कौशांबी नगर पालिकाओं में मैनपावर ठेकों में पारदर्शिता पर उठे सवाल ,सैकड़ों कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया और भुगतान पर संशय
👉 भरवारी में अर्चना एसोसिएट, तो मंझनपुर में अन्य फर्म को मिला है सैकड़ों मैनपावर का ठेका…
👉 नगर निकाय अधिनियम की धाराओं 127(1)(ख) और 131 का उल्लंघन …
👉 टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता पर उठ रहे गंभीर प्रश्न ,प्रशासन जांच करेगा या मामला फाइलों में ही सीमित रहेगा?
रिपोर्ट – अमरनाथ झा
कौशांबी। जिले के नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों में ठेकेदारों द्वारा ली गई मैनपावर सेवाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और पारदर्शिता की कमी उजागर हो रही है। जानकारी के अनुसार, भरवारी नगर पालिका परिषद में अर्चना एसोसिएट नामक संस्था को मैनपावर सप्लाई का ठेका मिला है, जबकि मंझनपुर नगर पालिका परिषद में किसी अन्य एजेंसी को यह कार्य सौंपा गया है। दोनों पालिकाओं में सैकड़ों कर्मचारियों के माध्यम से सफाई, जल आपूर्ति, इलेक्ट्रिकल और प्रशासनिक कार्यों का संचालन बताया जा रहा है, परंतु इनकी वास्तविक संख्या, भुगतान व्यवस्था और चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
भरवारी नगर पालिका में लगभग 450 मैनपावर और मंझनपुर में 300 से अधिक कर्मियों के कार्यरत होने का दावा किया जा रहा है। इनमें सफाईकर्मी, पंप ऑपरेटर, कंप्यूटर ऑपरेटर, चालक, राजमिस्त्री आदि कई श्रेणियों के पद शामिल बताए जा रहे हैं। सवाल यह है कि इन कर्मियों की नियुक्ति किस प्रक्रिया से हुई? क्या सभी का पंजीकरण, उपस्थिति और भुगतान रिकॉर्ड नगर पालिका के पास उपलब्ध है, या यह सब ठेकेदारों के माध्यम से कागजों में दिखाया जा रहा है?
नगर निकाय अधिनियम 1916 की धारा 127(1)(ख) और धारा 131 के तहत किसी भी निकाय में ठेके के माध्यम से कार्य लेने से पहले पारदर्शी निविदा प्रक्रिया (tender process) अनिवार्य है। साथ ही, प्रत्येक अनुबंध का विवरण सार्वजनिक सूचना पट पर प्रदर्शित किया जाना चाहिए। नियमों के अनुसार, ठेकेदार को मासिक भुगतान केवल कार्य सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर ही किया जा सकता है। लेकिन कौशांबी में कई पालिकाओं में न तो पूर्ण सत्यापन होता है और न ही नियमित ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत की जाती है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कुछ नगर पालिकाओं में मैनपावर चयन प्रक्रिया पूरी तरह ठेकेदार के विवेक पर छोड़ दी गई है। कहीं ऑनलाइन आवेदन कराए गए तो कहीं बिना किसी विज्ञापन या इंटरव्यू के लोगों को नियुक्त कर लिया गया। इससे रोजगार वितरण में भेदभाव और फर्जी नियुक्तियों की आशंका बढ़ी है।
इन मामलों में यह भी जांच का विषय है कि आखिर टेंडर प्रक्रिया कैसे पूरी हुई, कितने बिडर (बोलीदाता) थे और चयन के मानक क्या अपनाए गए। कई नागरिक संगठनों ने आरोप लगाया है कि नगर पालिकाओं में ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत से मैनपावर के नाम पर धन का दुरुपयोग किया जा रहा है।
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन या स्थानीय निकाय निदेशालय इस पूरे प्रकरण की पारदर्शी जांच कराते हैं या यह मामला अन्य कई मामलों की तरह केवल फाइलों तक सीमित रह जाएगा।
— अमरनाथ झा, पत्रकार, कौशांबी (9415254415)
