फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रमाणपत्र से सरकारी नौकरी का खेल, मिर्जापुर, कौशाम्बी, प्रयागराज, भदोही, बस्ती, बांदा समेत कई जिलों में फैला रैकेट..

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👉 फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रमाणपत्र से सरकारी नौकरियों का गोरखधंधा ,संजय दुबे, मिर्जापुर निवासी, रैकेट का बड़ा खिलाड़ी

👉 बस्ती के जय किसान इंटर कॉलेज में फर्जी सर्टिफिकेट पर नौकरी कर रहा है ,रिश्तेदारों, दोस्तों और बेटे को भी दिलवाई फर्जी प्रमाणपत्र से नौकरी ,भदोही का हर्ष यादव रैकेट का मुख्य सरगना पकड़ा जा चुका है

👉 प्रयाग रेलवे स्टेशन पर भी फर्जी एससी/एसटी प्रमाणपत्र से नौकरी का खुलासा ,उच्च अधिकारियों की मिलीभगत और लेन-देन से दबते रहे मामले ,संयुक्त जांच हुई तो दर्जनों की नौकरी जाएगी और मिलीभगत उजागर होगी..

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी पाने के लिए फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रमाणपत्र बनाने का गोरखधंधा लगातार बढ़ता जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, मिर्जापुर जिले के विंध्याचल थाना क्षेत्र के जासा पोस्ट बिहसड़ा निवासी संजय कुमार पुत्र शिवदत्त दुबे इस रैकेट का बड़ा खिलाड़ी बताया जा रहा है, जो फर्जी सर्टिफिकेट बनवाकर कई लोगों को पुलिस, शिक्षक और रेलवे समेत विभिन्न विभागों में नौकरी दिलवा चुका है।
जानकारी के मुताबिक, इस मामले में पहले भी कई लोग पकड़े गए हैं और जेल भेजे जा चुके हैं, लेकिन बावजूद इसके यह धंधा थमने का नाम नहीं ले रहा।
मुख्य खुलासे – संजय दुबे, विंध्याचल (मिर्जापुर) निवासी, फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रमाणपत्र बनाने में माहिर। वह खुद भी इसी तरह फर्जी सर्टिफिकेट बनकर नौकरी कर रहा है । ईस समय जय किसान इण्टर कालेज लालपुर एमिलियाघीस बस्ती जिला में तैनात है।
बताया तो यह भी जाता है कि कौशाम्बी, प्रयागराज, बस्ती, भदोही और बांदा में कई लोग इसी माध्यम से सरकारी नौकरी कर रहे हैं।
हर्ष यादव, भदोही निवासी, इस रैकेट में मुख्य सरगना के रूप में पकड़ा गया था।
संजय दुबे, बस्ती जिले में जय किसान इंटर कॉलेज में कार्यरत, जेल की सजा काट चुका है, फिर भी नौकरी पर है।
संजय दुबे ने अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और बेटे को भी फर्जी प्रमाणपत्र से नौकरी दिलवाई — उसका बेटा बांदा में पुलिस ट्रेनिंग कर रहा है।

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इसी तरह प्रयाग रेलवे स्टेशन पर दो ब्राह्मण व्यक्ति कई वर्षों से फर्जी एससी/एसटी प्रमाणपत्र पर रेलवे में नौकरी कर रहे हैं — ये बेनीगंज मोहल्ला, प्रयागराज में निवास कर रहे हैं। इस सभी पूरे मामले में उच्च अधिकारियों की मिलीभगत भी सामने आई है — आरोप है कि लेन-देन कर कई बार मामले रफा-दफा कर दिए जाते हैं।
अधिकारियों को की गई शिकायतें – इस फर्जीवाड़े को लेकर कई बार उच्च अधिकारियों को पत्र भेजकर शिकायत की गई है।
लखनऊ डीआरएम रेंज के अंतर्गत आने वाले प्रयाग रेलवे स्टेशन पर भी शिकायतें पहुंच चुकी हैं।
कौशाम्बी जिले में भी कुछ लोगों पर जांच हुई और कार्यवाही की गई, लेकिन पूरा रैकेट अब भी सक्रिय है।  यदि इस पूरे मामले की संयुक्त जांच ,एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) , विजिलेंस विभाग
रेलवे, शिक्षा और पुलिस भर्ती बोर्ड द्वारा की जाती है, तो कई दर्जन लोग नौकरी से बाहर हो सकते हैं और कई अधिकारियों की मिलीभगत भी उजागर हो सकती है।

अमरनाथ झा पत्रकार – 8318977396

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