फीस पूरी, सुविधाएं अधूरी! बीसीए कॉलेजों पर फूटा छात्रों का गुस्सा, आरटीआई में मांगा हिसाब-किताब
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👉 बीसीए कॉलेजों की खुली पोल! आरटीआई में मांगी लैब, शिक्षक और मान्यता की पूरी सच्चाई..
👉 फीस लाखों में, सुविधाएं शून्य? कॉलेजों पर उठे बड़े सवाल, विश्वविद्यालय से मांगा जवाब..
👉 कागजों पर चल रहे कॉलेज? आरटीआई ने शिक्षा कारोबार की खोली परतें..
👉 मान्यता से लेकर निरीक्षण तक सब कटघरे में, बीसीए कॉलेजों पर छात्रों का फूटा गुस्सा..
प्रयागराज। प्रोo राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया) विश्वविद्यालय प्रयागराज उत्तर प्रदेश से संबद्ध बीसीए सहित आदि पाठ्यक्रम कॉलेजों की कार्यप्रणाली अब सवालों के घेरे में आ गई है। छात्रों से लाखों रुपये फीस वसूलने वाले कॉलेजों की मान्यता, लैब, शिक्षक और सुविधाओं की सच्चाई जानने के लिए दायर आरटीआई ने शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलनी शुरू कर दी है।
कौशांबी निवासी अमरनाथ झा द्वारा दाखिल आरटीआई में सीधे-सीधे पूछा गया है कि आखिर जिन कॉलेजों में न पर्याप्त कंप्यूटर लैब है, न नियमित शिक्षक, न लाइब्रेरी और न ही मूलभूत सुविधाएं — उन्हें विश्वविद्यालय ने मान्यता कैसे दे दी?
आरटीआई में वर्ष 2023-24 से 2025-26 तक की निरीक्षण रिपोर्ट, संबद्धता आदेश, बीसीए विभाग के शिक्षकों की सूची, कंप्यूटर लैब इन्वेंटरी, लाइब्रेरी रिकॉर्ड और फीस संरचना तक की जानकारी मांगी गई है। आवेदन में यह भी सवाल उठाया गया है कि क्या कॉलेज केवल कागजों पर चल रहे हैं और छात्रों से मोटी फीस वसूली जा रही है?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कॉलेजों में पर्याप्त संसाधन नहीं हैं तो छात्रों का भविष्य किसके भरोसे छोड़ा गया है? क्या विश्वविद्यालय केवल फीस और संबद्धता देने तक सीमित है? क्या निरीक्षण केवल फाइलों में हो रहे हैं?
आरटीआई में एंटी रैगिंग कमेटी, ICC, SC/ST सेल और शिकायत निवारण समिति जैसी अनिवार्य व्यवस्थाओं का रिकॉर्ड भी मांगा गया है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि कई संस्थानों में नियमों की खुलेआम अनदेखी हो सकती है।
शिक्षा के नाम पर कारोबार करने वाले संस्थानों पर अब कार्रवाई की मांग तेज हो रही है। यदि आरटीआई में मांगी गई सूचनाएं सार्वजनिक होती हैं तो कई कॉलेजों की मान्यता और संचालन पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि “फीस तो इंजीनियरिंग कॉलेज जैसी ली जा रही है, लेकिन सुविधाएं प्राथमिक स्तर की भी नहीं हैं।”
अब निगाहें विश्वविद्यालय प्रशासन पर हैं कि वह पारदर्शिता दिखाता है या फिर सवालों को फाइलों में दबाने की कोशिश करता है।
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