प्रयागराज नगर निगम में 1.44 करोड़ का टैक्स घोटाले के बाद अब जीआईएस सर्वे में भी गड़बड़ी, दो आउटसोर्सिंग कर्मियों पर दर्ज मुकदमें में हो रही लीपापोती,GIS सर्वे की जांच की उठी मांग,इसमें भी खुलेगा घोटाला
👉 प्रयागराज नगर निगम में 1.44 करोड़ रुपये का टैक्स गबन, आउटसोर्सिंग ऑपरेटर आकाश और सत्यम शुक्ला पर गंभीर आरोप..
👉 475 फर्जी रसीदों से सरकारी खजाने को बड़ा नुकसान
👉 CTO पीके द्विवेदी ने 30 अप्रैल को दर्ज कराया मुकदमा
👉 मामला फिलहाल ठंडे बस्ते में, कोई कार्रवाई नहीं, कैसे होगी गबन हुई धनराशि की रिकवरी,चर्चा का है विषय…
👉 अब GIS सर्वे में भी भारी अनियमितता, नियो जिओ कंपनी कर्मी जानकारी मांगने पर किया टालमटोल
👉 2019 से ही कराया गया है नगर निगम का GIS सर्वे,2022 में डाटा भी सौंपने की कही जा रही बात, कौन सही बोल रहा कौन झूठ जांच में होगा खुलासा
प्रयागराज। नगर निगम प्रयागराज के जोन-3 और जोन-7 में कार्यरत दो आउटसोर्सिंग कंप्यूटर ऑपरेटरों – आकाश श्रीवास्तव और सत्यम शुक्ला – पर 1 करोड़ 44 लाख 14 हजार रुपये से अधिक के टैक्स गमन का आरोप लगा है। दोनों के खिलाफ कर्नलगंज थाने में एफआईआर दर्ज की गई है।
जांच में सामने आया कि आकाश श्रीवास्तव, जो जोन-3 में कार्यरत था और जयंतीपुर निवासी है, ने अपनी आईडी से 88 रसीदें काटी, जिनमें 18,06,866 रुपये की राशि सरकारी कोष में जमा नहीं की गई। वहीं सत्यम शुक्ला, जो अल्लापुर निवासी है और जोन-7 (कटरा क्षेत्र) में कार्यरत था, ने 387 रसीदें काटकर 1,26,05,368 रुपये की राशि को नगर निगम के खाते में जमा नहीं किया।

घोटाले का खुलासा ऐसे हुआ
यह वित्तीय अनियमितता तब उजागर हुई जब एक नागरिक ने टैक्स भुगतान के बावजूद इसकी रसीद की वैधता जांचने पर पता चला कि राशि निगम खाते में जमा ही नहीं की गई थी। इसके बाद तत्कालीन मुख्य कर निर्धारण अधिकारी (CTO) पी.के. द्विवेदी ने 30 अप्रैल 2025 को कर्नलगंज थाने में तहरीर देकर दोनों कर्मचारियों के खिलाफ धारा 314, 316(4), 318(4), 319(2) के तहत मामला दर्ज कराया। अपराध संख्या 152/2025 के तहत केस पंजीकृत हुआ है।

जांच अधर में, कार्रवाई ठप
मामले की विवेचना फिलहाल चौकी प्रभारी कटरा कर रहे हैं, लेकिन अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। शिकायत के महीनों बाद भी फाइलें धूल फांक रही हैं। इस बीच, पी.के. द्विवेदी का ट्रांसफर हो चुका है और नए CTO पी.के. मिश्रा ने कार्यभार संभाल लिया है। यह सारा घोटाला तत्कालीन सीटीओ पी0के द्विवेदी के समय हुआ है जिसकी अभी जांच चल रही है । बताया तो यह जाता है कि अधिकारियों ने ही अपनानी से आउट सोर्सिंग पर लोगों को रखकर यह कार्ड कराया है जिससे तमाम प्रकार के भ्रष्टाचार पैदा हो गया है।

👉 GIS सर्वे पर भी उठे सवाल
टैक्स घोटाले के बीच GIS आधारित भवन कर सर्वेक्षण पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। Gis सर्वे का ठेका यूपी सरकार से जिस कंपनी – को मिला था उसका नाम निओ जिओ इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड है , उसके प्रोजेक्ट लीडर आदर्श शर्मा मीडिया के सवालों से बचते नजर आए। सूत्रों के अनुसार, सर्वे कागजों पर हुआ, जियो टैगिंग मैन्युअल की गई, और अभी तक इसका कोई फाइनल प्रकाशन नहीं किया गया है लेकिन वहीं कंपनी के लोगों का कहना है कि हर जोन में कैंप लगाकर प्रकाशन कराया गया है। सर्वे का डाटा नगर निगम को सौंप दिया गया है अब यह जानकारी देना नगर निगम का काम है ।
बता दें कि लोगों को जो टैक्स बिल भेजे जा रहे हैं, उनमें गंभीर विसंगतियां हैं — कहीं जमीन किसी के नाम है, मकान कोई और बना रहा है, और टैक्स किसी तीसरे के नाम पर आ रहा है।
सवाल जस का तस
नगर निगम में टैक्स संग्रह की यह अनियमितता तब हुई जब टैक्स वसूली का जिम्मा पूरी तरह से आउटसोर्सिंग कर्मियों को सौंपा गया था, और उनकी निगरानी भी ठीक से नहीं हुई। अब यह देखना होगा कि क्या नगर निगम इस भ्रष्टाचार पर लगाम लगाएगा या यह सिलसिला इसी तरह जारी रहेगा।
