प्रयागराज नगर निगम में GIS आधारित भवन कर सर्वे में भ्रष्टाचार, अनियमितताओं पर नगर निगम की कार्रवाई धीमी,कई करोड़ का हुआ है घोटाला

0
Kaushambi voice

प्रयागराज नगर निगम में करोड़ों का घोटाला, कार्रवाई की रफ्तार धीमी

🔹 नहीं कराया गया GIS आधारित भवन कर सर्वे , निकला बड़ा घोटाला

🔹 दो ऑपरेटरों व एक कर समाहर्ता ने ₹1.44 करोड़ का किया गबन

🔹 भवन स्वामियों से नकद वसूली कर निगम खाते में नहीं की जमा

🔹 विशेष ऑडिट रिपोर्ट में फर्जीवाड़े का हुआ खुलासा

🔹 FIR दर्ज, कर समाहर्ता निलंबित, अन्य की जांच जारी

🔹 अब केवल डिजिटल माध्यम से ही टैक्स भुगतान की व्यवस्था

🔹 तीन स्तरीय निगरानी तंत्र लागू, आउटसोर्स को कैश पर रोक

🔹 नगर निगम पारदर्शी कर प्रणाली व भ्रष्टाचार-मुक्त व्यवस्था के दावे पर कायम

रोक

🔹आखिर जिस कंपनी से कराया गया GIS सर्वे, किस रेट पर कराया, कितने भवनों का हुआ सर्वे, कब सौंपी रिपोर्ट ,इस सर्वे का वेरिफिकेशन कब और कौन किया ,GIS के नाम पर हुआ भ्रष्टाचार 

प्रयागराज, 12 जुलाई 2025 । प्रयागराज नगर निगम ने वित्तीय वर्ष 2022–23 से भवन कर निर्धारण प्रणाली में पारदर्शिता लाने तथा वास्तविक आंकड़ों पर कर निर्धारण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से GIS आधारित सर्वेक्षण की शुरुआत की थी। इस प्रक्रिया में सभी भवनों का भू-स्थानिक (जिओ-स्पेशल) डाटा एकत्र कर टैक्स असेसमेंट को अद्यतन किया जाना था ।

नियमों के अनुसार, GIS सर्वे के बाद भवन स्वामियों को स्व‑आकलन फॉर्म भरने की व्यवस्था की गई, ताकि वे अपने भवन के क्षेत्र, उपयोग और अन्य विवरण सत्यापित कर सकें। इसके साथ ही, एक नियमानुसार 10% भवनों का सैंपल आधार पर फिजिकल वेरिफिकेशन भी करवाया जाता है, जिसका उद्देश्य गलत या फर्जी जानकारी को रोकना था।

हालांकि, जांच में सामने आया कि स्व‑आकलन और फिजिकल सर्वे के आंकड़ों में भारी अंतर पाया गया। विशेष ऑडिट के अनुसार, निगम के दो आउटसोर्स कंप्यूटर ऑपरेटरों तथा एक कर समाहर्ता की मिलीभगत से लगभग ₹1.44 करोड़ की कर वसूली का गबन किया गया। यह राशि भवन स्वामियों से नगद लेकर निगम के खाते में जमा नहीं कराई गई।

नगर निगम प्रशासन ने इस गंभीर मामले को तुरंत संज्ञान में लिया और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की। दो ऑपरेटरों के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई, एक कर समाहर्ता को निलंबित किया गया तथा अन्य संदिग्धों की जांच जारी है। साथ ही, दोषियों से गबन की गई राशि की वसूली की कानूनी प्रक्रिया भी प्रारंभ की गई है, ताकि नगर निगम को आर्थिक क्षति से बचाया जा सके।

नगर निगम ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:

अब भवन कर का भुगतान केवल निगम के अधिकृत काउंटरों, ऑनलाइन पोर्टल, UPI, डेबिट/क्रेडिट कार्ड या अन्य डिजिटल माध्यम से ही स्वीकार किया जाएगा।

आउटसोर्स कर्मचारियों को नगद भुगतान लेने की अनुमति पूरी तरह समाप्त कर दी गई है।

नागरिकों को भुगतान की अधिकृत रसीद लेने के प्रति जागरूक किया जा रहा है, ताकि कोई भी फर्जीवाड़ा न हो सके।

भवन कर निर्धारण और संग्रह की प्रक्रिया में तीन स्तरीय निगरानी तंत्र लागू किया गया है।

हालांकि नगर निगम प्रयागराज नागरिकों को यह भरोसा दिलाता है कि टैक्स प्रणाली को पारदर्शी, आधुनिक और जवाबदेह बनाने के लिए हर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। GIS आधारित टैक्स असेसमेंट का मूल उद्देश्य शहर के संसाधनों को न्यायसंगत तरीके से कर के माध्यम से प्राप्त कर विकास कार्यों के लिए उपयोग करना है लेकिन सूत्रों की माने तो gis सर्वे कराया ही नहीं गया है। नगर निगम के अधिकारोलियों ने अपने कुछ ऑउट सोर्सिंग वाले लड़के और अन्य लोगों से मनमानी तरह से सर्वे कराया गया है जिससे यह घोटाला हुआ है।

नगर निगम अक्सर अपील करता है कि सभी भवन स्वामी टैक्स का भुगतान केवल अधिकृत माध्यमों से करें, किसी अनधिकृत व्यक्ति को नगद भुगतान न करें और निगम द्वारा जारी आधिकारिक रसीद अवश्य लें।

नगर निगम का लक्ष्य नागरिकों के विश्वास को बनाए रखते हुए भ्रष्टाचार मुक्त, डिजिटल और पारदर्शी कर व्यवस्था स्थापित करना है, जिससे प्रयागराज का सुनियोजित विकास हो सके। लेकिन जिस तरह से करोड़ों का घोटाला हुआ है टैक्स में और जिस तरह से gis सर्वे को नजर अंदाज किया गया है उससे लगता है कि यह मामला फाइलों में ही दब कर रह जायेगा। इस मामले में कोई भी अधिकारी बोलने से कतराते रहते हैं ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

मुख्य ख़बरें