अखिलेश के 11 धुरंधर तय कराएंगे टिकट:‘PDA पंचायत’ कर जुटा रहे फीडबैक; सपा की नई स्ट्रैटजी जानिए

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अखिलेश के 11 धुरंधर तय कराएंगे टिकट:‘PDA पंचायत’ कर जुटा रहे फीडबैक; सपा की नई स्ट्रैटजी जानिए

सपा-कांग्रेस में गठबंधन अभी तक फाइनल नहीं हो पाया है। कांग्रेस 140 सीटें मांग रही है, जबकि सपा 70 से ज्यादा देने के मूड में नहीं है। सीट शेयरिंग पर फैसला 15 नवंबर तक होगा। इससे पहले ही अखिलेश ने 300 से ज्यादा सीटों पर जिताऊ चेहरों की खोजबीन शुरू कर दी है। पीडीए फॉर्मूले के तहत उन्होंने अपने 11 बड़े नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें विधानसभा सीट पर पीडीए पंचायत में शामिल होना है। वहां हवा का रुख भांपकर अपनी रिपोर्ट अखिलेश यादव को सौंपनी है। इस रिपोर्ट पर स्थानीय सांसदों, जिलाध्यक्षों और पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ चर्चा होगी। फिर कैंडिडेट के नाम पर मुहर लगेगी।

