4 माह बाद भी 19 टेंडरों का बॉन्ड लंबित, 10% कमीशन के आरोप से जिला पंचायत में मचा हड़कंप
कौशांबी। जिला पंचायत कौशांबी में अप्रैल माह में संपन्न हुई विकास कार्यों की टेंडर प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि लगभग चार महीने बीत जाने के बावजूद 70 में से 19 सफल निविदाकारों का अनुबंध (बॉन्ड) अब तक तैयार नहीं किया गया है, जिससे संबंधित विकास कार्य शुरू नहीं हो सके हैं।
जानकारी के अनुसार, अप्रैल में करीब 70 विकास कार्यों के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी की गई थी। इनमें से 51 ठेकेदारों के बॉन्ड तैयार कर दिए गए, जबकि 19 ठेकेदारों का बॉन्ड अब तक लंबित बताया जा रहा है। इसे लेकर ठेकेदारों और संबंधित लोगों में नाराजगी व्याप्त है।
सूत्रों का दावा है कि बॉन्ड जारी करने के नाम पर 10 प्रतिशत कमीशन मांगे जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। आरोप यह भी है कि जिन ठेकेदारों ने कथित रूप से कमीशन नहीं दिया, उनके बॉन्ड जानबूझकर रोक दिए गए। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
वहीं हाल ही में हुए 43 नए विकास कार्यों के टेंडरों में भी 9 टेंडरों को कथित रूप से “मैनेज” किए जाने की चर्चा है। इन चर्चाओं ने जिला पंचायत की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले को लेकर जिला पंचायत अध्यक्ष और अपर मुख्य अधिकारी की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में है। लोगों का कहना है कि यदि टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, तो चार महीने बाद भी सभी सफल निविदाकारों के बॉन्ड क्यों नहीं बनाए गए। यदि किसी प्रकार की तकनीकी, प्रशासनिक या कानूनी बाधा थी, तो उसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई।
यदि लगाए जा रहे आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो यह मामला विकास कार्यों में अनावश्यक देरी, पारदर्शिता की कमी और संभावित भ्रष्टाचार से जुड़ा गंभीर विषय बन सकता है। स्थानीय लोगों और ठेकेदारों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करने तथा दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
(नोट: इस समाचार में उल्लिखित कमीशन और टेंडर प्रबंधन संबंधी आरोप संबंधित सूत्रों एवं शिकायतों पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)
रिपोर्ट: अमरनाथ झा, पत्रकार
