अवैध प्लॉटरों से प्लाट या मकान खरीदना पड़ सकता है भारी, चंद दिनों में करोड़पति बनने की होड़
👉 अवैध प्लाटरो से मकान या प्लाट लेकर मुसीबत में पड़ सकते है ग्राहक, कुछ दिनों में हो गए प्लॉटर करोड़पति
👉 कार्रवाई नहीं होने से फल फूल रहा अवैध प्लाटिंग का कारोबार, कब देंगे उच्च अधिकारी ध्यान..
👉 डेढ़ दर्जन से अधिक चिन्हित किए गए थे भू माफिया , अवैध प्लाटिंग पर लगी थी रोक…
कौशांबी। जिले में अवैध प्लाटिंग का कारोबार लगातार बढ़ने के आरोप लग रहे हैं। कस्बों से लेकर मंझनपुर और भरवारी नगर पालिका क्षेत्र के अलावा सिराथू, मूरतगंज, समदा, करारी, ओसा और टेवा समेत कई इलाकों में बिना जरूरी स्वीकृति और नियमों का पालन किए प्लाट काटे जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। आरोप है कि कार्रवाई के अभाव में प्लॉटिंग का यह कारोबार तेजी से पैर पसार रहा है।
कादिराबाद, गुवारा, वल्लहा, चमरूपुर और कोखराज समेत कई क्षेत्रों में जमीनों को छोटे-छोटे भूखंडों में विभाजित कर बेचने का आरोप है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई जगह सड़क, नाली, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था किए बिना ही प्लॉट बेच दिए जाते हैं। ऐसे में जमीन खरीदने वाले ग्राहक बाद में निर्माण अनुमति, रास्ते, राजस्व अभिलेख और अन्य कानूनी विवादों में फंस सकते हैं।
सरकारी जमीनों पर भी प्लाटिंग के आरोप
सबसे गंभीर आरोप यह है कि कुछ स्थानों पर सरकारी जमीनों को भी प्लाटिंग के दायरे में लाने की कोशिश की जा रही है। यदि जांच में यह सही पाया जाता है तो संबंधित जमीनों की पैमाइश, राजस्व अभिलेखों की जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी होगी।
पूर्व डीएम की गाइडलाइन का पालन कितना हुआ?
बताया जाता है कि पूर्व जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा के कार्यकाल में जिले में भू-माफियाओं की सूची तैयार करने और अवैध प्लाटिंग पर रोक लगाने के लिए दिशा-निर्देश तैयार किए गए थे। स्थानीय लोगों का आरोप है कि समय बीतने के बावजूद इन निर्देशों का प्रभावी पालन नहीं हुआ, जिससे अवैध प्लाटिंग करने वालों के हौसले बढ़े हैं।
ग्राहक रहें सावधान
अवैध कॉलोनियों में जमीन खरीदने से पहले ग्राहक को संबंधित जमीन का खसरा-खतौनी, नक्शा, भूमि की श्रेणी, रास्ते का रिकॉर्ड, विक्रेता का स्वामित्व, संबंधित प्राधिकरण की अनुमति और लेआउट/विकास की स्वीकृति जरूर जांचनी चाहिए। केवल रजिस्ट्री हो जाने से हर स्थिति में प्लाटिंग वैध नहीं हो जाती।
स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी और संबंधित राजस्व एवं विकास अधिकारियों से मांग की है कि जिले में चल रही प्लाटिंग की सर्वे कराकर वैध-अवैध स्थिति सार्वजनिक की जाए, सरकारी जमीनों की पैमाइश कराई जाए और नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित प्लॉटरों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अब सवाल यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इन आरोपों की कब जांच कराएंगे और अवैध प्लाटिंग पर कार्रवाई कब होगी?
अमरनाथ झा पत्रकार -9415254415
