बांके बिहारी के लिए आईं 30 हजार चिट्ठियां और राखियां:लिखा- कान्हा, बेटे के लिए अच्छी लड़की दिलवाना, जो आपको मानती हो

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बांके बिहारी के लिए आईं 30 हजार चिट्ठियां और राखियां:लिखा- कान्हा, बेटे के लिए अच्छी लड़की दिलवाना, जो आपको मानती हो

“बिहारी जी, मुझे सुहागिन ही अपने चरणों में बुलाना। जब भी मैं यह दुनिया छोड़कर आपके पास आऊं, सुहागिन आऊं। मेरे बच्चों की शादी और उनके बच्चों का मुंह देखकर ही अपने चरणों में बुलाना। प्रभु, उत्तम नगर में जो जगह ली थी, उसे बिकवा दो। बहुत परेशानी हो रही। हौज खास में बढ़िया-सा घर दिलवा देना। अब मानव की शादी का समय है। उसके लिए ऐसी लड़की दिलवाना, जो आपको मानने वाली, परिवार से प्यार करने वाली और हंसमुख हो।” मथुरा में कान्हा के लिए यह भावुक चिट्ठी रजनी सेठी ने भेजी है। रक्षाबंधन से पहले बांके बिहारी के नाम आई यह चिट्ठी सिर्फ एक बानगी है। मंदिर में अब तक 30 हजार से ज्यादा चिट्ठियां और राखियां पहुंच चुकी हैं। बहनों ने राखी के साथ चिट्ठी, अक्षत-कुमकुम, चॉकलेट और दक्षिणा भी भेजी है। इन राखियों को मंदिर के सेवायत भगवान बांके बिहारी की कलाई पर बांधते हैं। साथ आए पत्रों को पढ़कर सुनाते भी हैं। बांके बिहारी को भेजी गई इन चिट्ठियों में बहनों ने अपने मन की बातें और इच्छाएं जाहिर की हैं। दैनिक भास्कर ने इन चिट्ठियों को पढ़ा। इनमें किसी ने परिवार की खुशहाली मांगी, किसी ने नौकरी की कामना की। किसी ने अच्छी शादी, घर और अपनों की सेहत के लिए कान्हा से प्रार्थना की। पहले 3 तस्वीरें देखिए अब कुछ खास चिट्ठियां पढ़िए… पहली चिट्ठी झांसी से… झांसी से एक बहन ने लिखा- जय श्री राधे। श्री कुंज बिहारी, श्री हरिदास। सादर चरण स्पर्श एवं साष्टांग दंडवत। आप कैसे हैं? आशा करते हैं कि आप अच्छी तरह ही होंगे। हर साल की तरह इस बार रक्षाबंधन पर आपको राखी भेज रहे हैं। लिफाफे में टीका भी है। महाराज जी से हम सबकी ओर से टीका करवा लीजिएगा। राखी बंधवा लीजिएगा और खूब सारी मिठाई खा लीजिएगा। आपके आशीर्वाद और कृपा से सब ठीक चल रहा है। आप अपनी कृपादृष्टि हम सब पर ऐसे ही बनाए रखिएगा। वृंदावन में बारिश बहुत हो रही होगी और मौसम भी अच्छा हो गया। लेकिन, आप दोनों अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखिएगा। आप अपनी कृपा से थोड़ी-सी बारिश यहां भी करवा दीजिए। आपकी कृपा से हमारे यहां नए मंदिर का संचालन शुरू हो गया है। बाबा महादेव विराजमान हो गए हैं। इस बार सावन में मिट्टी के शंकरजी भी बनाए गए हैं। आपकी कृपा से सभी कॉलोनीवासियों में हर्ष और उल्लास बना हुआ है। आपके श्रीचरणों में पुनः दंडवत। सभी ब्रजवासियों के श्रीचरणों में, सभी भक्तों के श्रीचरणों में, सभी संतों के श्रीचरणों में एवं यमुना महारानी के श्रीचरणों में कोटि-कोटि प्रणाम। दूसरी चिट्ठी- रजनी सेठी की जब भी आपके चरणों में जाऊं, सुहागिन जाऊं रजनी सेठी