देवरिया के सलेमपुर आईटीआई में भ्रष्टाचार का आरोप, प्रिंसिपल और भंडारी पर मिलीभगत के गंभीर सवाल,भंडारी पर डेढ़ करोड़ के घोटाले का आरोप
देवरिया आईटीआई में भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा…..
👉 सालिमपुर देवरिया आईटीआई में प्रिंसिपल और भंडारी की मिलीभगत का आरोप ,भंडारी पारस को आधा दर्जन से ज्यादा ट्रेड का चार्ज देने पर सवाल।
👉 पारस पर गोरखपुर में 1.57 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच लंबित, पारस की अवैध मूल नियुक्ति भी ओवरऐज मामले में उच्च न्यायालय में विचाराधीन।
👉 प्रिंसिपल नीलेश मिश्रा पर सरकारी इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल के निजी इस्तेमाल का आरोप ,स्थानीय लोग बोले – प्रिंसिपल अक्सर विद्यालय से रहते हैं गायब।
👉 सीसीटीवी फुटेज और वाहन रिकॉर्ड से खुल सकती है बड़ी सच्चाई ,विभागीय अधिकारियों ने जांच का दिया आश्वासन, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई।
देवरिया । देवरिया के सलेमपुर स्थित राजकीय औद्योगिक संस्थान (आईटीआई) में व्यापक भ्रष्टाचार का मामला प्रकाश में आया है। संस्थान के प्रिंसिपल नीलेश मिश्रा और भंडारी पारसनाथ पर मिलीभगत कर बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितताएं करने के गंभीर आरोप लगे हैं।
पारसनाथ भंडारी को एक साथ कई ट्रेड का चार्ज
सूत्रों के अनुसार, प्रिंसिपल नीलेश मिश्रा ने भंडारी पारसनाथ को एक साथ फैशन डिजाइनिंग, इलेक्ट्रीशियन, रेफ्रिजरेशन एंड एयर कंडीशनिंग, डीजल मैकेनिक, सुरक्षा सहित आधा दर्जन से अधिक ट्रेड का चार्ज सौंपा है। यह जिम्मेदारी उस व्यक्ति को दी गई है जिसका उच्च न्यायालय में नियुक्ति को लेकर मुकदमा विचाराधीन है। हैरानी की बात यह है कि भंडारी पारसनाथ 30 जून को सेवानिवृत्त हो रहे हैं, फिर भी उन्हें इतने महत्वपूर्ण विभागों का प्रभार दिया गया है।
गोरखपुर में 2012- 13 में 1.57 करोड़ के घोटाले का मामला
सूत्रों ने बताया कि 4 अप्रैल 2025 को प्रिंसिपल नीलेश मिश्रा द्वारा पारस के खिलाफ पत्र लिखा गया था जिसमें उल्लेख था कि गोरखपुर आईटीआई में पारसनाथ के कार्यकाल के दौरान 1.57 करोड़ रुपये के सामान की खरीद में अनियमितताएं पाई गई थीं, जिसकी जांच अब भी लंबित है। इस पूरे प्रकरण में डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले की बात कही जा रही है। जिसके बारे में प्रिंसिपल गोरखपुर आईटीआई ने 29 अप्रैल 2025 को प्रिंसिपल सलीमपुर देवरिया नीलेश मिश्रा को पत्र लिखकर पारसनाथ को मुक्त करने के लिया लिखा गया है।
पारस की विवादित है नियुक्ति ,मूल नियुक्ति अवैध /ओवर ऐज का मामला उच्च न्यायालय में है विचाराधीन….
पारसनाथ की नियुक्ति प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में है। उन पर अवैध रूप से ओवरऐज होकर नौकरी प्राप्त करने का आरोप है, जिसका मामला उच्च न्यायालय में लंबित है। इसके बावजूद प्रिंसिपल द्वारा उन्हें एक के बाद एक कई जिम्मेदारियां सौंपना संस्थान में गंभीर अनियमितताओं की ओर इशारा करता है।
सरकारी इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल (ई 0वी) का निजी उपयोग
नीलेश मिश्रा पर सरकारी इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल (ईवी) के निजी उपयोग के भी गंभीर आरोप लगे हैं। नियमों के अनुसार, यह वाहन केवल संस्थान परिसर और प्रशिक्षण कार्यों के लिए ही इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन सूत्रों का दावा है कि प्रिंसिपल इसे अपने घर, ससुराल और अन्य निजी कार्यों में इस्तेमाल करते हैं। यहां तक कि पियासी गांव के स्थानीय लोगों ने भी पुष्टि की है कि प्रिंसिपल अक्सर इस वाहन से निजी यात्राएं करते हुए देखे गए हैं।
बताया जा रहा है कि कम समय में ही यह वाहन 5000 किलोमीटर से अधिक चल चुका है, जबकि शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि वाहन को कैंपस के बाहर नहीं ले जाया जा सकता।
प्रिंसिपल अक्सर रहते हैं अनुपस्थित
सूत्रों के मुताबिक, नीलेश मिश्रा नियमित रूप से आईटीआई परिसर में उपस्थित नहीं रहते। वे महीने में कभी-कभार ही संस्थान आते हैं, जिसकी पुष्टि सीसीटीवी फुटेज की जांच से की जा सकती है। परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे के रिकॉर्ड शासन द्वारा खंगाले जाएं तो प्रिंसिपल की उपस्थिति की सच्चाई उजागर हो सकती है।
परिवहन विभाग से जांच की मांग
स्थानीय लोगों और कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि प्रिंसिपल द्वारा ईवी के निजी उपयोग की जांच परिवहन विभाग की तकनीकी टीम से कराई जाए ताकि इस पूरे मामले का सच सामने आ सके।
सरकारी पक्ष की प्रतिक्रिया
इस पूरे प्रकरण में जब विभागीय अधिकारियों से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जल्द ही जांच कराई जाएगी। संबंधित अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि सीसीटीवी फुटेज, वाहन की माइलेज रिपोर्ट और भंडारी को सौंपे गए अतिरिक्त कार्यों की विस्तृत समीक्षा कराई जाएगी। विभागीय प्रवक्ता ने कहा कि “अगर जांच में अनियमितताएं साबित होती हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
