कौशाम्बी में एनाटॉमी उपकरण खरीद पर सवाल: मार्केट रेट से भारी अंतर, नियमों की अनदेखी का आरोप, जांच की उठी मांग
👉 एनाटॉमी उपकरण खरीद में करोड़ों का खेल? ,मार्केट रेट से लाखों अधिक भुगतान का आरोप..
👉 माइक्रोटोम व एम्बाल्मिंग मशीन की कीमत पर सवाल ,GFR नियमों की अनदेखी की आशंका गहराई
👉 बिल, टेंडर और रेट तुलना सार्वजनिक करने की मांग ,कौशाम्बी स्वास्थ्य विभाग में जांच की उठी आवाज
कौशाम्बी। स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत एनाटॉमी विभाग के लिए खरीदे गए उपकरणों में कथित तौर पर बाजार दर से भारी अंतर सामने आया है। दस्तावेज़ों के अनुसार Rotary Microtome की कीमत ₹21,50,000 दर्शाई गई, जबकि सामान्य बाजार में इसी श्रेणी की मशीन ₹1.5 लाख से ₹5 लाख के बीच उपलब्ध बताई जा रही है। इसी प्रकार Embalming Machine ₹95,000 में खरीदी गई, जबकि बाजार दर ₹30,000–₹50,000 बताई जा रही है। Hot Plate ₹42,500 में दर्ज है, जबकि बाजार मूल्य लगभग ₹15,000–₹30,000 के बीच है। इन मदों में लाखों रुपये के अंतर की आशंका जताई जा रही है।
दस्तावेज़ में कुल व्यय लगभग ₹3.14 करोड़ दर्शाया गया है। इसमें Articulated Skeleton Set (Original) की प्रति यूनिट दर ₹4,53,120 और Skeleton Disarticulated Bones (Original) ₹6,00,000 प्रति सेट दर्ज है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि ये वास्तविक मानव कंकाल (Original Human Specimen) हैं तो नियमानुसार इनके स्रोत, वैध अनुमति एवं आपूर्ति दस्तावेज़ अनिवार्य हैं; जबकि यदि ये शैक्षणिक PVC मॉडल हैं तो बाजार मूल्य इससे काफी कम होता है। ऐसे में बिल, सप्लाई ऑर्डर और तकनीकी स्पेसिफिकेशन की पारदर्शिता अहम हो जाती है।
नियम क्या कहते हैं?… सरकारी खरीद में General Financial Rules (GFR 2017) तथा Central Vigilance Commission (CVC) के दिशा-निर्देश लागू होते हैं।
प्रतिस्पर्धी निविदा (Competitive Bidding) अनिवार्य।
दर निर्धारण से पूर्व मार्केट रेट सर्वे और तुलनात्मक विवरण (Comparative Statement) आवश्यक।
L-1 (सबसे कम दर) का सिद्धांत।….
प्रत्येक भुगतान के साथ वैध बिल/वाउचर, सप्लाई ऑर्डर और स्वीकृति आदेश संलग्न होना अनिवार्य।
यदि बिना पर्याप्त बाजार तुलना या तकनीकी औचित्य के उच्च दर पर खरीद की गई है, तो यह वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आ सकता है।
बिल और भुगतान पर सवाल
सूत्रों के अनुसार संबंधित फर्मों को जारी बिलों में दर्शाई गई दरें अनुमानित लागत से मेल खाती हैं, लेकिन बाजार सर्वे का रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं है। यदि भुगतान वास्तविक बाजार दर से कई गुना अधिक पर किया गया है, तो यह शासकीय धन के संभावित दुरुपयोग की ओर संकेत करता है। नियमानुसार प्रत्येक बिल के साथ GST विवरण, आपूर्ति की पुष्टि (Goods Received Note) और निरीक्षण रिपोर्ट संलग्न होना चाहिए।
जांच की उठी मांग….
स्थानीय स्तर पर सामाजिक संगठनों और पत्रकारों ने मांग की है कि—
संपूर्ण खरीद प्रक्रिया की स्वतंत्र ऑडिट जांच कराई जाए।
निविदा, बिल, भुगतान आदेश और बाजार तुलना रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय एवं दंडात्मक कार्रवाई हो।
यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला सार्वजनिक धन की पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन सकता है। प्रशासनिक स्तर पर अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि स्वास्थ्य विभाग इस पर क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण देता है।
अमरनाथ झा पत्रकार कौशाम्बी – 8318977396 ,9415254415
