जिसे 3 दिन पहले घेरा उसी ने गोलियों से भूना:रामपुर में रंजिश में हुई गैंगस्टर की हत्या, पत्नी बोली- लव मैरिज की थी, अब क्या होगा
‘जिनके लिए मैंने सबको छोड़ा, अब वो भी मुझे छोड़कर चले गए। मैंने संदीप से लव मैरिज की थी। घरवालों ने तो पहले ही मुंह मोड़ लिया था। अब पति भी इस दुनिया में नहीं रहे। मैं दो मासूम बच्चों को लेकर कहां जाऊं?’ यह दर्द है रामपुर की उस महिला का, जिसके पति की गोली मारकर हत्या कर दी गई। गुरुवार (8 अक्टूबर) को गैंगस्टर की 3 गोली मारकर हत्या कर दी गई। हत्या का CCTV फुटेज भी सामने आया। जिसमें हमलावर कार से निकलते ही ताबड़तोड़ फायरिंग करते दिख रहे हैं। दैनिक भास्कर ने मृतक की पत्नी और उस दोस्त से बात की, जो आखिरी वक्त में उसके साथ था। पढ़िए रिपोर्ट… पहले मर्डर की 2 तस्वीरें पहले मामला समझिए… डिबडिबा गांव के सांगा फार्म का रहने वाला संदीप चौहान उर्फ सनी (30) एक राइस मिल में काम करता था। सनी के परिवार में पत्नी शिवानी, 9 महीने का बेटा आदित्य और तीन साल की बेटी आराध्या हैं। संदीप के माता-पिता और 4 भाई समेत परिवार के बाकी लोग बरेली में मोहम्मदगंज गांव में रहते हैं। गुरुवार (8 अक्टूबर) सुबह बेटे के बीमार होने पर संदीप उसे दवा दिलाने ले गया था। लौटते समय रास्ते में दोस्त बृजेश मिल गया। संदीप में साइड में बाइक खड़ी कर दी और बृजेश की कार पर बैठकर बात करने लगा। पत्नी बच्चे को लेकर घर चली गई। कार से निकलते ही बाइक पर 3 बदमाश आए और ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। संदीप वहीं गिर गया और हमलावर फायरिंग करते हुए भाग गए। संदीप पर गैंगस्टर, लूट समेत 16 से ज्यादा केस दर्ज थे। हिस्ट्रीशीट शुरू करने का प्रॉसेस भी चल रहा था। 10 दिन पहले ही वह जेल से बाहर आया था। पुलिस का कहना है कि 3 दिन पहले संदीप ने रम्मी नाम के लड़के को घेर लिया था। उस दिन वो बच गया था। उसी ने साथियों के साथ हत्या की है। अब पढ़िए पत्नी ने क्या बताया… शिवानी ने बताया- मैंने चार साल पहले अपनी मर्जी से संदीप को जीवनसाथी चुना था। उसके लिए मैंने अपना मायका छोड़ दिया। घरवालों ने मेरी शादी को मंजूर नहीं किया और मुझसे मुंह मोड़ लिया। मुझे लगा था कि संदीप ही अब मेरा अपना है। उसी के साथ मैं अपनी जिंदगी गुजार लूंगी। लेकिन, संदीप की हत्या ने मेरी पूरी दुनिया उजाड़ दी। आज मेरे पास न मायके का सहारा है और न पति का। मेरी गोद में 9 महीने का बेटा है और सामने तीन साल की बेटी। दोनों को देखकर मेरे मन में बस एक ही सवाल उठता है कि अब मैं इन्हें लेकर कहां जाऊंगी? ससुराल में भी आए दिन झगड़ा होता रहता था और रंजिशें भी थीं। इसलिए मैं संदीप के साथ डिबडिबा में किराए के मकान में रहती थी। बोली- दोस्तों की मदद में होते थे झगड़े संदीप के ऊपर जो मुकदमे दर्ज हैं, वे सिर्फ दोस्तों की मदद करने की वजह से हैं। उसका खुद कभी किसी से झगड़ा नहीं हुआ था। मदद करने के चक्कर में वो जेल भी गया था। पहले मैं भी नौकरी करती थी, लेकिन अब घर पर ही बच्चों की देखभाल करती हूं। कुछ लोगों से काफी टाइम से दुश्मनी चल रही है। दोनों तरफ से पहले भी गोलियां चल चुकी थीं। मुझे फोन पर पता चला था कि पिछले