पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग तेज, संपत्ति जांच और कार्यकाल सीमित करने की उठी आवाज
प्रदेश में पुलिस व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है। आम लोगों और सामाजिक संगठनों की ओर से यह मांग उठ रही है कि जो दारोगा, कोतवाल, चौकी प्रभारी या थाना प्रभारी लंबे समय से एक ही जगह या लगातार चार्ज पर बने हुए हैं, उनकी संपत्ति की गहन जांच कराई जाए। आरोप है कि कई अधिकारियों ने अपने कार्यकाल के दौरान शहर और गांवों में आलीशान मकान, खेत, प्लॉट और महंगी गाड़ियां खरीदी हैं, जिसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
मांग करने वालों का कहना है कि सिर्फ अधिकारी ही नहीं, बल्कि उनके परिवार—विशेषकर पत्नी के नाम पर खरीदी गई संपत्तियों और सोने-चांदी के आभूषणों की भी जांच होनी चाहिए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि संपत्ति वैध आय से अर्जित की गई है या नहीं।
हेडिंग 2: 6 महीने का कार्यकाल तय करने की मांग, ‘सेटिंग सिस्टम’ खत्म करने पर जोर
इस मुद्दे पर सबसे प्रमुख सुझाव यह सामने आया है कि किसी भी दारोगा या कोतवाल को एक ही थाना या चौकी पर अधिकतम 6 महीने तक ही चार्ज दिया जाए। इसके बाद अनिवार्य रूप से स्थानांतरण किया जाए, ताकि किसी प्रकार की ‘सेटिंग’ या प्रभाव का दायरा सीमित किया जा सके।
स्थानीय लोगों का मानना है कि लंबे समय तक एक ही पद पर रहने से कुछ अधिकारियों पर पक्षपात और भ्रष्टाचार के आरोप लगने लगते हैं। यदि 6-6 महीने का निश्चित कार्यकाल लागू किया जाता है, तो सभी अधिकारियों को समान अवसर मिलेगा और सिस्टम में निष्पक्षता बढ़ेगी।
हालांकि, इस प्रस्ताव पर प्रशासनिक स्तर पर अभी कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन यह मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करनी है, तो ऐसे सुधारों पर गंभीरता से विचार करना आवश्यक है।
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