नेवादा में मनरेगा की संदिग्ध हाजिरी पर सवाल, सितंबर माह में रोज 65–75 मजदूरों की उपस्थिति का दावा
👉 इच्छना गांव में क्लोन फोटो से हाजिरी लगाने और एक समय की उपस्थिति पर पूरे दिन का भुगतान कराने के आरोप, जांच की मांग..
👉 प्रति वर्ष दिखाया गया है करोड़ो में कार्य,फर्जी काम दिखाकर किया गया है भुगतान, जांच की उठी मांग..
कौशाम्बी । नेवादा ब्लॉक के इच्छना गांव में मनरेगा कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि 1 सितंबर से प्रतिदिन मनमाना तरीके से मजदूरों की हाजिरी लगाई जा रही है। एक सप्ताह से करीब 65 से 78 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की जा रही है, जबकि मौके पर मौजूद श्रमिकों की संख्या और मस्टर रोल में दर्ज हाजिरी में अंतर बताया जा रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि मनरेगा पोर्टल पर वास्तविक कार्यस्थल की तस्वीरों के बजाय क्लोन अथवा पुरानी तस्वीरों का इस्तेमाल कर हाजिरी दर्ज की जा रही है। आरोप यह भी है कि एक समय की हाजिरी लगाकर पूरे दिन की उपस्थिति दर्शाई जाती है, जिसके आधार पर मजदूरों के भुगतान का दावा किया जा रहा है।

मामले में मेठ, ग्राम प्रधान और एपीओ पंकज सोनकर की कथित मिलीभगत के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
ग्रामीणों ने मांग की है कि 1 सितंबर से अब तक के मस्टर रोल, मनरेगा पोर्टल की जियो-टैग तस्वीरें, मजदूरों की वास्तविक उपस्थिति, कार्यस्थल का स्थलीय सत्यापन और भुगतान अभिलेखों का मिलान कराया जाए। यदि रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में अंतर मिलता है तो सरकारी धन की कथित निकासी और बंदरबांट की तस्वीर भी सामने आ सकती है।
अब बड़ा सवाल यह है कि डीसी मनरेगा और सीडीओ मामले का निष्पक्ष स्थलीय सत्यापन कब कराएंगे? जांच होने पर ही पता चलेगा कि इच्छना गांव में दर्ज हो रही मजदूरों की हाजिरी वास्तविक है या फिर मनरेगा पोर्टल पर कागजी आंकड़ों के जरिए सरकारी धन के भुगतान का खेल चल रहा है।
रिपोर्ट: जीतेन्द्र कुमार झा, पत्रकार महुआ खबर