तीन-चार दिनों से संदीप की फील्डिंग की जा रही थी। उसे मारने के लिए बाहर से बंदे बुलाए गए थे। मैं डर गई थी। मुझे अंदेशा था कि उसके साथ कुछ गलत हो सकता है। गिरने के बाद सिर में गोली मारी हम अपनी कॉलोनी में डॉक्टर के पास से दवा लेकर लौट रहे थे। रास्ते में शराब ठेके के पास उसके दोस्त मिल गए। वह बातचीत करने के लिए रुक गया और मैं घर आ गई। इसी बीच बाइक से तीन-चार हमलावर आए और संदीप पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं। उसे 3 गोलियां लगीं। संदीप के गिरने के बाद भी हमलावरों ने उसके सिर में गोली मारी। सोची-समझी साजिश के साथ घटना को अंजाम दिया गया। अब मेरी जिंदगी में बस मेरे दोनों बच्चे हैं। मैं नहीं जानती कि आगे कैसे गुजारा होगा? मेरी पुलिस प्रशासन से यही गुहार है कि इस साजिश में शामिल सभी आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए। मुझे न्याय और सुरक्षा दी जाए। अब पढ़िए जिसके सामने हत्या हुई, उसने क्या बताया… बृजेश ने बताया- संदीप से मेरी 4 साल से दोस्ती थी। वो आया और कार में बैठ गया। अपनी बाइक उसने पास में ही खड़ी कर दी। बच्चों के बीमार होने से परेशान था। बोला कि अभी बेटे को दवा दिलाकर लौट रहा था। पत्नी को घर भेज दिया है, पहुंचने वाली होगी। 5 मिनट बात करने के बाद वो कार से उतरने लगा। वो सही से नीचे उतर भी नहीं पाया था कि पीछे से एक स्प्लेंडर बाइक आ गई। उस पर 3 लोग सवार थे। उन लोगों ने ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। उनमें से एक रम्मी को मैं जानता हूं। उसने मुझे धमकाते हुए कहा कि गाड़ी से बाहर निकले, तो तुम्हें भी भून डालेंगे। डर की वजह से मैं कार के अंदर ही बैठा रहा। वो लोग जैसे ही गए, तो मैंने पुलिस को फोन किया। पुलिस के साथ हॉस्पिटल लेकर गया, लेकिन उसकी मौत हो गई थी। भाई बोला- संभलने तक का मौका नहीं मिला संदीप के भाई राजीव ने बताया- जैसे ही भाई कार से उतरा, उन लोगों ने तुरंत गोलियां चलानी शुरू कर दीं। कार में मौजूद बृजेश कह रहे हैं कि मैं अचानक इतने सदमे में आ गया कि कुछ समझ ही नहीं पाया और कुछ कर नहीं सका। हमलावरों में से एक ने मुझ पर तमंचा तान दिया, वरना गाड़ी उन तीनों के ऊपर चढ़ा सकता था। बृजेश ने सबसे पहले भाभी शिवानी को फोन कॉल किया, लेकिन फोन नहीं लगा। ASP अनुराग सिंह ने बताया… 3 दिन पहले संदीप ने रम्मी को घेर लिया था और जान से मारने की कोशिश की थी। रम्मी बच गया था। इसी रंजिश में रम्मी ने साथियों के साथ मिलकर संदीप की हत्या की है। संदीप के भाई राजीव की शिकायत पर रम्मी, विशाल टैबलेट, मुन्ना, फौजी और एक अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। ———————- यह खबर भी पढ़ें… 1 नंबर से रह गया था, अबकी वर्दी पक्की है, 9 चक्कर लगाकर मैदान में गिरा फिर नहीं उठा गाजियाबाद में PAC की भर्ती दौड़ में शामली के 23 साल के विवेक कुमार को अचानक सीने में दर्द हुआ। वह ग्रााउंड में पोल पकड़कर कुछ देर सीना दबाए खड़ा रहा, फिर गिर गया। आनन-फानन में उसे हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही मौत हो गई। घटना मंगलवार (6 अक्टूबर) दोपहर 1 बजे की है। पढ़ें पूरी खबर…
