कौशाम्बी: गरीब मजदूर महिला की जमीन पर कब्जे का आरोप, पुलिस पर मिलीभगत का आरोप लगाकर पहुंची पीड़िता सीएम दरबार
👉 16 दिन से थाने और चौकी के चक्कर काट रही महिला, एसडीएम और लेखपाल से दो बार रुकवाया निर्माण कार्य, फिर भी नहीं दर्ज हुई रिपोर्ट
कौशाम्बी। संदीपनघाट थाना क्षेत्र के ग्राम बहेरा की रहने वाली ब्रजकली देवी ने अपनी जमीन पर अवैध कब्जे और पुलिस की कथित मिलीभगत का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़िता का आरोप है कि दबंगों ने उसकी बहन के खेत में लगे नौ पिलर तोड़ दिए और विरोध करने पर गाली-गलौज, मारपीट तथा जान से मारने की धमकी दी। इतना ही नहीं, झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर दोनों बहनों को लगातार परेशान किया जा रहा है। आज फिर राम सुरेमन सुबह से कम लगा दिया है।
पीड़िता के मुताबिक, 17 अक्टूबर 2026 को शाम करीब पांच बजे वह अपनी बहन के खेत को देखने गई थी। वहां रामसुरेमन पुत्र रामसूरत अपने दो लड़कों सुनील और मुनील के साथ मौजूद था। आरोप है कि इन लोगों ने खेत में लगाए गए दस पिलरों में से नौ पिलर तोड़ दिए। पीड़िता का कहना है कि इससे पहले भी करीब एक सप्ताह पूर्व खेत से पिलर उखाड़कर फेंक दिए गए थे। विरोध करने पर आरोपियों ने कथित तौर पर धमकी दी कि यहां खेती नहीं करने देंगे और खेत में पैर रखने पर जान से मार देंगे।
ब्रजकली देवी का आरोप है कि विपक्षी लगातार खेत में निर्माण कार्य कराने का प्रयास कर रहे हैं। पीड़िता ने एसडीएम चायल और लेखपाल से शिकायत कर दो बार निर्माण कार्य रुकवाया, लेकिन इसके बावजूद विवाद समाप्त नहीं हुआ। महिला का आरोप है कि थाना प्रभारी और चौकी पुलिस उसकी शिकायत पर रिपोर्ट दर्ज नहीं कर रहे हैं और आरोपियों को संरक्षण दिया जा रहा है।
पीड़िता का कहना है कि वह करीब 16 दिनों से न्याय के लिए थाना, चौकी और अधिकारियों के चक्कर काट रही है। शिकायत लेकर चौकी पहुंचने पर भी उसे कथित तौर पर निराशा हाथ लगी। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उसकी शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय उसे ही परेशान किया।
स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं होने से परेशान ब्रजकली देवी सोमवार को लखनऊ पहुंचकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनता दरबार में अपनी फरियाद लेकर पहुंची। उसने मुख्यमंत्री से आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने, जमीन पर कब्जे की कोशिश रुकवाने और अपने परिवार की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित कराने की मांग की है।
अब सवाल यह है कि जब महिला एसडीएम और लेखपाल से दो बार निर्माण कार्य रुकवा चुकी है, तो पुलिस उसकी शिकायत पर अब तक मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई क्यों नहीं कर पाई? मुख्यमंत्री दरबार पहुंची पीड़िता को न्याय मिलेगा या उसे आगे भी थाने और चौकी के चक्कर काटने पड़ेंगे?
