छह विकास कार्य, लोकेशन में गड़बड़ी के सवाल! भैला मकदूमपुर में 11.74 लाख के कामों की जियो-टैगिंग पर उठे गंभीर सवाल, जांच के घेरे मे प्रधान और सचिव की भूमिका
ऑनलाइन अभिलेखों में एक जैसी लोकेशन और फोटो की समानता का आरोप, दूसरे क्षेत्र के फोटो अपलोड होने की भी आशंका; मुख्यमंत्री और मंडलायुक्त से स्वतंत्र तकनीकी जांच की मांग…
कौशाम्बी। ग्राम पंचायतों में विकास के नाम पर सरकारी धन खर्च करने और ऑनलाइन पोर्टल पर कार्यों को पूर्ण दर्शाने की व्यवस्था की पारदर्शिता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मंझनपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत भैला मकदूमपुर में जनवरी 2024 से सितंबर 2026 के बीच कराए गए नाली निर्माण, आरसीसी नाली, इंटरलॉकिंग और मरम्मत के कार्यों के ऑनलाइन अभिलेखों में कथित विसंगतियां सामने आई हैं। शिकायतकर्ता अमरनाथ झा ने ऑनलाइन जियो-टैग फोटो, अक्षांश-देशांतर और वास्तविक निर्माण स्थलों के बीच अंतर होने की आशंका जताते हुए मुख्यमंत्री और मंडलायुक्त प्रयागराज से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
एक ही लोकेशन पर कई कार्यों का खेल तो नहीं?
शिकायत में सबसे गंभीर सवाल अलग-अलग विकास कार्यों के साथ दर्ज जियो-लोकेशन को लेकर उठाया गया है। ऑनलाइन अभिलेखों में कई कार्यों के साथ अक्षांश 25.5348 और देशांतर 81.3889 दर्ज होने की बात कही गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि कुछ अपलोड फोटो ग्राम पंचायत के वास्तविक निर्माण स्थलों से मेल नहीं खाते। कुछ फोटो समदा-मंझनपुर क्षेत्र के होने की आशंका भी जताई गई है। यदि जांच में यह सही पाया जाता है तो सवाल उठेगा कि दूसरे स्थान के फोटो ग्राम पंचायत के विकास कार्यों के प्रमाण के रूप में किसने और किस आधार पर अपलोड किए?
छह कार्यों में 11.74 लाख रुपये की धनराशि दर्ज
ऑनलाइन अभिलेखों में दर्ज छह कार्यों का विवरण भी जांच की मांग को गंभीर बनाता है।
फूलचंद रैदास के घर से पुजारी रैदास के घर तक — 68,961 रुपये।
सुरेश रैदास के घर से अमित वर्मा के घर तक इंटरलॉकिंग एवं नाली मरम्मत — 81,358 रुपये।
गंगवा के घर से सुंदर लोध के घर तक नाली एवं इंटरलॉकिंग — 2,25,306 रुपये।
शारदा गुप्ता के घर से मनु पंडित के घर तक इंटरलॉकिंग एवं नाली — 2,17,835 रुपये।
तस्सन मियां के घर से अनिल तिवारी के घर तक इंटरलॉकिंग एवं नाली — 3,05,789 रुपये।
शिवचरण लोध के घर से हीरा लोध के घर तक इंटरलॉकिंग एवं नाली निर्माण — 2,74,918 रुपये।
इन छह कार्यों की कुल दर्ज धनराशि 11,74,167 रुपये है। शिकायत में विशेष रूप से गंगवा से सुंदर लोध और तस्सन मियां से अनिल तिवारी के घर तक कराए गए कार्यों के फोटो एवं लोकेशन में समानता की आशंका जताई गई है।
प्रधान और सचिव की जवाबदेही तय होना जरूरी
सबसे बड़ा सवाल यह है कि विकास कार्यों के प्रस्ताव से लेकर निर्माण, माप पुस्तिका तैयार करने, भुगतान कराने और ऑनलाइन फोटो अपलोड कर कार्य पूर्ण प्रमाणित करने तक किन-किन लोगों की जिम्मेदारी थी? क्या ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव ने मौके पर जाकर कार्यों का सत्यापन किया था? तकनीकी सहायक ने किस आधार पर माप पुस्तिका तैयार की? भुगतान से पहले कार्यों का भौतिक सत्यापन किस अधिकारी ने किया? यदि ऑनलाइन अभिलेखों में गलत फोटो या लोकेशन अपलोड हुई है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी है?
इन सवालों का जवाब केवल कागजी जांच से नहीं, बल्कि स्वतंत्र तकनीकी टीम के स्थलीय सत्यापन से ही मिल सकता है।
डिजिटल रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जांच हो, तभी खुलेगा पूरा खेल
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि जनवरी 2024 से सितंबर 2026 तक के सभी विकास कार्यों की मूल फोटो फाइल, फोटो खींचे जाने की तारीख, अपलोड करने का समय, अक्षांश-देशांतर, माप पुस्तिका, भुगतान बिल, वाउचर और कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र की जांच कराई जाए। यह भी पता लगाया जाए कि कहीं एक ही फोटो या एक ही लोकेशन के आधार पर अलग-अलग विकास कार्यों को पूर्ण तो नहीं दर्शाया गया।
मामले में मुख्यमंत्री और मंडलायुक्त प्रयागराज से जनपद स्तर से बाहर की स्वतंत्र तकनीकी एवं प्रशासनिक टीम गठित करने की मांग की गई है। साथ ही अनियमितता प्रमाणित होने पर जिम्मेदार लोगों से सरकारी धन की वसूली और नियमानुसार विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई गई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन ग्राम पंचायत के ऑनलाइन अभिलेखों और मौके पर हुए निर्माण का मिलान कराएगा, या फिर जांच सिर्फ कागजी रिपोर्ट तक सिमटकर रह जाएगी? ग्राम पंचायत के विकास कार्यों में जनता के पैसे का हिसाब जनता को मिलना चाहिए।
अमरनाथ झा पत्रकार 9415254415
