानी से मिल रही हैं।
मरीज के अनुसार, दवा की तलाश में अन्य मेडिकल स्टोरों पर भी संपर्क किया गया, लेकिन पर्चे पर लिखी दवा उपलब्ध नहीं होने की बात बताई गई। इसके बाद अस्पताल गेट के पास स्थित गंगा मेडिकल स्टोर से दवा खरीदी गई। यहां दवाओं की कीमत 1051 रुपये बताई गई। मरीज का आरोप है कि दवा MRP पर देने के बावजूद बिल मांगने पर बिल नहीं दिया गया।

इसके बाद न्यू कुशवाहा मेडिकल स्टोर पर वही दवा करीब 1000 रुपये में मिलने का दावा किया गया। हालांकि दोनों दुकानों पर दवा की वास्तविक कीमत, मात्रा, बैच और MRP की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
इन बिंदुओं पर हो जांच तो सामने आएगी सच्चाई
👉— कमरा नंबर-35 के चिकित्सक ने पिछले कुछ दिनों में मरीजों को कौन-कौन सी दवाएं लिखीं, उनकी सूची तैयार कराई जाए और देखा जाए कि उनमें से कितनी दवाएं जिला अस्पताल के स्टोर में उपलब्ध थीं।
👉— अस्पताल के दवा स्टोर का स्टॉक रजिस्टर, इश्यू रजिस्टर और मरीजों को वितरित की गई दवाओं का रिकॉर्ड मिलान कराया जाए।
👉— संबंधित चिकित्सक द्वारा लिखे गए पर्चों के आधार पर यह जांच हो कि एक जैसी दवाएं कितने मरीजों को लिखी गईं और वे दवाएं किन-किन मेडिकल स्टोरों पर उपलब्ध हैं।
👉— अस्पताल गेट के आसपास के मेडिकल स्टोरों से संबंधित दवाओं का स्टॉक, खरीद बिल और बिक्री बिल जांचे जाएं। इससे यह पता चल सकता है कि दवाओं की सप्लाई कहां से हुई।
👉— मरीज द्वारा बताए गए 1051 रुपये और करीब 1000 रुपये के अंतर की जांच के लिए दोनों दुकानों से संबंधित दवा के MRP, बैच नंबर, मात्रा और खरीद मूल्य का मिलान कराया जाए।
👉— गंगा मेडिकल स्टोर पर बिल नहीं दिए जाने के आरोप की जांच के लिए दुकान का बिक्री रिकॉर्ड और उपलब्ध डिजिटल/कैश लेनदेन रिकॉर्ड देखा जाए।
👉— यह भी जांच हो कि अस्पताल में उपलब्ध न होने वाली दवाएं ही बाहर से लिखी गईं या अस्पताल में उपलब्ध दवाओं के विकल्प के बावजूद बाहर की दवाएं लिखी गईं।
👉— डॉक्टर और मेडिकल स्टोर संचालकों के बीच किसी आर्थिक लेनदेन या कमीशन की शिकायत है तो उसके संबंध में उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच की जाए। कमीशन की बात फिलहाल आरोप है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
👉— अस्पताल प्रशासन से यह स्पष्ट कराया जाए कि मरीजों को बाहर से दवा खरीदने की आवश्यकता क्यों पड़ी और अस्पताल में संबंधित दवाएं उपलब्ध थीं या नहीं।
👉— जांच के दौरान संबंधित मरीजों के पर्चे और खरीद संबंधी साक्ष्यों के साथ मेडिकल स्टोरों के रिकॉर्ड का मिलान कराया जाए, ताकि आरोपों की वास्तविकता सामने आ सके।
मामले में जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच कराकर रिपोर्ट सार्वजनिक करने और जांच में अनियमितता मिलने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन अस्पताल की दवा व्यवस्था और मेडिकल स्टोरों से जुड़े इन आरोपों की जांच कब तक कराता है।
इस मामले पर जब ड्रग इंस्पेक्टर अरविन्द कुमार से बात हुई तो उन्होंने कहा जांच कर की जाएगी कार्यवाही।
अमरनाथ झा पत्रकार -9415254415
