थाना संदीपनघाट में जुआ कार्रवाई की एफआईआर में समय का अंतर, बरामदगी और मौके पर रिहाई पर उठे सवाल

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👉 थाना संदीपनघाट पुलिस पर गिरफ्तारी नियमों की अनदेखी के आरोप  ,मानवाधिकार और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के पालन पर सवाल…

👉 जुआ कार्रवाई की एफआईआर में समय और प्रक्रिया की जांच जरूरी..,एसपी से निष्पक्ष जांच कराकर जवाबदेही तय करने की मांग..

👉 कौशांबी में चार आरोपियों पर जुआ अधिनियम के तहत कार्रवाई; एसपी से पुलिस अभिलेखों और पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने की मांग..

कौशांबी। संदीपन घाट थाना क्षेत्र के काजीपुर गांव में जुआ खेलने के आरोप में चार लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर अब पुलिस कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर रही है। 10 अक्टूबर 2026 को दर्ज मामले में पुलिस ने 52 ताश के पत्ते और कुल 1,690 रुपये बरामद करने का दावा किया है। एफआईआर में दर्ज समय, बरामदगी के विवरण, कथित घटनास्थल और मौके पर ही आरोपियों को निजी मुचलके पर छोड़े जाने की प्रक्रिया की जांच जरूरी दिखाई देती है। थाने में अ0सं0 0267/26 मे चार लोगो के नाम रिपोर्ट दर्ज है, जिसमें निवासी काजीपुर के सालिक राम, संदीप कुमार, सिपाही लाल ,दीपू का नाम दर्ज है।

घटना और एफआईआर के समय में 3 घंटे 48 मिनट का अंतर

एफआईआर के अनुसार, पुलिस ने शाम 5:01 बजे आरोपियों को पकड़ने की कार्रवाई की, जबकि थाने में सूचना और जीडी प्रविष्टि संख्या 027 रात 8:49 बजे दर्ज हुई। दोनों समय के बीच तीन घंटे 48 मिनट का अंतर है। यह अंतर अपने आप में अपराध या गलत कार्रवाई का प्रमाण नहीं है, लेकिन यह स्पष्ट होना चाहिए कि पुलिस टीम ने इस अवधि में क्या कार्रवाई की, लिखित सूचना कब तैयार हुई, उसे थाने तक किस समय भेजा गया और एफआईआर दर्ज होने में इतना समय क्यों लगा। पुलिस की रवानगी-वापसी, जीडी और सूचना भेजने वाले पुलिसकर्मी के विवरण का मिलान इस सवाल का जवाब दे सकता है।

बरामदगी के आंकड़ों का सत्यापन जरूरी

एफआईआर में फड़ से 950 रुपये और चार आरोपियों की व्यक्तिगत तलाशी से क्रमशः 160, 250, 220 और 110 रुपये बरामद होने का उल्लेख है। व्यक्तिगत बरामदगी का कुल योग 740 रुपये और फड़ की रकम सहित कुल बरामदगी 1,690 रुपये होती है। अब जांच का विषय है कि बरामद रकम किस स्थान से और किस आरोपी के कब्जे से मिली, क्या प्रत्येक बरामदगी अलग-अलग मेमो में दर्ज की गई और सभी दस्तावेजों में रकम का विवरण एक जैसा है। जब्ती मेमो, तलाशी के विवरण और मालखाने या संबंधित अभिलेखों में उपलब्ध प्रविष्टियों का मिलान निष्पक्ष जांच का अहम हिस्सा होना चाहिए।

झाड़ियों में जुआ खेलने का दावा, सार्वजनिक स्थान होने की पुष्टि जरूरी

पुलिस ने घटनास्थल कप्तान शहीद कॉलेज के सामने झाड़ियों के भीतर करीब 100 मीटर की दूरी पर बताया है। केवल किसी कॉलेज के सामने या झाड़ियों में होना यह साबित नहीं करता कि संबंधित जगह कानूनी अर्थ में सार्वजनिक स्थान है। जांच में घटनास्थल का वास्तविक स्वरूप, आम लोगों की पहुंच, भूमि की स्थिति और मौके की परिस्थितियों की पुष्टि की जानी चाहिए। सार्वजनिक जुआ अधिनियम की धारा 13 के प्रयोग की वैधता इसी तथ्य से भी जुड़ी है कि कथित जुआ किस प्रकार के स्थान पर खेला जा रहा था और पुलिस ने आरोपियों को किस परिस्थिति में पाया।

