चंपत के इस्तीफे पर सदस्य सहमत नहीं…ट्रस्टी ने संविधान पढ़ा:बोले- देते ही स्वीकार हुआ; गोपाल राव को कोषाध्यक्ष ने मीटिंग से निकाला

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चंपत के इस्तीफे पर सदस्य सहमत नहीं…ट्रस्टी ने संविधान पढ़ा:बोले- देते ही स्वीकार हुआ; गोपाल राव को कोषाध्यक्ष ने मीटिंग से निकाला

जगह- राम मंदिर परिसर, यात्री सुविधा केंद्र। समय- 2.45 बजे (दोपहर), 6 जुलाई, 2026। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि बैठक में शामिल होने राम मंदिर परिसर पहुंचे। गाड़ी से उतरते ही उनकी नजर यात्री सुविधा केंद्र के बाहर खड़े गोपाल राव पर पड़ी। वह ट्रस्ट के आमंत्रित सदस्य हैं। गोविंद देव उन्हें देखकर नाराज हुए। बोले- हटो…जाओ यहां से जाओ। अगर तुम यहां रहे, तो नृत्य गोपाल दास नहीं आएंगे। यह सुनकर गोपाल राव थोड़ा ठहर गए। मोबाइल हाथ में लेकर धीरे-धीरे राम मंदिर परिसर में बने कंट्रोल रूम की तरफ चले गए। फिर वहीं बैठे रहे, बाहर नहीं निकले। इस गहमागहमी के बाद गोविंद देव गिरि यात्री सुविधा केंद्र के उस कमरे में पहुंचे, जहां ट्रस्ट की अहम बैठक होनी थी। करीब 15 मिनट के अंदर सभी सदस्य यहां पहुंच गए। कुछ देर में अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास अपने शिष्य कमल नयन दास के साथ व्हीलचेयर से यहां पहुंचे। हाथ में कागज लेकर गोविंद देव ने कहा- मान्य करना है या नहीं… कमरे में सोफे लगे थे। इनमें ज्यादातर पर भगवा कपड़े बिछे थे। ट्रस्टी दिनेंद्र दास, स्वामी परमानंद और स्वामी वासुदेवानंद बैठे थे। एक टेबल पर लैपटॉप रखा था। इस पर कुछ ट्रस्टी ऑनलाइन जुड़े थे। ठीक 3 बजे गोविंद देव गिरि ने एजेंडे पर चर्चा शुरू की। उन्होंने टेबल पर कुछ कागज रखे, फिर कहना शुरू किया- रामभक्तों की आस्था को ठेस पहुंची है। जो सोचा नहीं जा सकता था, वो काम हो गया। इससे ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को बहुत वेदना हुई है। जब तक न्याय ठीक से नहीं हो जाता, अपराधी पकड़े नहीं जाते, तब तक उनका ट्रस्ट में बने रहना उचित नहीं लगता। उन्होंने अपना त्यागपत्र दिया है। इसको मान्य करना है या नहीं, ये हमारे हाथ की बात नहीं। गोविंद देव गिरि ने अपनी बात कहनी बंद की। इसके बाद कुछ देर तक कमरे में शांति छा गई। फिर ज्यादातर सदस्यों ने चंपत राय के इस्तीफे पर कहा कि इसको स्वीकार नहीं करना चाहिए। के. परासरन ने न्यास का संविधान पढ़ा, बोले- विचार की जरूरत नहीं मीटिंग में के. परासरन ऑनलाइन जुड़े थे। उन्होंने कहा- इस न्यास के बने हुए संविधान के अनुसार, त्यागपत्र देते हुए स्वत: स्वीकार माना जाता है। फिर उन्होंने स्क्रीन पर संविधान के कुछ पन्ने दिखाते हुए क्लॉज पढ़े। इससे सदस्यों को पता चला कि उनके पास स्वीकार करने या अस्वीकार करने के विचार के लिए ऑप्शन ही नहीं है। ये इस्तीफा देते ही स्वीकार हो गया है। इसके बाद अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास, दिनेंद्र दास समेत बाकी ट्रस्टियों ने इस्तीफे को स्वीकार करने पर सहमति जता दी। डॉ. अनिल से नाराजगी, लापरवाही मानी गई… फिर ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे को लेकर चर्चा शुरू हुई। ज्यादातर ट्रस्टी उनसे नाराज दिखे, क्योंकि गणना कक्ष की जिम्मेदारी डॉ. अनिल के पास थी। सदस्यों ने उनकी साफ लापरवाही को स्वीकार किया। फिर बात आई आमंत्रित सदस्य गोपाल राव की। सदस्यों ने माना कि साल-2020 में उन्हें ट्रस्ट में शामिल किया गया था। लेकिन, उन्होंने मंदिर की व्यवस्थाएं सुधारने के लिए कोई काम नहीं किया। इसलिए उनको हटाने पर सहमति बन गई। कृष्ण मोहन के नाम पर ज्यादातर ट्रस्टी एक मत रहे अब आगे कैसे व्यवस्था होगी, ये चर्चा शुरू हुई। तय हुआ कि मंदिर की व्यवस्था संभालने के लिए कृष्ण मोहन को महासचिव बनाया जाए। इस नाम पर ज्यादातर सदस्य सहमत हो गए। साथ ही, आगे चलकर सीईओ की नियुक्ति करने पर भी ट्रस्टी राजी हो गए। इसके लिए 3 सदस्यों के नाम रखे गए। इनमें रिटायर्ड जस्टिस प्रदीप कोहली, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी और सुरेश हावड़े के नाम शामिल थे। ये लोग मिलकर स्टैंडर्ड तय करेंगे, जिन्हें 22 जुलाई की मीटिंग में सदस्यों के सामने रखा जाएगा। ट्रस्ट ने माना- लोगों को सही बातें बतानी चाहिए थीं मीटिंग में यह चर्चा भी हुई कि मंदिर को दान देने वाले अपनी वस्तुओं के लिए क्लेम कर रहे हैं। लेकिन, ट्रस्ट की तरफ से कभी स्थिति साफ नहीं की गई। इससे असमंजस की स्थिति बन गई। इसके बाद कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने रजिस्टर सामने रखा, जिसमें 2800 वस्तुओं का ब्योरा था। तय हुआ कि यह ब्योरा लोगों के सामने रखना चाहिए। चंपत पहुंचे, लेकिन उन्हें बैठक में शामिल नहीं किया गया तय समय पर चंपत राय भी यात्री सुविधा केंद्र पहुंचे। लेकिन, ट्रस्ट के सदस्यों के साथ कुछ बातचीत होने के बाद वह परिसर के करीब ही मौजूद रहे। इस बैठक के कक्ष में दाखिल नहीं हुए। वहीं, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा बैठक के लिए आए ही नहीं थे। ———————————- यह खबर भी पढ़ें – राम मंदिर चढ़ावा चोरी-चंपत राय का इस्तीफा मंजूर, कृष्ण मोहन नए महासचिव; ट्रस्ट ने 4 सोने-चांदी की वस्तुएं दिखाईं अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। चंपत राय की जगह नए ट्रस्टी रिटायर्ड IFS कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव बनाया गया है। कृष्ण मोहन दलित समाज से हैं। पढ़िए पूरी खबर…

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