कौशाम्बी में अवैध प्लाटिंग का ‘सिस्टम’: प्रशासनिक संरक्षण में बिक रही कृषि भूमि, अवैध प्लाटिंग का चल रहा खेल , अधिकारियों की मौन स्वीकृति से फल फूल रहा धंधा
👉 कौशाम्बी में अवैध प्लाटिंग खुलेआम, प्रशासनिक संरक्षण के आरोप। मंझनपुर, भरवारी और ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि धड़ल्ले से प्लॉट में तब्दील।
👉 बिना भूमि उपयोग परिवर्तन, बिना ले-आउट और बिना RERA पंजीकरण बिक रहे प्लॉट। न एफआईआर, न सीलिंग, न बुलडोजर, वर्षों से चल रहा अवैध जमीन कारोबार।
👉 भोले खरीदारों की पूंजी खतरे में, सिस्टम की भूमिका पर बड़े सवाल, अधिकारियों की है मौन सहमति …
समदा में आराजी नंबर 21 सरकारी जमीन पर जगदीश प्रसाद शिवहरे पर कब्जा करने का लग रहा आरोप…
कौशाम्बी। जनपद कौशाम्बी में अवैध प्लाटिंग अब चोरी-छिपे नहीं, बल्कि खुलेआम प्रशासनिक संरक्षण में चल रही है। मंझनपुर नगर पालिका, भरवारी नगर पालिका और आसपास के ग्रामीण इलाकों में कृषि भूमि को धड़ल्ले से प्लॉट में बदला जा रहा है, और हैरानी की बात यह है कि जिम्मेदार अफसर आंखें मूंदे बैठे हैं। यह कोई नई बात नहीं, बल्कि एक संगठित खेल बन चुका है, जिसमें नियम, कानून और RERA जैसे सख्त अधिनियम सिर्फ कागजों तक सिमट कर रह गए हैं।
बिना अनुमति, बिना रजिस्ट्रेशन, बिना डर जिले में दर्जनों कॉलोनियां ऐसी हैं, जहां: न भूमि उपयोग बदला गया है, न ले-आउट प्लान स्वीकृत है ,न ही RERA में कोई पंजीकरण है ।
इसके बावजूद प्लाटरों ने खेतों में सड़कें कटवा दी हैं, बिजली के खंभे खड़े हो गए हैं और प्लॉट “रेडी टू सेल” बताकर बेचे जा रहे हैं। सवाल यह है कि यह सब किसके इशारे पर हो रहा है? RERA कानून को रौंद रहा स्थानीय तंत्र ,रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 साफ कहता है कि बिना पंजीकरण किसी भी प्लाटिंग परियोजना का प्रचार, बिक्री या बुकिंग अपराध है। इसके बावजूद कौशाम्बी में RERA कानून की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
जानकारों का कहना है कि यदि RERA और जिला प्रशासन ईमानदारी से जांच करे, तो कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
प्रशासन की ‘चुप्पी’ नहीं, साफ मिलीभगत…..
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि यह केवल प्रशासन की चुप्पी नहीं, बल्कि सीधी मिलीभगत का मामला है। अवैध प्लाटिंग महीनों नहीं, वर्षों से चल रही है, फिर भी न कोई एफआईआर, न सीलिंग, न बुलडोजर।
जब छोटे दुकानदारों पर तुरंत कार्रवाई हो सकती है, तो फिर करोड़ों के इस अवैध जमीन कारोबार पर कानून क्यों खामोश है?
भोले भाले खरीदार बन रहे शिकार…..
अवैध कॉलोनियों में प्लॉट खरीदने वाले लोग अपने जीवन की जमा-पूंजी दांव पर लगा रहे हैं। न उन्हें वैध रास्ता मिलेगा, न सीवर, न रजिस्ट्री की सुरक्षा। कल को प्रशासन कार्रवाई करता है, तो न प्लाटर मिलेगा, न पैसा वापस। सरकारी जमीनों को ये लोग कब्जा करके बेंच रहे हैं,आज समदा में शिकायत के बाद नायब तहसीलदार,कानूनगो लेखपाल आदि नाप करने पहुंचे लेकिन यह लोग गोलमोल नाप करके अपना जेब भरने की मानसिकता से कम करते हैं। आराजी नम्बर 21 जो 12 विश्वास पर कब्जा हो रहा है। बताया जाता हैं कि 2014 में जगदीश प्रसाद शिवहरे आराजी नंबर 247 पर अवैध कब्जा कर निर्माण किए थे जिस पर 7 लाख 60 हजार का जुर्माना हुआ था ।

प्रशासन से सीधे सवाल – क्या जिला प्रशासन को इन अवैध कॉलोनियों की जानकारी नहीं है? अगर है, तो कार्रवाई क्यों नहीं?
क्या प्रभावशाली प्लाटरों को कानून से ऊपर रखा गया है?
क्या किसी बड़े हादसे या कोर्ट के आदेश के बाद ही प्रशासन जागेगा?
अब कार्रवाई नहीं हुई तो जवाबदेही तय हो ।
जनहित में जरूरी है कि अवैध प्लाटिंग में शामिल प्लाटरों के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो।
यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह मामला सिर्फ अवैध प्लाटिंग का नहीं, बल्कि प्रशासनिक भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण बन जाएगा। कौशाम्बी में कानून कमजोर नहीं है, बल्कि कमजोर है उसे लागू करने वाला सिस्टम।
बता दें कि कौशांबी जनपद के नगर पंचायत नगर पालिका परिषद मंझनपुर के आसपास तथा समदा, सिराथू रोड तथा भरवारी रोड, ओसा , कादीपुर तथा बैरिहा , मूरतगंज ,रोही , धन्नी साकाड़ा, इमामगंज , भीटी, तिलहापुर मोड़ , सराय अकिल, इंचौली, नियामतपुर आदि क्षेत्रों में खुलेआम अवैध प्लाटिंग का धंधा चल रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में और नगरीय निकाय क्षेत्रों भी यही हाल है । कृषि भूमि पर भू माफियाओं द्वारा प्लाटिंग की जा रही है और अधिकारियों को हिस्सेदारी मिल रही है । समदा में सरकारी जमीनों को भी प्लाटिंग कर दिया गया है और यह सिलसिला चलता जा रहा है।
अमरनाथ झा पत्रकार -9415254415
