कौशांबी में शत्रु संपत्ति घोटाला: तहसील कर्मचारियों की मिलीभगत से सरकारी जमीनों की हुई हेराफेरी ,भोला रिजवी, जोखू और तहसीलदार का कथित ड्राइवर हसीनुल्लाह उर्फ रत्तू जांच के घेरे में

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👉 कौशांबी में शत्रु संपत्ति घोटाला का खुलासा….

भोला रिजवी, जोखू और रत्तू उर्फ हसीनउल्ला पर गंभीर आरोप ,तहसीलदार का ड्राइवर बनकर रत्तू करता रहा फर्जीवाड़ा

👉  58 साल की उम्र में फर्जी मार्कशीट से चपरासी बना रत्तू , आराजी नंबर 1914/1 सहित कुल 149 रजिस्ट्री हुई रद्द, फिर भी खतौनी में है चढ़ा नाम…
👉 शत्रु संपत्ति बेचने में तहसील कर्मचारियों की मिलीभगत

👉 4 लोग गए जेल, मगर 28 खरीदारों पर नहीं हुई कार्रवाई

👉 सरकारी जमीनों की हेराफेरी में रत्तू की बड़ी भूमिका, प्रशासनिक चुप्पी पर उठ रहे सवाल, जांच की मांग तेज

👉 भूदान की जमीनों मे भी हुआ है जमीन का घोटाला, गलत तरीके से नाम चढ़ाकर करोड़ों में बेंच लिए जमीन ,भेलखा ,पाता,बबुरा, भैला आदि का है मामला ,कब होगी जांच, अधिकारी भी है शामिल

कौशांबी, उत्तर प्रदेश। जनपद में शत्रु संपत्तियों और सरकारी जमीनों की हेराफेरी का बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें भूमाफिया भोला रिजवी, जोखू और तहसील प्रशासन में कार्यरत हसीनुल्लाह उर्फ रत्तू की संलिप्तता सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि ये लोग वर्षों से तहसील में अधिकारियों को गुमराह कर जमीनों की अवैध खरीद-फरोख्त में लिप्त हैं।

सूत्रों की मानें तो हसीनुल्लाह उर्फ रत्तू जो खुद को तहसीलदार का ड्राइवर बताता है, हाल ही में 58 वर्ष की उम्र में चपरासी के पद पर नियुक्त किया गया है। उस पर फर्जी मार्कशीट के आधार पर नौकरी पाने का आरोप भी लग रहा है। जबकि वह तहसील में वर्षों से सक्रिय रहकर जमीन संबंधी फर्जीवाड़ों में अहम भूमिका निभाता आ रहा है।

प्रकरण में सबसे बड़ी बात यह है कि आराजी नंबर 1914 और 1914/1 से जुड़ी शत्रु संपत्तियों में करीब 28 से ज्यादा फर्जी रजिस्ट्री कर बिक्री की गई, जिनमें से सखावत उल्ला उर्फ जोखू एवं इसका भाई मोहम्मद रिज़वी उर्फ भोला तथा हारून एवं अबू तारीख सिद्दीकी निवासी अरैल नैनी चार लोगों को जेल भी जाना पड़ा है । इसमें विक्रेता में इनकी दोनों लोगो की पत्नियां भी शामिल है । लेकिन, इन संपत्तियों को खरीदने वाले 28 लोगों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। खतौनी में अब भी इनका नाम दर्ज है, जिससे प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सूत्र बताते हैं कि रत्तू और उसके साथियों ने वर्षों से सरकारी जमीनों को अपने प्रभाव और धोखाधड़ी के बल पर निजी नामों में दर्ज कराकर बेचने का बड़ा नेटवर्क खड़ा कर रखा था। अब यह जांच का विषय है कि आखिर किस आधार पर भोला रिजवी और जोखू के नाम जमीनें रिकॉर्ड में दर्ज हुईं और किन अधिकारियों की मिलीभगत से यह खेल संभव हुआ यह जांच का विषय है। हालांकि कि इस समय जिले में लगभग 5-6 दर्जन अवैध तरीके से प्लॉटर सक्रिय है । वर्षों पहले इन भुमाफयाओं कि सूची भी बनाई गई थी लेकिन अब यह सूची गायब है । इन पर आज तक कोई भी कार्रवाई नहीं हुई है, यह लोग एग्रीकल्चर लैंड बेचकर प्लाटिंग करके लग्जरी कर फॉर्च्यूनर अड़ी से घूमते हैं । इसी तरह जिला मुख्यालय के आसपास भूदान कमेटी की जमीनो में भी जमकर घोटाला किया गया है। भूदान की जमीनों में अपना नाम गलत तरीके से चढ़ा करके करोड़ों में बेंच गई है । यदि जांच हुई तो भेलखा, पाता, बबुरा , भैला आदि गांव कि जमीनों का भ्रष्टाचार उजागर होना तय है।

अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस बड़े भूमि घोटाले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कब तक कार्रवाई करता है। जनता और पीड़ित पक्षों की ओर से सीबीआई या उच्चस्तरीय जांच की मांग भी उठ रही है।  हालांकि इस मामले में एसडीएम सदर एम0पी वर्मा ने कहा है कि मामले की जांच कराकर कार्यवाही की जाएगी।

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