एक ही आराजी में दो पट्टों का विवाद! दलित परिवार के आवासीय पट्टे पर उठे सवाल, प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
कौशाम्बी। सिराथू तहसील क्षेत्र में एक ही आराजी संख्या 536 मि. में अलग-अलग समय पर किए गए दो पट्टा आवंटनों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मामले में एक दलित परिवार ने अपने आवासीय पट्टे पर नामांतरण और कब्जा दिलाए जाने की मांग करते हुए जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच की अपील की है।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2004 में अयाज अहमद पुत्र ताजुद्दीन के नाम इसी आराजी में 5 बिस्वा कृषि भूमि का पट्टा आवंटित किया गया था। वहीं, लगभग सात माह बाद वर्ष 2005 में इसी आराजी संख्या में सियाम्बर (दलित) के नाम 1 बिस्वा आवासीय पट्टा स्वीकृत किया गया। सियाम्बर के निधन के बाद उनके पुत्र धर्मवीर ने जिलाधिकारी कौशाम्बी और उपजिलाधिकारी (एसडीएम) सिराथू को प्रार्थना-पत्र देकर अपने पिता के पट्टे का नामांतरण कराने तथा भूमि पर कब्जा दिलाने की मांग की है।
धर्मवीर का कहना है कि उनके पिता को आवंटित आवासीय पट्टे की भूमि का राजस्व विभाग द्वारा सीमांकन भी कराया जा चुका है। इसके बावजूद विरोध के चलते वे आज तक उस भूमि पर निर्माण कार्य नहीं करा सके। उनका आरोप है कि उसी समय अन्य पट्टाधारकों को उनकी भूमि पर कब्जा दिला दिया गया, जबकि उन्हें अब तक उनके हिस्से की जमीन का वास्तविक लाभ नहीं मिल पाया है।
विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि एक ही आराजी संख्या में कृषि और आवासीय पट्टे अलग-अलग हिस्सों में नियमों के अनुसार दिए गए थे या फिर एक ही भूमि पर दो अलग-अलग आवंटन कर दिए गए। यदि ऐसा पाया जाता है तो यह राजस्व अभिलेखों और पट्टा आवंटन प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर मामला हो सकता है, जिसकी विस्तृत जांच आवश्यक होगी।
स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों द्वारा अपेक्षित सहयोग नहीं किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक किसी सक्षम अधिकारी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
अब पूरे मामले में जिला प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। यदि राजस्व अभिलेखों की जांच, सीमांकन और दोनों पट्टा आदेशों का सत्यापन कराया जाता है, तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि दोनों आवंटन नियमानुसार हुए थे या नहीं तथा विवादित भूमि पर वैधानिक अधिकार किसका बनता है। क्षेत्र के लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई और पात्र व्यक्ति को न्याय दिलाने की मांग की है।
