कौशांबी में करोड़ों की शत्रु संपत्ति घोटाला: विक्रेताओं पर तो हुई कार्रवाई, खरीदारों पर चुप्पी क्यों, उठे सवाल

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👉 कौशांबी में करोड़ों की शत्रु संपत्ति घोटाला…

👉 मंझनपुर तहसील क्षेत्र में शत्रु संपत्तियों पर फर्जी तरीके से हुए सौदे, प्रशासन ने कई विक्रेताओं पर की कार्रवाई, दर्जनों रजिस्ट्री की गई रद्द।

👉 भू-माफियाओं ने बनाई फर्जी वसीयत, दाखिल खारिज के बाद किया कब्जा।खरीदारों से जुड़े रसूखदारों पर प्रशासनिक चुप्पी से उठे सवाल।

👉 राजस्व विभाग, तहसील कर्मियों और रजिस्ट्री कार्यालय की भूमिका संदिग्ध,जांच की मांग तेज, पीड़ितों और जागरूक नागरिकों ने की निष्पक्ष जांच की अपील।

कौशांबी, उत्तर प्रदेश। मंझनपुर तहसील के पाता गांव में शत्रु संपत्ति से जुड़ा एक बहुचर्चित भूमि घोटाला सामने आया है, जिसमें करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी ज़मीन को फर्जी अभिलेखों के आधार पर निजी व्यक्तियों के नाम रजिस्ट्री कर बेच दिया गया। तहसील प्रशासन द्वारा फर्जीवाड़ा करने वाले चार आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया है, किंतु इस मामले में ज़मीन खरीदने वाले 28 व्यक्तियों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मामले का संक्षिप्त विवरण

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शत्रु संपत्ति गाटा संख्या 1914 (1 बीघा 12 विस्वा) और 1914/1 (10 बिस्वा), जो पाकिस्तान निवासी आगा अली हैदर व रज़ी हैदर पुत्र जुल्फकार हसन के नाम दर्ज है, सरकारी नियंत्रण में थी और इसका अभिरक्षक सदर तहसील का नायब तहसीलदार है।

पिछले वर्ष (2024) कुछ भू-माफियाओं ने राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी कर अपने नाम फर्जी रूप से दर्ज करा लिए, और बाद में इन जमीनों को 28 अलग-अलग लोगों के नाम बैनामा कर दिया। जब इस पूरे प्रकरण की शिकायत हुई तो तहसील प्रशासन में हड़कंप मच गया।

कार्रवाई का दायरा सीमित क्यों?

जांच के बाद सखावत उल्ला उर्फ जोखू, मोहम्मद रिज़वी उर्फ भोले तथा मोहम्मद हारून के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया। परंतु इस करोड़ों रुपये की जमीन खरीदने वाले 28 लोगों पर अब तक कोई मुकदमा नहीं दर्ज किया गया है, जबकि उन्होंने भी प्रत्यक्ष रूप से शत्रु संपत्ति की अवैध खरीद की है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

इस विषय में जब संवाददाता ने तहसीलदार सिद्धार्थ सिंह से बातचीत की, तो उन्होंने बताया:

> “मामला संज्ञान में है। पूरे प्रकरण की गहन जांच के लिए टीम गठित की जाएगी। यदि कोई भी व्यक्ति, विक्रेता या खरीदार, दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।”

 

प्रशासन की चुप्पी या साठगांठ?

सूत्रों की मानें तो शत्रु संपत्तियों पर हो रहे अवैध कब्जों में प्रशासनिक मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता। वर्तमान में भी कई शत्रु संपत्तियों पर निर्माण कार्य जारी है और प्रशासन निष्क्रिय बना हुआ है, जिससे सरकारी राजस्व को भारी क्षति हो रही है।

जनाक्रोश और मांग

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस प्रकरण की सीबीआई या न्यायिक जांच की मांग की है। साथ ही यह भी मांग उठी है कि खरीदारों पर भी उचित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में कोई भू-माफिया इस प्रकार की सरकारी जमीनों को हड़पने का दुस्साहस न कर सके।

 

अमरनाथ झा पत्रकार – 8318977396

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