यूपी के 10 जिलों में बारिश का अलर्ट:अर्नब तूफान से बदलेगा मौसम, 8°C तक गिरेगा पारा
यूपी में आज यानी बुधवार से मौसम बदल सकता है। पूर्वांचल के 10 जिलों में आंधी के साथ बारिश के आसार हैं। जबकि कल से 3 दिन भारी बारिश की चेतावनी है। बंगाल की खाड़ी में बने अर्नब तूफान के असर से पूर्वांचल के जिलों में बारिश होगी। मौसम विभाग के मुताबिक- 29, 30 और 31 अक्टूबर को भारी बारिश, 140 की रफ्तार में आंधी, गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की संभावना है। 29 अक्टूबर को सोनभद्र, चित्रकूट, प्रयागराज, वाराणसी, मिर्जापुर समेत 21 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है। वहीं, 38 जिलों में आंधी, बिजली गिरने और गरज-चमक का खतरा है। बारिश और ठंडी हवा के चलते अधिकतम तापमान में 5 से 8 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आने के आसार हैं। वहीं, राहत आयुक्त भानु चंद्र गोस्वामी ने प्रदेश के सभी जिलों के अफसरों और राहत कंट्रोल रूम को 24 घंटे अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए हैं। जिला आपदा नियंत्रण कक्ष सक्रिय रखने के साथ पुलिस, स्वास्थ्य, सिंचाई और राजस्व विभाग के अधिकारियों को सतर्क रहने को कहा गया है। प्रशासन को आंधी-बारिश से जन-धन के नुकसान को रोकने के लिए जरूरी तैयारियां दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं। अब पढ़िए कल किन जिलों में बारिश होगी
IMD और कृषि विभाग ने किसानों के लिए गाइडलाइन जारी की फसल की तुरंत कटाई और सुरक्षित भंडारण: अगर आपकी धान या मक्के की फसल 80 से 85% तक पक चुकी है, तो 28 अक्टूबर से पहले उसकी कटाई कर लें। काटी गई फसल को खुले खेतों या खलिहानों में न छोड़ें। उसे किसी पक्के शेड या ऊंचे स्थान पर रखकर मजबूत तिरपाल से अच्छी तरह ढंक दें। खेतों से पानी निकालने का इंतजाम: सब्जियों, बागवानी और धान के खेतों में पानी जमा नहीं होने दें। इसके लिए खेतों के कोनों पर नालियां पहले से तैयार कर लें। अगले 3-4 दिन खेत में किसी भी तरह की खाद, कीटनाशक का छिड़काव न करें और न ही सिंचाई करें। बीमा: अगर तूफानी बारिश से फसल का नुकसान होता है, तो प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा करने वाले किसान 72 घंटे के भीतर टोल-फ्री नंबर 14447 पर अपनी शिकायत जरूर दर्ज कराएं। जिससे समय पर मुआवजा मिल सके। अब जानिए अर्नब तूफान की वजह से यूपी में क्या नुकसान हो सकता है अर्नब तूफान की वजह से सबसे ज्यादा नुकसान फसलों को होगा। यह अक्टूबर का आखिरी हफ्ता है। इस समय धान की फसल पक चुकी है और काटी जा रही है। इसके साथ ही गेहूं, आलू, सरसों की बुवाई की तैयारियां चल रही हैं। ऐसे में बेमौसम बारिश और तेज हवाएं किसानों की मेहनत पर पानी फेर सकती हैं। धान को सबसे ज्यादा नुकसान: BHU के ग्रामीण कृषि मौसम सेवा केंद्र के नोडल अधिकारी प्रो. रवि शंकर सिंह और तकनीकी अधिकारी, मौसम वैज्ञानिक शिव मंगल सिंह ने बताया- धान की फसल इस समय पूरी तरह पककर तैयार है या कटकर खेतों में पड़ी है। तेज हवाओं (40-50 किमी/घंटा) से धान के पौधे खेतों में बिछ जाएंगे। अगर कटे हुए धान पानी में डूब गए, तो दाने काले पड़ जाएंगे और सड़ने लगेंगे। सब्जियां और बागवानी: गोभी, टमाटर, मिर्च जैसी हरी सब्जियों की नर्सरी और खेतों में जलभराव होने से पौधे गल जाएंगे। इसके अलावा, तेज हवाओं से केले और पपीते के पेड़ों के टूटने या गिरने का सबसे ज्यादा खतरा रहता है। आलू, सरसों की बुवाई में देरी: जो किसान इन दिनों गेहूं, सरसों या अगेती आलू की बुवाई करने वाले थे, खेतों में पानी भरने के कारण वे कम से कम 10 से 15 दिनों तक बुवाई नहीं कर पाएंगे। इससे रबी का पूरा सीजन लेट हो सकता है। ग्राफिक्स में देखिए पिछले 24 घंटे में कौन सा शहर गर्म और ठंडा रहा
