जल जीवन मिशन में पीतल की टोटियों की आपूर्ति पर सवाल, 70 से 80 प्रतिशत घरों में नहीं लगी होने का दावा
👉 ग्रामीण निजी खर्च से खरीद रहे प्लास्टिक की टोटियां, जिलाधिकारी से जनपदव्यापी जांच की मांग..
👉 जल जीवन मिशन में पीतल की टोटियों की आपूर्ति पर उठे सवाल..
👉 70 से 80 प्रतिशत घरों में टोटी नहीं लगने का दावा, ग्रामीण लगा रहे प्लास्टिक की टोटियां..
👉 जिलाधिकारी से जनपदव्यापी जांच की मांग, दोषियों पर कार्रवाई और सरकारी धन की वसूली की मांग..
चित्रकूट। केंद्र एवं प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना के तहत हर घर नल योजना की जमीनी हकीकत को लेकर जनपद चित्रकूट में गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धारित मानक के अनुसार पीतल की टोटियां लगाए जाने को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। दावा किया जा रहा है कि जनपद के करीब 90 से 95 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों के घरों में पीतल की टोटियां नहीं लगाई गई हैं। कई स्थानों पर केवल पाइप कनेक्शन देकर ही कार्य पूरा किए जाने की बात सामने आ रही है।
हैरानी की बात यह है कि ग्रामीणों को नल से पानी लेने के लिए अपने निजी खर्च पर बाजार से प्लास्टिक की टोटियां खरीदकर लगवानी पड़ रही हैं। पहाड़ी बुजुर्ग क्षेत्र में 3 नवंबर को किए गए स्थलीय निरीक्षण के दौरान भी कई स्थानों पर पाइप कनेक्शन के साथ प्लास्टिक की टोटियां लगी दिखाई दीं। इससे योजना के तहत सामग्री की खरीद, आपूर्ति और स्थापना को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि निर्धारित मानक के अनुसार पीतल की टोटियों की आपूर्ति और स्थापना की गई है तो फिर ग्रामीणों को अपने पैसों से प्लास्टिक की टोटियां क्यों खरीदनी पड़ रही हैं? क्या सरकारी अभिलेखों में टोटियों की आपूर्ति और स्थापना दर्शाकर भुगतान कर दिया गया है? यदि ऐसा है तो वास्तविक स्थिति और विभागीय रिकॉर्ड का मिलान कराना जरूरी है।
जिलाधिकारी से घर-घर सत्यापन की मांग
जनहित में जिलाधिकारी पुलकित गर्ग से मांग की गई है कि जनपद के सभी विकासखंडों में स्वतंत्र जांच टीम गठित कराकर गांव-गांव घर-घर भौतिक सत्यापन कराया जाए। योजना की स्वीकृत डीपीआर, सामग्री खरीद के बिल, स्टॉक रजिस्टर, आपूर्ति रजिस्टर, भुगतान अभिलेख और कार्यपूर्ति प्रमाणपत्रों की जांच कराई जाए।
जिन ग्रामीणों ने अपने खर्च से प्लास्टिक की टोटियां लगवाई हैं, उनके बयान दर्ज कर वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए। जांच में यदि निर्धारित सामग्री की आपूर्ति में कमी, गलत भुगतान अथवा अन्य वित्तीय अनियमितता प्रमाणित होती है तो संबंधित कार्यदायी संस्था, ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही सरकारी धन की वसूली भी सुनिश्चित हो।
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और कागजी दावों से आगे बढ़कर गांवों में वास्तविक जांच कराता है या नहीं। जल जीवन मिशन का उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नल से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है। ऐसे में योजना के प्रत्येक कार्य और खर्च की पारदर्शिता सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
अमरनाथ झा पत्रकार -9415254415
