सलेमपुर देवरिया आईटीआई प्रिंसिपल का कारनामा: पत्नी की डिलीवरी का बनाया ढाई लाख का बिल,भुगतान के लिए बिल भेजा निदेशालय
👉 देवरिया के सलेमपुर गवर्नमेंट आईटीआई के प्रिंसिपल नीलेश मिश्रा पर बड़ा घोटाले का आरोप , पत्नी की डिलीवरी का बिल बनवाया ढाई लाख ,भुगतान के लिए भेजवाया निदेशालय।
👉 बिना अनुमति लखनऊ के निजी हॉस्पिटल में कराया इलाज, गोवा घूमने का भी नहीं लिया विभागीय अवकाश ,हफ्ते में मुश्किल से एक-दो दिन ही आते हैं संस्थान, सरकारी वाहन का कर रहे निजी उपयोग।
👉 भंडारी पारसनाथ के साथ कर मिलीभगत, डेढ़ करोड़ रुपये के घोटाले में जुड़ा नाम। गोरखपुर के आदेश पत्र के बावजूद पारस को चार्ज से नहीं किया गया मुक्त।
👉 निजी हित में फर्जी चपरासी तैनात, वेतन भुगतान पर उठे सवाल , गंभीर जांच के दायरे में पूरा मामला, निदेशालय और प्रशासन में मचा हड़कंप।
देवरिया। सलेमपुर गवर्नमेंट आईटीआई में तैनात प्रिंसिपल नीलेश मिश्रा का मामला इन दिनों जोरदार चर्चा में है। आरोप है कि प्रिंसिपल ने अपनी पत्नी की डिलीवरी लखनऊ निजी अस्पताल में करवाई और उसके लिए लगभग ढाई लाख रुपये का बिल बनवाकर निदेशालय को भुगतान के लिए भेज दिया। सबसे बड़ी बात यह है कि देवरिया से गोरखपुर जैसे नजदीकी बड़े शहर में इलाज न कराकर सीधे लखनऊ निजी अस्पताल में इलाज करवाना सवाल खड़े कर रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, नीलेश मिश्रा हफ्ते में मुश्किल से एक-दो दिन ही संस्थान में उपस्थित रहते हैं। शेष दिनों में वह अक्सर नदारद रहते हैं, जिसका सीसीटीवी फुटेज से भी सत्यापन किया जा सकता है। प्रिंसिपल द्वारा सरकारी वाहन का लगातार निजी उपयोग करने की भी शिकायतें मिल रही हैं।
इतना ही नहीं, आईटीआई में तैनात भंडारी पारसनाथ के साथ मिलीभगत कर घोटाले का बड़ा खेल चलाने का आरोप भी सामने आया है। बताया जा रहा है कि स्टोरकीपर पारस को नियम विरुद्ध आधे से ज्यादा चार्ज सौंप दिया गया है। पारस पर पहले से ही गोरखपुर में डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का मामला चल रहा है, फिर भी उन्हें 30 जून को रिटायर होने तक चार्ज से मुक्त नहीं किया गया है।
गोरखपुर से कई बार पत्र भेजे जाने के बावजूद प्रिंसिपल ने पारस को मुक्त नहीं किया, जिससे उनके मिलीभगत की आशंका और मजबूत होती जा रही है।
अब एक और बड़ा खुलासा हुआ है कि प्रिंसिपल नीलेश मिश्रा ने अपनी पत्नी के इलाज के संबंध में न तो उच्च अधिकारियों से कोई अनुमति ली और न ही निदेशालय को समय रहते कोई सूचना दी। यहां तक कि वह बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के अपनी पत्नी को लेकर गोवा घूमने भी गए थे। इस निजी यात्रा के लिए भी न तो छुट्टी ली गई और न ही विभाग को सूचित किया गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि प्रिंसिपल ने संस्थान में एक फर्जी चपरासी को भी काम पर लगा रखा है। चर्चा है कि यह फर्जी चपरासी लंबे समय से कार्यरत है, लेकिन उसकी कोई आधिकारिक नियुक्ति नहीं है। बड़ा सवाल यह है कि इस चपरासी का वेतन किस मद से और किस आधार पर भुगतान किया जा रहा है। यदि जांच कराई जाए तो यह एक बड़ा वेतन घोटाला भी सामने आ सकता है।
नीलेश मिश्रा द्वारा पत्नी के इलाज के नाम पर बनाए गए ढाई लाख रुपये के बिल, गोवा यात्रा में नियमों की अनदेखी, पारस की चार्ज से मुक्त न करने और फर्जी चपरासी के वेतन भुगतान जैसे कई गंभीर मामलों में प्रिंसिपल की भूमिका अब जांच के दायरे में आ गई है। यदि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो वित्तीय अनियमितताओं और फर्जीवाड़े का बड़ा घोटाला उजागर हो सकता है।
इस मामले को लेकर अब संस्थान और निदेशालय के गलियारों में हलचल तेज हो गई है। सभी की नजरें अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
अमरनाथ झा (9415254415 )
