प्रयागराज में रेलवे ई-टेंडरिंग पर गंभीर आरोप, ‘L-1’ फर्मों को दरकिनार करने का मामला गरमाया
👉 रेलवे ई-टेंडरिंग में बड़ा घोटाले का आरोप…
👉 L-1 फर्मों को दरकिनार, नई कंपनियों को नहीं मिल रहा मौका
👉 MSME व महिला प्राथमिकता नीति की हो रही अनदेखी
👉 जांच की मांग, विजिलेंस पर भी उठे सवाल…
प्रयागराज। एनसीआर इलाहाबाद के सभी मंडलीय कार्यालयोंए ई टेंडर में गड़बड़ी रुकनें का नाम नहीं ले रहा है। भारतीय रेल के ई-टेंडरिंग सिस्टम को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। जेम (Government e-Marketplace) और IREPS पोर्टल पर टेंडर प्रक्रिया में भारी अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि इलाहाबाद डीआरएम मंडल समेत उत्तर मध्य रेलवे के विभिन्न मंडलों में अधिकारियों की मिलीभगत से पारदर्शिता को दरकिनार किया जा रहा है।
मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि टेंडर में L-1 (सबसे कम बोली लगाने वाली) फर्मों को भी नजरअंदाज किया जा रहा है। नई कंपनियों और खासकर एमएसएमई तथा महिला उद्यमियों को मौका देने की सरकारी नीति के बावजूद, “पास्ट परफॉर्मेंस” का हवाला देकर उन्हें बाहर कर दिया जाता है। आरोप है कि इससे प्रधानमंत्री की योजनाओं—विशेषकर MSME प्रोत्साहन और महिला सशक्तिकरण मिशन—की मंशा को झटका लग रहा है।
सूत्रों के अनुसार, कुछ टेंडरों में निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी बार-बार एक्सटेंशन (समय विस्तार) दिया जाता है, जिससे चयनित फर्मों को फायदा पहुंचाया जा सके। विजिलेंस विभाग पर भी सवाल उठ रहे हैं कि वह पूरे मामले में आंख मूंदे बैठा है और फाइलों की जांच नहीं की जा रही है।
उदाहरण के तौर पर, पिछले एक वर्ष में उत्तर मध्य रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग के एक टेंडर में रेनकोट, जैकेट और सेफ्टी शूज जैसे सामान की सप्लाई के मामले में L-1 फर्म को दरकिनार कर गोरखपुर की एक अन्य फर्म को शामिल करने का आरोप है। यह भी सवाल उठ रहा है कि जिस दर पर टेंडर दिया गया, उस पर सप्लाई संभव है या नहीं—यह जांच का विषय बताया जा रहा है।
स्थानीय लोगों और संबंधित फर्मों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने रेल मंत्रालय और प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप कर ई-टेंडरिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग उठाई है।
अमरनाथ झा पत्रकार – 9415254415
