यूपी में थाना प्रभारियों की तैनाती के है सख्त नियम, मनमानी करने वाले पुलिस कप्तानों पर भी कार्रवाई की दी गई है चेतावनी
👉 बिना ठोस वजह थानेदारों को हटाना पड़ेगा भारी, बैड एंट्री मिलने पर तत्काल हटेंगे थाना प्रभारी; छह माह तक दोबारा नहीं मिलेगा थाने का चार्ज….
👉 थानेदारों की तैनाती में नहीं चलेगी मनमानी, वरिष्ठता और कार्यक्षमता होगी आधार…
👉 वरिष्ठता, कार्यक्षमता और ईमानदारी के आधार पर बनेगी सूची, खराब प्रविष्टि मिलते ही थानेदार को है तत्काल हटाने का निर्देश…
👉 संदीपन घाट थाने की कार्यशैली पर उठे सवाल, क्य अपराध नियंत्रण में थानेदार की जवाबदेही होगी तय..
👉 कटघरे में है चोरी और अपहरण के मामलों में लंबित विवेचनाओं पर पुलिस की कार्यप्रणाली..
कौशाम्बी/लखनऊ। उत्तर प्रदेश में थाना प्रभारियों की नियुक्ति और तबादलों को लेकर पुलिस मुख्यालय ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। तत्कालीन डीजीपी प्रशांत कुमार ने 18 अगस्त 2024 को जारी निर्देशों में स्पष्ट किया था कि पुलिस कप्तान बिना ठोस कारण के बार-बार थाना प्रभारियों को नहीं बदल सकेंगे। नियमों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जा सकती है।
योग्यता और कार्यक्षमता बनेगी नियुक्ति का आधार
पुलिस मुख्यालय के निर्देशों के मुताबिक थानों में इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर की तैनाती उनकी वरिष्ठता, उपयुक्तता, योग्यता, कर्मठता, कार्यकुशलता, सत्यनिष्ठा और व्यवहारिक दक्षता के आधार पर की जाएगी। थाना प्रभारी के दावेदारों की सूची वरिष्ठता क्रम में तैयार कर अनुमोदन के लिए संबंधित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भेजी जाएगी।
बैड एंट्री पर तत्काल हटाने का प्रावधान….
निर्देशों के अनुसार अनुमोदित सूची में शामिल किसी थाना प्रभारी को बैड एंट्री मिलने पर तत्काल हटाया जाएगा। संबंधित पुलिस कप्तान को इसकी सूचना और हटाने का कारण IG एवं ADG को देना होगा। कार्रवाई के तहत हटाए गए थाना प्रभारी को अगले छह माह तक किसी अन्य थाने का चार्ज नहीं दिया जाएगा। दोबारा चार्ज देने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति आवश्यक होगी।
जूनियर को चार्ज देने पर भी देना होगा जवाब…
यदि जिले का पुलिस कप्तान वरिष्ठ अधिकारियों की उपलब्धता के बावजूद किसी जूनियर पुलिसकर्मी को थाना प्रभारी नियुक्त करता है तो उसे इसके कारण वरिष्ठ अधिकारियों को बताने होंगे। वहीं, प्रशासनिक आधार पर हटाए गए इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर को एक वर्ष तक दोबारा थाना प्रभारी के पद पर तैनात नहीं करने का निर्देश दिया गया है।
हर महीने होगी समीक्षा….
पुलिस मुख्यालय ने ADG जोन और पुलिस कमिश्नर को निर्देशों का कड़ाई से पालन कराने की जिम्मेदारी दी है। थाना प्रभारियों की तैनाती की मासिक समीक्षा होगी और प्रत्येक माह की पांच तारीख तक इसकी रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेजी जाएगी। निर्देशों के पालन में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जा सकती है।
अपराध नियंत्रण में प्रदर्शन भी बनेगा अहम सवाल…
इन निर्देशों के बीच अब जिलों में थाना प्रभारियों की कार्यशैली, अपराध नियंत्रण, चोरी और अपहरण के मामलों के खुलासे तथा लंबित विवेचनाओं पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि केवल अपराधों की संख्या बढ़ने से थाना प्रभारी को स्वतः हटाने का कोई निर्धारित प्रतिशत नहीं है, लेकिन कार्यकुशलता और सत्यनिष्ठा नियुक्ति के महत्वपूर्ण आधार हैं।
सवाल यह है कि जब किसी थाने में चोरी और अपहरण के मामले लगातार अनसुलझे रह रहे हों, तो संबंधित थाना प्रभारी के प्रदर्शन की समीक्षा और जवाबदेही आखिर कब तय होगी?
कौशांबी के संदर्भ में यह सवाल उठता है कि क्या S.P. कौशांबी सत्यनारायण प्रजापत सभी थाना प्रभारियों की वरिष्ठता सूची, अनुमोदित नियुक्ति सूची और मासिक कार्यप्रदर्शन रिपोर्ट के आधार पर समीक्षा कर रहे हैं यह एक बड़ा सवाल है…
अमरनाथ झा पत्रकार -9415254415