ने लिखा- मेरे प्यारे मोहन, राधे-राधे। मैं आपके और किशोरीजी के लिए राखी भेज रही हूं। रक्षाबंधन पर इसे अपनी कलाई पर बांध लेना और किशोरीजी को भी बंधवा देना। मैं आपको क्या दूं, जो सारे जग को चलाने वाले हैं। लेकिन, मांगने के लिए मेरे पास बहुत लंबी लिस्ट है। बिहारीजी, जब भी इस दुनिया से विदा होकर आपके पास आऊं, सुहागिन ही आऊं। मेरे बच्चों की शादी और उनके बच्चों का मुंह देखकर ही अपने चरणों में बुलाना। प्रभु, उत्तम नगर में जो जगह ली थी, उसे बिकवा दो। बहुत परेशानी हो रही है। हौज खास में अच्छा-सा घर दिलवा देना। मानव की शादी के लिए आपको मानने वाली, परिवार से प्यार करने वाली और हंसमुख लड़की दिलवा देना। राघव कॉलेज के लास्ट ईयर में है। उसे काम में सफलता और तरक्की का आशीर्वाद देना। बच्चों और मेरे पति को हमेशा स्वस्थ रखना। मेरे भाई शिव पर भी कृपा करना। वह बुरे समय से गुजर रहा है। उसे काम और बरकत देना, जिससे वह अपने बीवी-बच्चों को पाल सके। जहां-जहां उसके पैसे फंसे हैं, वहां से मिल जाएं और वह तरक्की करे। प्रभु, मुझे भक्ति का ज्ञान देना। पहले पूजा-पाठ कर लेती थी, लेकिन अब मन एकाग्र नहीं होता। मुझे चलते-फिरते ही अपने पास बुलाना, बिस्तर पर बीमार होकर नहीं। मेरे पति के कारोबार में दिन-दोगुनी, रात-चौगुनी तरक्की हो और खूब पैसा कमाएं। उन्हें और मेरे बच्चों को लंबी उम्र और स्वस्थ जीवन देना। अब यह खत यहीं समाप्त करती हूं। मुझसे कोई गलती हुई हो, तो अपनी छोटी बहन समझकर माफ कर देना। राधे-राधे। तीसरी चिट्ठी- पति बीमार, बेटा भटक गया, मेरी लाज आपके हाथ में मिथिलेश ने लिखा- मेरे प्यारे प्रभु, मेरे प्यारे भाई श्री बांके बिहारी जी। मैं आपको राखी भेज रही हूं। बिहारी जी, मुझे नहीं पता कि इस जन्म में आपके दर्शन कर पाऊंगी या नहीं। मैं अपनी पीड़ा किसी से नहीं कह पाती, सिर्फ आपको सुनाती हूं। आप तो चींटी के पैर की पायल की आवाज भी सुन लेते हैं। फिर क्या मेरी पुकार आप तक नहीं पहुंच रही? आपको मेरे पति की हालत पता है। उनकी तबीयत खराब है, कर्ज का बड़ा बोझ है और काम भी नहीं मिल रहा। वर्षों तक संघर्ष किया, लेकिन अब मैं हार रही हूं। मेरी शादी के गहने भी गिरवी पड़े हैं। चारों तरफ से इज्जत नीलाम हो रही है। सबसे बड़ा दुख मोनू दे रहा है। वह लखनऊ से घर नहीं आ रहा। न जाने किस बुरी संगत में पड़ गया है। लोग कहते हैं कि वह नशा करता है। उसे हमारी और हमारी इज्जत की कोई परवाह नहीं। गाली-गलौज, मारपीट और लड़ाई-झगड़े में पड़ गया है। मैंने उसे दवाइयां दिलवाईं, उसके लिए नाम-जप भी किया, लेकिन वह भटक गया। उसके कारण छोटी बेटी श्रद्धा पर भी गलत असर पड़ रहा है। उसके पापा सदमे में चले गए हैं, अब मोनू न घर आ रहा है और न हमसे बात कर रहा है। मैं हर तरीके से हार गई हूं। अब आप ही बताइए कि आपकी बहन कैसे जिंदा रहे? मेरी लाज अब आपके हाथ में है, बिहारी जी। लाज बचा लीजिए, माधव। आपके चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम। चौथी