बालू माफिया का खेल: अवैध खनन, फर्जी पर्ची और कानून की खुली अवहेलना, वोटों से भी खनन जारी

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कौशाम्बी–प्रयागराज सीमा से ग्राउंड रिपोर्ट….

कौशाम्बी और प्रयागराज जिले में बालू खनन को लेकर एक बड़ा घोटाला सामने आ रहा है, जिसमें अवैध खनन, फर्जी दस्तावेज, सरकारी राजस्व की चोरी और प्रशासनिक मिलीभगत के गंभीर आरोप लग रहे हैं। यह मामला अब सिर्फ नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं, बल्कि एक संगठित आपराधिक नेटवर्क की ओर इशारा करता है। जहां एक तरफ घाट से ही बालू वाहनों में ओवरलोडिंग और परिवहन का धंधा रुकने का नाम नहीं ले रहा है।

सूत्रों के मुताबिक जांच में सामने आया है कि बालू खनन का पट्टा आधिकारिक रूप से मझियारी क्षेत्र में स्वीकृत है, लेकिन वास्तविक खनन औंधन और सईदपुर के बीच खुलेआम किया जा रहा है। यह सीधे तौर पर Mines and Minerals (Development and Regulation) Act, 1957 (MMDR Act) की धारा 4(1A) का उल्लंघन है, जिसमें निर्धारित क्षेत्र के बाहर खनन को अपराध माना गया है। वहीं, धारा 21 के तहत ऐसे मामलों में सख्त दंड का प्रावधान है।
घाटों पर वसूली का एक तय सिस्टम चल रहा है, जहां 6 चक्का ट्रक से ₹7100, 12 चक्का से ₹14,200 और ट्रैक्टर से ₹3250 वसूले जा रहे हैं। लेकिन असली खेल पर्ची में शुरू होता है, जहां प्रति वाहन करीब ₹1000 कम दिखाया जाता है। यानी वास्तविक राशि और दर्ज राशि में अंतर रखकर सरकारी राजस्व को चूना लगाया जा रहा है और बाकी पैसा सीधे घाट संचालकों की जेब में जा रहा है।

इसी बीच एक और चौंकाने वाला खुलासा यह है कि कौशाम्बी और प्रयागराज के मझियारी, सेमरी, भीटी,कटैया समेत कई इलाकों में नदी के बीचों-बीच नावों (बोट) से लगातार अवैध खनन किया जा रहा है। यह खनन दिन-रात बिना रुके जारी है और सैकड़ों नावें एक साथ सक्रिय बताई जा रही हैं। कई बार इन नावों से बालू निकालने के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हो चुके हैं, जिनमें खुलेआम खनन होता दिखाई देता है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की चुप्पी और कार्रवाई का अभाव पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

यह पूरा मामला IPC धारा 420 (धोखाधड़ी) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) धारा 318 के तहत गंभीर अपराध बनता है। इसके अलावा गलत पर्ची बनाना और उसका उपयोग करना IPC धारा 467, 468 और 471 तथा BNS धारा 336, 338, 340 के अंतर्गत जालसाजी और फर्जी दस्तावेज का उपयोग माना जाएगा।
अगर इस खेल में किसी सरकारी अधिकारी की संलिप्तता पाई जाती है, तो यह IPC धारा 409 (सरकारी धन का गबन) और IPC धारा 217, 218 (कर्तव्य में लापरवाही और गलत रिकॉर्ड बनाना) के तहत भी दंडनीय होगा। इसी तरह BNS धारा 316, 317 और 199, 200 के तहत भी कड़ी कार्रवाई संभव है।

सबसे गंभीर पहलू यह है कि इतना बड़ा अवैध खनन बिना मिलीभगत के संभव नहीं माना जा रहा। ऐसे में IPC धारा 120B (आपराधिक साजिश) और BNS धारा 61(2) भी लागू होती है, जो संगठित अपराध की ओर संकेत करती है।
खनन से जुड़े इस अवैध कार्य का पर्यावरण पर भी गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। नदी के बहाव में बदलाव, अत्यधिक उत्खनन और मशीनों का उपयोग Environment Protection Act, 1986 की धारा 15 का उल्लंघन है, जिसमें पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने पर सजा का प्रावधान है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर प्रतिदिन सैकड़ों गाड़ियों से इस तरह वसूली हो रही है, तो सरकार को हर महीने करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। यह न केवल आर्थिक अपराध है, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों की लूट भी है।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। मांग की जा रही है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, अवैध खनन पर तत्काल रोक लगे और पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाए।
बता दे कि कौशाम्बी और प्रयागराज में चल रहा यह बालू खेल सिर्फ एक अवैध कारोबार नहीं, बल्कि कानून, प्रशासन और व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस पर कब तक आंख मूंदे रहता है या फिर कोई बड़ी कार्रवाई इस “खनन सिंडिकेट” की कमर तोड़ती है।

Amarnath jha Kaushambi – 9415254415

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