कौशाम्बी में धान खरीद में बिचौलियों के सिंडीकेट पर लगाम लगाने की चुनौती, डीएम के मीटिंग में शामिल रहे सिंडीकेट बिचौलिए
👉 44 क्रय केंद्रों को ऑनलाइन फीड करने के निर्देश, केंद्रों पर नोडल अधिकारियों की होगी तैनाती..
👉 पिछली खरीद में करोड़ों की अनियमितताओं के आरोप, 1.39 करोड़ के मामले में जांच के बावजूद रिकवरी पर सवाल..
👉 पिछली बार यूपीसीयू के केंद्रों पर फर्जी खरीद के आरोप, भैला मकदूमपुर में 30 किसानों से 4 हजार कुंतल से अधिक खरीद का दावा..
👉 जमीन कम और धान बिक्री हुई हजारों कुंटल,आखिर कैसे हुई इतनी कम जमीन में पैदावार, खतौनी सत्यापन करने वाले अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल,नहीं हुई जांच…
कौशांबी। धान खरीद को पारदर्शी और बिचौलियामुक्त बनाने के लिए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। उदयन सभागार में आयोजित बैठक में अधिकारियों को जिले के सभी 44 धान क्रय केंद्रों को तत्काल ऑनलाइन फीड करने और केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए। जिला खाद्य विपणन अधिकारी को प्रत्येक क्रय केंद्र पर नोडल अधिकारी तैनात करने तथा खरीद से पहले सभी तैयारियां पूरी कराने को कहा गया।
बैठक में जिलाधिकारी ने क्रय एजेंसी प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि कोई भी क्रय केंद्र बंद नहीं रहना चाहिए। केंद्रों पर दलालों की सक्रियता और किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। क्रय केंद्रों पर पर्याप्त स्टाफ, ई-पॉप डिवाइस, इलेक्ट्रॉनिक कांटे, डस्टर, नमी मापक यंत्र और एनालिसिस किट सक्रिय अवस्था में रखने के साथ सभी आवश्यक अभिलेख उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। किसानों के पंजीकरण और सत्यापन की तहसील स्तर पर नियमित निगरानी करने को भी कहा गया, ताकि किसानों को खरीद में परेशानी न हो।
लेकिन प्रशासन के इन दावों के बीच बिचौलियों के कथित सिंडीकेट की सक्रियता बड़ा सवाल बनकर सामने आ रही है। आरोप है कि धान खरीद से जुड़े प्रभावशाली लोगों का नेटवर्क अभी भी सक्रिय है। सुरेश पारिख के कथित सिंडीकेट को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में सवाल है कि जब खरीद व्यवस्था में बिचौलियों का प्रभाव होने के आरोप हैं तो किसानों का धान वास्तव में सीधे उनसे कैसे खरीदा जाएगा? क्या प्रशासन इस नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई कर पाएगा या फिर हर साल की तरह किसान व्यवस्था के नाम पर बिचौलियों के चंगुल में फंसे रहेंगे?
पिछली धान खरीद में यूपीपीसीयू एजेंसी के माध्यम से हुई खरीद में करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। इसके अलावा एक धान मिल से जुड़े मामले में करीब 1 करोड़ 39 लाख रुपये की कथित गड़बड़ी को लेकर रिपोर्ट दर्ज होने और मामले की सीबीसीआईडी से जांच कराए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि अब तक संबंधित धनराशि की पूरी रिकवरी नहीं हो सकी है। ऐसे में सवाल उठता है कि सरकारी धन की कथित क्षति के लिए जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई हुई और किसानों के नाम पर खरीद व्यवस्था में गड़बड़ी करने वालों से धनराशि कब वसूली जाएगी?
👉 भैला मकदूमपुर में यूपीपीसीयू एजेंसी के तहत धान खरीद में हुआ था बड़ा खेल, फर्जी खतौनी सत्यापन से हजारों कुंतल खरीद का आरोप..
कौशांबी। मंझनपुर तहसील और ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम सभा भैला मखदूमपुर में यूपीपीसीयू एजेंसी की धान खरीद में कथित फर्जीवाड़े का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि दर्जनों किसानों के नाम पर फर्जी तरीके से धान खरीद दर्ज की गई। जिन किसानों के पास महज 10 बीघा जमीन है, उनके नाम पर हजारों कुंतल धान खरीद दर्शाई गई। इससे भी गंभीर मामला खतौनी सत्यापन का रहा है। आरोप है कि किसानों की खतौनियों का फर्जी सत्यापन कर खरीद का रास्ता साफ किया गया था । ऐसे में सवाल है कि राजस्व कर्मियों ने बिना वास्तविक जांच के सत्यापन कैसे कर दिया? तत्कालीन एसडीएम मंझनपुर और संबंधित अधिकारियों की निगरानी कहां थी? पूरे मामले में एसडीएम से लेकर एडीएम ,जिलाधिकारी तक की कार्यशैली सवालों के घेरे में है। आखिर किसके संरक्षण में सरकारी खरीद का यह खेल चला? खतौनी, पंजीकरण, खरीद रिकॉर्ड और भुगतान की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?
इस बार प्रशासन ने भले ही बिचौलियों पर अंकुश लगाने और पारदर्शी खरीद के निर्देश दिए हों, लेकिन असली परीक्षा क्रय केंद्रों पर होगी। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले, फर्जी खरीद पर रोक लगे और पिछली अनियमितताओं के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो, तभी धान खरीद व्यवस्था को पारदर्शी माना जा सकेगा।
- अमरनाथ झा पत्रकार -9415254415
