स्थानांतरण सत्र समाप्त, फिर भी व्यावसायिक शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार का सिलसिला जारी , शासन ने 40 अधिकारियों की सूची भेजी, नियमों को दरकिनार कर हो रही साजिश

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👉 व्यावसायिक शिक्षा विभाग में स्थानांतरण सत्र समाप्ति के बाद भी भ्रष्टाचार जारी। शासन ने 27 जून को 40 अधिकारियों/कर्मचारियों की संदिग्ध सूची भेजी निदेशक को।

👉 सूची में शालिनी राय, मनोज पांडेय, विवेक कुमार, दीपिका शर्मा समेत कई नाम शामिल। सूची तैयार कराने में दलाल डी.के. सिंह, मानपाल सिंह, राजेंद्र प्रसाद की भूमिका उजागर।

👉 मुख्यमंत्री योगी के आदेशों के बावजूद स्थानांतरण में नियमों की खुली अनदेखी। सीएम कार्यालय की चुप्पी पर उठे सवाल, कार्रवाई की मांग तेज।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा विभाग में स्थानांतरण सत्र (14–15 जून 2025) की समाप्ति के बावजूद भ्रष्टाचार और नियमों की अवहेलना थमने का नाम नहीं ले रही है। 27 जून 2025 को शासन स्तर से लगभग 40 अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची निदेशक अभिषेक सिंह को भेजी गई, जिससे विभागीय हलकों में हड़कंप मच गया है।

इस सूची को विभागीय मंत्री के संरक्षण में तैयार कराने का आरोप विभाग के चर्चित दलाल डी.के. सिंह, मानपाल सिंह और राजेंद्र प्रसाद पर लग रहा है, जो लंबे समय से ट्रांसफर-पोस्टिंग माफिया के रूप में सक्रिय बताए जाते हैं। सूची इतनी जल्दबाज़ी में भेजी गई कि उसमें किसी कर्मचारी का पदनाम तक अंकित नहीं किया गया, जो गंभीर अनियमितता और साजिश की ओर इशारा करता है।

जबकि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं स्थानांतरण प्रक्रिया को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने का ऐलान कर चुके हैं और इसी क्रम में 1000 से अधिक स्थानांतरण आदेशों को निरस्त भी किया गया है। इसके बावजूद विभागीय मंत्री और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से सत्र समाप्ति के बाद भी स्थानांतरण की साजिश जारी है।

शासन द्वारा जिन अधिकारियों/कर्मचारियों के नामों पर 27 जून को आख्या मांगी गई है, उनमें निम्न शामिल हैं:

शालिनी राय, मनोज पांडेय, विवेक कुमार, अंकित कुमार, दुर्गेश विधेय, अभिषेक रंजन, वंदना शर्मा, निर्मला रानी, दीपिका शर्मा, दीपक कुमार, मृत्युंजय कुमार, अंशु गुप्ता, हरिशंकर सिंह, अरवीना रानी, देवेंद्र कुमार, विवेक लावनिया, श्रद्धा सुमन, ख्याति सिंह, मनीष पांडेय, नीतू चक्रवर्ती, सोनू पुण्डीर, मुकेश कुमार, मधुलिका गुप्ता, महेश कुमार, नीतू जयसवाल, विभा शर्मा, विजय कुमार, प्रदीप कुमार यादव, संजय सैनी, सौरभ भार्गव, अम्बुज कुमार, सुनील प्रजापति, शिव शंकर चौधरी, पूनम देवी, विपिन बिहारी कौशल, मनीष कुमार गोस्वामी, संगीता, आनंद कुमार, सुमन सरोज प्रजापति

इन सभी नामों पर स्थानांतरण सत्र समाप्ति के बाद सूची भेजना यह स्पष्ट करता है कि विभागीय मंत्री और भ्रष्ट तंत्र अब भी मनमानी पोस्टिंग कराने की योजना में जुटे हैं।

अब बड़ा सवाल यह है कि मुख्यमंत्री कार्यालय इस भ्रष्टाचार पर कड़ा संज्ञान लेकर कार्रवाई करेगा या नहीं। यदि यह सूची आगे बढ़ती है और स्थानांतरण होते हैं, तो यह संदेश जाएगा कि प्रदेश में नियमों और प्रक्रिया की सिर्फ औपचारिकता भर रह गई है, और राजनीतिक और विभागीय दबाव के सामने प्रशासनिक ईमानदारी कमजोर पड़ रही है।

यह प्रकरण अब योगी सरकार की साख, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार विरोधी नीति की परीक्षा बन गया है।

अमरनाथ झा पत्रकार – 8318977396

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