‘मगरमच्छ भतीजे को निगल गया, मैं बेबस खड़ा देखता रहा’:बहराइच में चाचा बोले- लोथड़े बटोरकर लाया; बहनें खून से सने चादर से लिपटकर रोईं

0
'मगरमच्छ भतीजे को निगल गया, मैं बेबस खड़ा देखता रहा':बहराइच में चाचा बोले- लोथड़े बटोरकर लाया; बहनें खून से सने चादर से लिपटकर रोईं

बहराइच में 12 साल के बच्चे को मगरमच्छ खा गया। जब मगरमच्छ ने उसे अपने जबड़े में दबाया तो उसके चाचा वहां मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया- मगरमच्छ बच्चे को घाघरा नदी में अंदर लेकर चला गया। लोग ईंट-पत्थर मारते रहे। 3 घंटे बाद जब बच्चे का शव नदी में उतराया तो गांव के इंस्पेक्टर सिंह जाल लेकर गए और शव को बाहर लाए। शुक्रवार को दैनिक भास्कर की टीम बच्चे के गांव टिकुरी पहुंची। उसका शव अंतिम संस्कार हो चुका था। जिस चादर में उसे नदी से लपेटकर लाया गया था। उसके चारों ओर उसकी बहनें फूट-फूटकर रो रहीं थीं। एक बहन चादर को सहलाए जा रही थी। दूसरी बहन अपना सिर चादर पर पटक रही थी। गहराई में 3 घंटे तक बच्चे को लेकर बैठा रहा मगरमच्छ
गांव पहुंचकर हमने परिजनों, ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों से बात की। चाचा उदय राज सिंह ने कहा- ‘मैं सुनील से महज 4 मीटर की दूरी पर था। मगरमच्छ ने उसे जबड़े में पकड़ रखा था। मेरा भाई (विजय राज सिंह) धान लेकर जा रहा था। उसने जब देखा तो तुरंत पानी में कूद गया। बच्चे को पकड़कर खींचना चाहा, लेकिन मगरमच्छ उसे खींचने लगा। अंत में तेजी से खींचकर वह बच्चे को अंदर ले गया।’ ग्रामीण अरविंद श्रीवास्तव ने कहा- मगरमच्छ उसे (बच्चे) लेकर चला गया। करीब 3 घंटे तक पानी के अंदर ही लेकर बैठा रहा। लोग ईंट-पत्थर मारते रहें, लेकिन बाहर नहीं निकला। करीब 7:30 बजे वह पानी से बाहर आया। बच्चे को जबड़े में पकड़कर पटकने लगा। ग्रामीण ने मगरमच्छ के पीठ पर मारकर बच्चे को निकाला
ग्रामीणों के अनुसार, तब तक पुलिस, वन विभाग और NDRF की टीम आ गई थी। बच्चे के चाचा विजय राज सिंह ने बताया कि सुनील मुझसे लगभग 10-15 हाथ की दूरी पर था। जब मगरमच्छ ने उसे पकड़ा, मैं पानी में कूदा, लेकिन गहराई बहुत थी। मैंने उसे ढूंढ़ा, लेकिन मैं उसे बचा नहीं पाया। अब सिलसिलेवार पूरी घटना पढ़िए… ग्रामीण नदी में सुनील को तलाशते रहे
ग्रामीणों ने बड़े-बड़े बांस के डंडों की मदद से नदी में तलाशी अभियान शुरू किया। इस वक्त घाघरा नदी का बहाव काफी तेज है, इसलिए घटनास्थल से करीब 500 मीटर तक नदी में खोजबीन की गई। दो घंटे तक लगातार तलाश करने के बाद अंधेरा हो गया, लेकिन ग्रामीणों ने खोजबीन नहीं रोकी। वे टॉर्च की रोशनी में बच्चे की तलाश करते रहे। ग्रामीणों ने शव को बाहर निकाला और इसकी सूचना पुलिस को दी। मगरमच्छ के हमले से शव क्षत-विक्षत हो चुका था। शुक्रवार सुबह पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

मुख्य ख़बरें