109 आरटीआई में 52 पर कार्रवाई नहीं, 26 के जवाबों में अधूरी सूचना देने का आरोप
👉 आरटीआई का नहीं मिला जवाब,जवाबों में अधूरी सूचना का आरोप; कब जागेगा जिला प्रशासन ?”
👉 सूचना के अधिकार पर विभागों की चुप्पी! 52 RTI लंबित, आधे से अधिक जवाब अधूरे…
👉 RTI का जवाब देने में विभागों की बेरुखी? 109 आवेदनों में 52 पर कार्रवाई नहीं, 26 जवाबों पर सवाल..
👉 कौशांबी के विभागों से जवाब मांग रहे पत्रकार अमरनाथ झा, 52 RTI लंबित; अधूरी सूचना ने बढ़ाए सवाल..
कौशांबी। सरकारी विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के तहत जानकारी मांगने वाले पत्रकार अमरनाथ झा को कई आवेदनों पर अब तक जवाब का इंतजार है। उत्तर प्रदेश के ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल पर उपलब्ध उनके खाते के स्क्रीनशॉट के अनुसार, कुल 109 आरटीआई आवेदन दर्ज हैं। इनमें 52 आवेदनों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जबकि 26 आवेदन दूसरे जनसूचना प्राधिकरणों को स्थानांतरित किए गए हैं। वहीं, 26 आवेदन निस्तारित दर्शाए गए हैं और किसी भी आवेदन पर अतिरिक्त भुगतान की मांग दर्ज नहीं दिखाई गई है।
26 जवाब मिले, आधे से अधिक में अधूरी सूचना का आरोप
पत्रकार अमरनाथ झा का आरोप है कि निस्तारित दर्शाए गए 26 आवेदनों में आधे से अधिक के जवाब अधूरे हैं। उनका कहना है कि कई मामलों में मांगी गई जानकारी का स्पष्ट और बिंदुवार जवाब देने के बजाय गोलमोल सूचना दी गई, जिससे वास्तविक तथ्यों का पता नहीं चल सका।
इन आरटीआई आवेदनों में अधिकांश कौशांबी जिले के नगर पालिका परिषद, नगर पंचायतों, विकास विभाग, पुलिस विभाग और आईटीआई समेत विभिन्न सरकारी कार्यालयों से संबंधित हैं। लगभग चार से पांच आवेदन प्रयागराज जिले के विभागों से जुड़े हैं, जबकि शेष आवेदन कौशांबी जिले के हैं।
52 आवेदनों पर कार्रवाई नहीं, प्रशासन कब लेगा संज्ञान?
पोर्टल पर दर्ज स्थिति के अनुसार, 52 आवेदनों पर कार्रवाई नहीं होना और कई जवाबों में कथित रूप से अधूरी जानकारी मिलना विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। सवाल यह है कि संबंधित जनसूचना अधिकारियों ने इन आवेदनों पर अब तक क्या कार्रवाई की और आवेदक को मांगी गई पूरी जानकारी कब तक उपलब्ध कराई जाएगी?
सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत निर्धारित समयसीमा में सूचना देना या कानून के अनुरूप निर्णय लेना संबंधित जनसूचना अधिकारी की जिम्मेदारी है। निर्धारित समय में सूचना नहीं मिलने अथवा अधूरी सूचना मिलने पर आवेदक प्रथम अपील कर सकता है। नियमानुसार आगे राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील या शिकायत का विकल्प भी उपलब्ध है।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग लंबित आवेदनों तथा अधूरी सूचना देने के आरोपों पर कब संज्ञान लेते हैं। हालांकि, पोर्टल पर आवेदन की स्थिति अपने आप में यह साबित नहीं करती कि हर मामले में कानून का उल्लंघन हुआ है। संबंधित विभागों का पक्ष और प्रत्येक आवेदन की वास्तविक स्थिति सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट होगी।
अमरनाथ झा पत्रकार -9415254415
