कौशाम्बी में धान खरीद पर बड़े सवाल, चार साल के रिकॉर्ड की जांच की मांग

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Kaushambi voice

👉 फरवरी 2026 तक हुई र्भैला मकदूमपुर में धान खरीद के आंकड़ों पर सवाल, 30 किसानों से 4 हजार कुंतल खरीद का दावा…
👉 धान खरीद में गड़बड़ी का आरोप, किसानों के नाम पर 4 हजार कुंतल से अधिक खरीद दर्ज..
👉 भैला मकदूमपुर में धान खरीद की जांच की मांग, किसानवार रिकॉर्ड के सत्यापन की उठी मांग..
👉 30 किसानों से 4 हजार कुंतल धान खरीद! रिकॉर्ड की हकीकत जांचने की मांग..
👉 धान खरीद रिकॉर्ड पर उठे सवाल, भूमि और उत्पादन से होगा सत्यापन..

👉 यूपीसीयू के केंद्रों पर फर्जी खरीद के आरोप, भैला मकदूमपुर में 30 किसानों से 4 हजार कुंतल से अधिक खरीद का दावा..

👉 जमीन कम और धान बिक्री हुई हजारों कुंटल,आखिर कैसे हुई इतनी कम जमीन में पैदावार, खतौनी सत्यापन करने वाले अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल…

कौशाम्बी। जिले में धान खरीद व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि यूपीसीयू के विभिन्न धान क्रय केंद्रों पर खरीद के रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर अनियमितता की गई और सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका है। मामले की निष्पक्ष जांच होने पर ही वास्तविकता सामने आ सकती है। इन धान खरीद में यूपीसीयू एजेंसी के साथ जिले के आला अधिकारी, एसडीएम, एडीएम, डिप्टी आरएमओ सहित सभी की भूमिका संदिग्ध है, जिसकी सत्यापन से लेकर धान खरीद तक की जांच होनी चाहिए।

इसी तरह मंझनपुर तहसील के मंझनपुर ब्लॉक स्थित भैला मकदूमपुर गांव में यूपीसीयू के धान क्रय केंद्र के रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि करीब 36 किसानों के नाम पर 4 हजार कुंतल से अधिक धान की खरीद दर्ज है। इनमें पंचम, मोहन, मीना देवी, रिषभ, सूर्य प्रताप विश्वकर्मा, राधा कृष्ण , राजाराम, प्रेम नारायण, फूलपत्ती,पार्वती देवी, समेत अन्य किसानों के नाम बताए जा रहे हैं।

आरोप है कि दर्ज खरीद की मात्रा किसानों की वास्तविक कृषि भूमि और संभावित उत्पादन से मेल नहीं खाती। ऐसे में किसानवार पंजीकरण, खतौनी, फसल उत्पादन, तौल पर्ची, भुगतान और धान उठान का सत्यापन जरूरी है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि विभागीय जांच के बाद ही हो सकेगी।

मामला सिर्फ एक केंद्र तक सीमित नहीं रहने की बात कही जा रही है। आरोपों के मद्देनजर जिले में संचालित सभी एजेंसियों के धान क्रय केंद्रों के पिछले चार खरीद वर्षों के रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग उठ रही है।

चार वर्षों का हो विशेष ऑडिट…..

मांग है कि खरीफ विपणन वर्ष 2022-23, 2023-24, 2024-25 और 2025-26 में जिले के सभी धान क्रय केंद्रों की केंद्रवार जांच कराई जाए खासकर यूपीसीयू का ज्यादा घोटाला निकलेगा। इसमें किसानवार खरीद, किसान की भूमि, तौल पर्चियां, भुगतान, स्टॉक रजिस्टर, धान उठान, मिलर्स को भेजी गई मात्रा और अंतिम स्टॉक का मिलान कराया जाए।

यदि रिकॉर्ड में दर्ज खरीद और वास्तविक उत्पादन में अंतर मिलता है तो संबंधित केंद्रों, एजेंसियों, क्रय प्रभारियों और अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच की जाए। साथ ही सरकारी धन के गलत भुगतान की पुष्टि होने पर नियमानुसार वसूली और कार्रवाई की जाए।

अब सवाल यह है कि भैला मकदूमपुर के किशन समेत जिले के सभी धान क्रय केंद्रों के पिछले चार वर्षों के रिकॉर्ड का विभागीय सत्यापन कब होगा? क्या किसानवार खरीद और भुगतान का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा और क्या रिकॉर्ड तथा वास्तविक स्टॉक का मिलान कराकर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी?

विभागीय जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और सरकारी धान को किसी प्रकार की क्षति हुई है या नहीं।

अमरनाथ झा पत्रकार -9415254415

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