चलौली पंचायत में सरकारी भुगतान का ‘एकाउंट गेम’! एक ही खाते में बार-बार मजदूरी भुगतान, रिकॉर्ड से उठे भ्रष्टाचार के सवाल
कौशाम्बी। विकास खंड चायल की ग्राम पंचायत चलौली में सरकारी धन के भुगतान से जुड़े अभिलेख लगातार नए सवाल खड़े कर रहे हैं। पहले एक दिहाड़ी मजदूर के बैंक खाते में निविदा मद का भुगतान दर्ज होने का मामला सामने आया था, वहीं अब सरकारी पोर्टल पर उपलब्ध रिकॉर्ड में उसी बैंक खाते में विभिन्न विकास कार्यों की मजदूरी का बार-बार भुगतान दर्ज होने से पूरे मामले ने गंभीर रूप ले लिया है।
सरकारी भुगतान पोर्टल के अनुसार 29 अक्टूबर 2025 को “सत्य नारायण के घर से सोमनाथ के घर तक नाली निर्माण” कार्य के लिए ₹35,010 की मजदूरी रामलखन के बैंक खाते में भेजी गई। इतना ही नहीं, उपलब्ध रिकॉर्ड यह भी दर्शाते हैं कि इसी खाते में ग्राम पंचायत के अन्य विकास कार्यों की मजदूरी की राशि भी अलग-अलग तिथियों पर स्थानांतरित की गई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वास्तव में एक ही मजदूर ने इतने अलग-अलग विकास कार्यों में मजदूरी की, या फिर उसके बैंक खाते का उपयोग सरकारी भुगतान के माध्यम के रूप में किया गया? यदि सभी भुगतान नियमों के अनुरूप हुए हैं, तो संबंधित मस्टर रोल, उपस्थिति पंजिका, कार्य दिवस का विवरण, माप पुस्तिका (एमबी), भुगतान आदेश और बैंक अभिलेख सार्वजनिक किए जाने चाहिए, ताकि पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सके।
म पंचायत में होने वाले सभी वित्तीय लेन-देन की प्रशासनिक एवं वित्तीय जिम्मेदारी ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत सचिव की होती है। ऐसे में उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर दोनों की भूमिका की निष्पक्ष जांच आवश्यक मानी जा रही है। जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि भुगतान निर्धारित नियमों के अनुसार किए गए या सरकारी धन के संचालन में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता हुई।
इस संबंध में ग्राम प्रधान मैदान सिंह एवं ग्राम पंचायत सचिव धर्मेंद्र कुमार पांडेय से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक दोनों का मोबाइल फोन रिसीव नहीं हुआ। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
सरकारी रिकॉर्ड में सामने आए तथ्यों के बाद अब पूरे ग्राम पंचायत के मजदूरी भुगतान, निविदा भुगतान, मस्टर रोल, बैंक लेनदेन तथा संबंधित विकास कार्यों की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग तेज हो गई है। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
नोट: यह समाचार सरकारी अभिलेखों एवं उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें लगाए गए संभावित आरोपों की पुष्टि सक्षम जांच के बाद ही होगी। संबंधित पक्ष का जवाब प्राप्त होने पर उसे भी समान प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