चिट्ठी- रास्ता दिखाइए; अब उम्र भी निकल रही आपकी प्यारी बहन, राधे-राधे। बिहारी जी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम। आशा करती हूं कि आप सकुशल होंगे। आपकी असीम कृपा से हम सब भी सकुशल हैं। आपको और राधारानी को रक्षाबंधन की हार्दिक बधाई। आपके और राधारानी के लिए राखी भेज रही हूं। रक्षाबंधन के दिन अपनी कलाई पर अवश्य बांधिएगा और मुझे वृंदावन अवश्य बुलाइएगा। आपकी कृपा से नौकरी में सब ठीक चल रहा है। एक इच्छा थी कि किसी तरह राज्य प्रशासनिक सेवा में जाने का कोई रास्ता मिल जाता। क्योंकि, अब उम्र भी निकल रही है और पढ़ाई हो नहीं पाती। अब आप ही कोई रास्ता दिखाइए, जो आपको मेरे लिए उचित लगे। मुझे पता है कि आप सदैव मेरा हित ही चाहेंगे। इसलिए जो मेरे हित में हो, वही करिए और सदैव अपनी कृपा और प्यार बनाए रखिएगा। अति शीघ्र वृंदावन बुलाइएगा। आपको और राधारानी को ढेर सारा प्यार। राधे-राधे। अब जानिए ये चिट्ठियां आ कहां से रही हैं? सेवायत श्री नाथ गोस्वामी बताते हैं कि कई ऐसी बहनें हैं, जिनके भाई नहीं हैं। वे भगवान बांके बिहारी को अपना भाई मानकर राखी भेजती हैं। कुछ बहनें राखी डाक या कोरियर से भेज रही हैं। जबकि कई दर्शन के लिए वृंदावन पहुंचकर मंदिर में ही राखी बांध रही हैं। महिलाएं मंदिर की रेलिंग पर बिहारीजी को राखी बांधती हैं। साथ ही उनके लिए प्रसाद भी दूर से दिखाकर अपनी श्रद्धा प्रकट करती हैं। ‘बिहारी जी से हमारा हर रिश्ता’ रेलिंग पर राखी बांध रही श्याम पिया दासी ने बताया- हमारा हर रिश्ता बिहारी जी से है। सभी रिश्ते उनसे हैं। सभी उत्सव उनके साथ हैं। सबसे पहले वह हैं, उसके बाद कोई और। नित्य निकुंज में सभी सहचारियां एक-दूसरे को राखी बांधती हैं। प्रिया प्रियतम को भी सहचारियां राखी बांधती हैं। स्वामीजी कहते हैं कि यहां का हर कोई, यहां की सभी वस्तुएं, लता-पताये सभी सहचारियां हैं। उस भाव से सभी राखी बांधते हैं। बहनों को रिटर्न गिफ्ट देने की मांग सेवायत और इतिहासकार आचार्य प्रहलाद बल्लभ गोस्वामी महाराज ने मंदिर की हाई पावर्ड मैनेजमेंट कमेटी से पुरानी मांग दोहराई है। उन्होंने कहा कि बांके बिहारी को राखी भेजने वाली सभी बहनों को मंदिर प्रबंधन की ओर से रिटर्न गिफ्ट भेजा जाना चाहिए। इसमें आराध्य का आशीर्वाद रूपी कृपा पत्र, संदेश और यथासंभव प्रसाद शामिल हो। इससे बहनों को राखी के सही हाथों तक पहुंचने की जानकारी मिलेगी और उन्हें आराध्य का शुभाशीष भी प्राप्त होगा। ———————— ये खबर भी पढ़ें यूपी से मानसून 10 दिन पहले विदा होगा:अल-नीनो फिर मजबूत हो रहा; जानिए इस बार सर्दियां कैसी होंगी उत्तर प्रदेश में अभी तक जितनी जरूरत थी, उससे 11% कम बारिश हुई है। मौसम वैज्ञानिक अल-नीनो को इसकी वजह बता रहे हैं। 28 जून को यूपी में मानसून की एंट्री के बाद से ही अल-नीनो का असर बना हुआ है। पढ़िए पूरी खबर

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