प्रयागराज में महायोजना को दर किनार कर हो रहा अवैध निर्माण, अफसरो की मिलीभगत से फल फूल रहा है भ्रष्टाचार

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👉 प्रयागराज में महायोजना के नियम ताक पर, गंगा किनारे धड़ल्ले से हो रहा अवैध निर्माण, PDA की चुप्पी सवालों के घेरे में

प्रयागराज। शहर में प्रयागराज महायोजना पूरी तरह से कागजों में सिमट कर रह गई है। महायोजना के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। गंगा नदी के किनारे कई क्षेत्रों में मानक विहीन और बिना नक्शा पास कराए धड़ल्ले से आवासीय निर्माण कार्य जारी हैं। हैरानी की बात यह है कि यह सब प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) के अधिकारियों और कर्मचारियों की जानकारी में होते हुए भी हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार मूकदर्शक बने हुए हैं।

इन इलाकों में हो रहा धड़ल्ले से अवैध निर्माण

दारागंज, फाफामऊ, तेलियरगंज, राजापुर, नया पुरवा आदि क्षेत्र सहित गंगा नदी के किनारे के कई इलाकों में बिना किसी नक्शा पास कराए, बिना मानक के आवासीय निर्माण तेजी से चल रहे हैं। कई मकान गंगा के तट से 500 मीटर की निषिद्ध सीमा के भीतर खड़े किए जा रहे हैं, जबकि स्पष्ट नियम है कि नदी के किनारे इस परिधि में निर्माण प्रतिबंधित है।

PDA और जिम्मेदार अधिकारी क्यों हैं खामोश?

स्थानीय लोगों और सूत्रों का आरोप है कि प्रयागराज विकास प्राधिकरण के अधिकारी और कर्मचारी अवैध निर्माणों पर जानबूझकर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। कथित रूप से धन उगाही कर मामलों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। इस मिलीभगत के कारण अवैध कॉलोनियां भी लगातार विकसित हो रही हैं। नैनी, झूंसी, दारागंज, तेलियरगंज जैसे क्षेत्रों में बिना स्वीकृत लेआउट के प्लाटिंग और मकान निर्माण जोरों पर है।

शहर की महायोजना हो रही ध्वस्त

प्रयागराज महायोजना का मकसद शहर का सुव्यवस्थित और पर्यावरण संतुलित विकास था, लेकिन अवैध निर्माणों ने योजना की नींव को ही हिला दिया है। बिना प्लानिंग के हो रहे ये निर्माण भविष्य में यातायात जाम, जलभराव, पर्यावरणीय संकट और अव्यवस्थित जनसंख्या दबाव का कारण बन सकते हैं।

जनआंदोलन की चेतावनी

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों में PDA की निष्क्रियता को लेकर भारी रोष है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही गंगा किनारे और अन्य क्षेत्रों में हो रहे अवैध निर्माणों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो वे जनआंदोलन करेंगे और मामले को शासन स्तर तक ले जाएंगे।

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