2027 चुनाव से पहले प्रत्याशी तय करने में यह रिपोर्ट 3 तरह से अहम होगी- 1. इससे सामने आएगा कि किस क्षेत्र में कौन-सा चेहरा ज्यादा मजबूत है? किसके दावे हवा-हवाई हैं?
2. किस सीट पर लोग क्या सोच रहे हैं? किन फैक्टर को ध्यान में रखकर वोट करने वाले हैं?
3. सपा जिन चेहरों को संभावित प्रत्याशी मानते हुए तैयारी कर रही है, वो चुनाव में जिताऊ साबित होंगे या नहीं? यूपी में हो रही पीडीए पंचायत सिर्फ दिखावे के लिए न हो, इसका ध्यान भी अखिलेश रख रहे हैं। इसका उदाहरण कन्नौज में दिखा। 18 अक्टूबर को प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल की मौजूदगी में पीडीए पंचायत हुई। भीड़ नहीं जुटाने पर जिलाध्यक्ष कलीम खान समेत सभी पदाधिकारी हटा दिए गए। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने जिले की पूरी कार्यकारिणी भंग कर दी। इस घटना के बाद सभी जिलों के पदाधिकारी लोगों के बीच मौजूद रहकर उनकी शिकायतें सुन रहे हैं। सुझाव नोट कर रहे हैं। जहां भाजपा के कैंडिडेट हैं, वहां वो किन कामों में चूक गए, ये लोगों को बता रहे हैं। सपा के शासन के दौरान उनके एरिया में क्या डेवलपमेंट हुए थे, यह याद दिलाया जा रहा है। साथ ही वोटर लिस्ट में नाम चेक करने के लिए भी जागरूक किया जा रहा है। पार्टी के प्रदेश मुख्यालय से बड़े नेताओं को पत्र भेजकर जिम्मेदारी तय की जा रही है। वे अपने-अपने प्रभाव वाले विधानसभा क्षेत्रों की रिपोर्ट तैयार करके लखनऊ मुख्यालय को भेज दें। जिन 11 नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी, उन्हें जानिए सपा पर हमेशा ‘केवल यादव केंद्रित’ होने का आरोप लगता रहा है। अखिलेश ने चुनाव से पहले गैर-यादव ओबीसी जातियों के कद्दावर चेहरों को आगे किया है। इस तरह से भाजपा के ओबीसी वोटबैंक (कुर्मी, मौर्य/कुशवाहा, राजभर, निषाद, लोध) में सेंधमारी की रणनीति है। 1. गैर-यादव ओबीसी 2. दलित वोटर्स 3. मुस्लिम समाज 4. जाट-किसान वोटबैंक (इन नेताओं को लोगों के बीच रहकर उन्हें 2012 से 2017 तक, यानी सपा सरकार में हुए डेवलपमेंट के कामों को याद दिलाना है।) पश्चिमी यूपी में भी PDA का कुनबा बढ़ा रहे अखिलश अखिलेश यादव पश्चिमी यूपी में सपा का कुनबा बढ़ाने में जुटे हैं। उन्होंने 26 अक्टूबर को मुजफ्फरनगर से राजपाल सैनी और दारा सिंह प्रजापति को पार्टी में शामिल कराया। वहीं, बदायूं से सिनोद शाक्य और कुशाग्र सागर ने भी सपा का दामन थामा। 28 अक्टूबर को बरेली के कश्यप समाज के बड़े नेता और पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप भी सपा में शामिल हो गए। पार्टी में नए नेताओं के शामिल होने का सिलसिला जारी है। ‘2027 का चुनाव जातीय फैक्टर पर ही लड़ेगी सपा’ सपा की इस स्ट्रैटजी पर राजनीतिक विश्लेषक राजेंद्र कुमार कहते हैं- यूपी में जाति आज भी सबसे बड़ा फैक्टर है, जो हार-जीत तय करता है। 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा को ‘पीडीए रणनीति’ और ‘संविधान खतरे में है’ का नैरेटिव बनाकर फायदा मिला था। 2024 में वोट शेयर बढ़कर 33.59% हो गया था, जबकि 2019 में बसपा गठबंधन में होने के बाद 18.11% रहा था। इस तरह वोट शेयर में 15.48% का इजाफा हुआ था। हर विधानसभा के लिए नया फॉर्मूला अब तक 50 से ज्यादा पीडीए पंचायतें हो चुकी हैं। इनमें नेता लोगों के बीच चुनावी भाषण दे रहे थे। लेकिन, अब कहा गया है कि लोकल मुद्दों पर बात करिए। पार्टी पूरे प्रदेश के लिए एक ही फॉर्मूला नहीं थोपना चाहती। इसलिए हर विधानसभा और हर जिले के लिए अलग घोषणापत्र तैयार किए जा रहे हैं। कई पंचायतों में खुद प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल पहुंच रहे हैं। पीडीए पंचायतों के लिए अलग-अलग प्लान बने हैं। 38 सीटों पर हार-जीत सिर्फ 1-5 हजार वोट से तय हुई 2022 के विधानसभा चुनाव में 38 ऐसी सीटें थीं, जहां हार-जीत 1 से 5 हजार वोटों से तय हुई थी। इनमें सबसे ज्यादा 14 ऐसी सीटें हैं, जहां हार-जीत सिर्फ 1 से 2 हजार वोटों से तय हुई थी। इन सीटों पर सपा के लिए काम करने वाली प्राइवेट एजेंसी देख रही है कि किस बूथ पर किस जाति का कितना प्रभाव है? कहां वोट बिखरा और किस जगह पर वोट ट्रांसफर नहीं हो सका? सपा प्रवक्ता बोले- सत्ता नहीं, संवैधानिक अधिकार बचाने के लिए लड़ रहे सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. आशुतोष वर्मा कहते हैं- सपा नेता गांव-गांव जाकर लोगों को सच बताएंगे। पिछले 10 सालों में किस तरह से आरक्षण की अनदेखी हुई, सरकारी नौकरियों में भेदभाव किया गया, इसे उजागर करना हमारी प्राथमिकता है। ‘हमने ‘पीडीए’ अभियान के तहत 7 अलग-अलग वर्जन तैयार किए हैं। इसमें बाबा साहेब अंबेडकर की मूर्तियां तोड़े जाने, पेपर लीक की घटनाओं से लेकर प्राथमिक स्कूलों के बंद होने जैसे बड़े मुद्दों को शामिल किया गया है। —————————- यह खबर भी पढ़ें- कांग्रेस का दावा-पीलीभीत में 13150 मुस्लिम वोटरों के नाम बदले, यूसुफ को असलम किया कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर बड़े पैमाने पर मुसलमानों के वोट काटने के आरोप लगाए हैं। कांग्रेस ने दावा किया कि अकेले पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में 13,150 मुस्लिम वोटर्स के एपिक (EPIC) नंबर एक जैसे हैं। लेकिन, उनके नाम और पिता के नाम बदल दिए गए हैं। मतदाता का असली नाम हटाकर दूसरा नाम दर्ज कर दिया गया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

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