मौके पर निजी मुचलके पर रिहाई की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में

एफआईआर में आरोपियों को मौके पर ही निजी मुचलके पर छोड़े जाने का उल्लेख है। ऐसे में यह स्पष्ट होना चाहिए कि रिहाई का निर्णय किस अधिकारी ने लिया, मुचलके कब तैयार हुए और गिरफ्तारी, हिरासत तथा रिहाई के समय का उल्लेख संबंधित अभिलेखों में किस प्रकार किया गया। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35 गिरफ्तारी की परिस्थितियों और प्रक्रिया से संबंधित है, जबकि धारा 36 गिरफ्तारी की प्रक्रिया एवं संबंधित अभिलेखों के प्रावधान रखती है। लागू विशेष कानून और मामले के वास्तविक तथ्यों के अनुसार इन नियमों के पालन की जांच की जानी चाहिए।

गवाहों के इनकार का उल्लेख, स्वतंत्र सत्यापन क्यों जरूरी?

एफआईआर में पुलिस ने लिखा है कि स्वतंत्र गवाहों से शामिल होने का अनुरोध किया गया, लेकिन वे तैयार नहीं हुए। जांच में यह भी देखा जाना चाहिए कि घटनास्थल के आसपास कौन लोग मौजूद थे, गवाहों को शामिल करने का प्रयास किस प्रकार किया गया और पुलिस के कथन की पुष्टि करने वाला कोई स्वतंत्र साक्ष्य उपलब्ध है या नहीं। घटनास्थल का निरीक्षण, उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज, फोटो-वीडियो और पुलिस टीम के सदस्यों के बयान जांच को तथ्यपरक बना सकते हैं।

एसपी से निष्पक्ष जांच की मांग

मामले में दर्ज एफआईआर और पुलिस अभिलेखों के आधार पर समय-क्रम, घटनास्थल, बरामदगी, जब्ती मेमो, निजी मुचलके और रिहाई की प्रक्रिया का स्वतंत्र सत्यापन कराया जाना जरूरी है। पुलिस अधीक्षक से मांग की जा सकती है कि जांच ऐसे अधिकारी से कराई जाए जो संबंधित कार्रवाई में शामिल न रहा हो। यदि जांच में समय या बरामदगी के विवरण में जानबूझकर गड़बड़ी, अवैध हिरासत अथवा अन्य अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। फिलहाल, एफआईआर में दर्ज विवरण जांच के बिंदु प्रस्तुत करते हैं।

फिलहाल थाना संदीपन घाट पुलिस की कार्यवाही पर इन बिंदुओं की जांच आवश्यक है अब देखना है कि इस मामले में क्या जांच होती है या मामला ऐसे ही चलता रहेगा यह एक बड़ा सवाल है..

10 अक्टूबर 2026 की जीडी प्रविष्टि संख्या 027 और संबंधित अभिलेखों की जांच हो।
शाम 5:01 बजे से रात 8:49 बजे तक पुलिस की कार्रवाई और दस्तावेज थाना पहुंचने के समय का मिलान किया जाए।
घटनास्थल की प्रकृति और सार्वजनिक स्थान होने के तथ्य की जांच हो।
तलाशी, फड़ से ₹950 की बरामदगी, 52 ताश के पत्तों और चारों आरोपियों से बरामद व्यक्तिगत रकम के रिकॉर्ड का मिलान किया जाए।
मौके पर रिहाई के आदेश, निजी मुचलकों और संबंधित रिकॉर्ड की जांच हो।
यदि रिकॉर्ड में जानबूझकर गलत विवरण, अवैध हिरासत या अन्य अनियमितता मिले, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

अमरनाथ झा पत्रकार -9415254415

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