बसोहनी के दो तालाबों पर 97 मजदूरों की हाजिरी का मामला गरमाया, जांच और भुगतान की पारदर्शिता पर उठे सवाल
तेली और ककराही तालाब में काम के बिना मजदूरी दर्ज होने का आरोप, 85 मजदूरों के नाम सामने आए, 12 का विवरण अस्पष्ट…
कौशाम्बी। सिराथू विकासखंड की ग्राम पंचायत बसोहनी में तेली तालाब और ककराही तालाब से जुड़े मनरेगा कार्यों में मजदूरों की उपस्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पोर्टल पर दोनों तालाबों के कार्यों में प्रतिदिन कुल 97 मजदूरों की हाजिरी दर्ज होने का मामला सामने आया है। वहीं, स्थानीय स्तर पर किए गए निरीक्षण में तालाब पानी से भरे मिले और मौके पर खुदाई अथवा अन्य निर्माण कार्य होता दिखाई नहीं दिया। ऐसे में मजदूरों की वास्तविक उपस्थिति, कार्य की प्रगति और संभावित मजदूरी भुगतान की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।
उपलब्ध ऑनलाइन अभिलेखों के अनुसार, तेली तालाब का कार्य कोड 269972 और ककराही तालाब का कार्य कोड 269971 दर्ज है। सामने आए मस्टर रोल में तेली तालाब के लिए 46 और ककराही तालाब के लिए 39 मजदूरों के नाम दर्ज बताए जा रहे हैं। इस प्रकार कुल 85 मजदूरों का विवरण उपलब्ध है, जबकि पोर्टल पर 97 मजदूरों की हाजिरी का आंकड़ा सामने आया है। शेष 12 मजदूरों की उपस्थिति का विवरण और उसका आधार भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
मौके पर काम नहीं दिखा, मस्टर रोल पर सवाल
स्थानीय लोगों और निरीक्षण से जुड़े दावों के मुताबिक, दोनों तालाबों पर दर्ज संख्या के अनुरूप मजदूर काम करते दिखाई नहीं दिए। तालाबों में पानी भरा होने के कारण खुदाई का कार्य भी नजर नहीं आया। हालांकि, केवल मौजूदा स्थिति के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि पूर्व में कोई काम नहीं हुआ। वास्तविक स्थिति जानने के लिए कार्य की स्वीकृति, निर्धारित अवधि, मस्टर रोल और स्थलीय साक्ष्यों का मिलान आवश्यक है।
एमबी और भुगतान का आधार क्या है?
मामले में सबसे अहम सवाल तकनीकी माप पुस्तिका यानी एमबी और मजदूरी भुगतान को लेकर है। आखिर दोनों तालाबों में कितनी खुदाई या अन्य कार्य कराया गया? कार्य की माप किस तकनीकी कर्मचारी ने की? मस्टर रोल में दर्ज मजदूरों की उपस्थिति का सत्यापन किसने किया? कार्यस्थल की तस्वीरें और अन्य डिजिटल साक्ष्य क्या वास्तविक काम की पुष्टि करते हैं?
यदि अभिलेखों में मजदूरों की उपस्थिति दर्ज है तो उनके द्वारा किए गए कार्य की मात्रा और भुगतान का आधार भी सार्वजनिक होना चाहिए। जांच में यदि बिना काम के हाजिरी दर्ज करने या गलत माप के आधार पर भुगतान करने की पुष्टि होती है तो संबंधित कर्मचारियों, सत्यापनकर्ताओं और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका निर्धारित की जानी चाहिए।
90 दिनों का हिसाब 26.19 लाख रुपये, भुगतान की पुष्टि जरूरी
पोर्टल पर सामने आए 97 मजदूरों की संख्या को प्रतिदिन 300 रुपये की मजदूरी दर से जोड़कर देखें तो एक दिन की संभावित मजदूरी 29,100 रुपये बैठती है। इसी आधार पर 90 दिनों का गणितीय आकलन 26 लाख 19 हजार रुपये होता है। हालांकि, यह केवल अनुमानित गणना है। इसे वास्तविक भुगतान या सरकारी धन के गबन का प्रमाण नहीं माना जा सकता। वास्तविक मजदूरी, कार्य दिवस और भुगतान की स्थिति संबंधित मस्टर रोल तथा बैंक भुगतान अभिलेखों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी से दोनों तालाबों का स्वतंत्र टीम के माध्यम से स्थलीय सत्यापन कराने की मांग की गई है। जांच में स्वीकृत कार्ययोजना, मस्टर रोल, मजदूरों के जॉब कार्ड, उपस्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड, कार्यस्थल की जियो-टैग तस्वीरें, तकनीकी माप पुस्तिका, मूल्यांकन रिपोर्ट और मजदूरी भुगतान अभिलेखों की जांच कराई जानी चाहिए।
साथ ही मौके पर दर्ज मजदूरों से अलग-अलग पूछताछ कर यह भी पता लगाया जाए कि उन्होंने किस अवधि में और कितना काम किया था। यदि अभिलेखों और वास्तविक स्थिति में अंतर मिलता है तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाए। जांच पूरी होने तक विवादित भुगतान के संबंध में नियमानुसार आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।
अधिकारियों के जवाब का इंतजार
इस संबंध में खंड विकास अधिकारी का पक्ष जानने के लिए पूर्व में फोन से संपर्क करने का प्रयास किया गया था, लेकिन बात नहीं हो सकी। मामले में संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आना भी जरूरी है। अब सवाल यह है कि जिला प्रशासन बसोहनी के दोनों तालाबों की वास्तविक स्थिति की जांच कराकर मजदूरों की हाजिरी और सरकारी धन के भुगतान का पूरा हिसाब सार्वजनिक करेगा या नहीं।
अमरनाथ झा पत्रकार -9415254415
