प्रयागराज नगर निगम के भवन सर्वे पर सवाल, पुराने खसरे के आधार पर गृहकर निर्धारण से जनता परेशान
न्यू जियो कंपनी के सर्वे, असेसमेंट रजिस्टर और प्रकाशन पर उठे सवाल; नगर आयुक्त से पारदर्शिता और जांच की मांग..
प्रयागराज। नगर निगम प्रयागराज में वर्ष 2022-23 के दौरान कराए गए भवन सर्वे और गृहकर निर्धारण की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि सर्वे करने वाली न्यू जियो कंपनी के कामकाज में पारदर्शिता का अभाव रहा और सर्वे किस पद्धति से कराया गया, इसका स्पष्ट विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया। लोगों का कहना है कि गृहकर के बिलों में मनमानी और पुराने अभिलेखों के इस्तेमाल के कारण आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सवाल यह है कि नगर निगम ने भवनों का सर्वे मैन्युअल तरीके से कराया था या उपग्रह से प्राप्त तस्वीरों और तकनीक का इस्तेमाल किया गया था? यदि सर्वे कराया गया तो उसकी रिपोर्ट का विधिवत प्रकाशन हुआ या नहीं? सर्वे के आधार पर सहायक आकलन रजिस्टर अथवा असेसमेंट रजिस्टर तैयार किया गया है या नहीं? यदि रजिस्टर तैयार है तो आम नागरिकों को संबंधित भवन के खसरे की प्रमाणित नकल प्राप्त करने में परेशानी क्यों हो रही है?
स्थानीय स्तर पर यह भी शिकायत सामने आ रही है कि भवन स्वामियों को पुराने खसरे की नकल दी जा रही है। कुछ मामलों में वर्ष 2003 या उससे पुराने अभिलेख उपलब्ध कराए जाने का आरोप है। ऐसे में सवाल उठता है कि भवन की वर्तमान स्थिति, क्षेत्रफल, निर्माण की प्रकृति और लागू गृहकर निर्धारण मानकों को किस आधार पर दर्ज किया जा रहा है।
भवन का पूरा विवरण दर्ज होना जरूरी
भवन संबंधी अभिलेखों में क्षेत्रफल, चौहद्दी, मंजिलों की संख्या, कमरों और निर्माण की प्रकृति सहित वे सभी विवरण महत्वपूर्ण हैं, जिनके आधार पर कर निर्धारण की जांच की जा सके। यदि पुराने अभिलेखों को अद्यतन किए बिना गृहकर निर्धारित किया जा रहा है तो इससे करदाताओं के सामने आपत्ति दर्ज कराने और सही आकलन कराने की समस्या खड़ी हो सकती है।
शिकायतों के अनुसार, वर्ष 2013 के सर्वे या अभिलेखों से संबंधित नोटिस भेजे जाने तथा पुराने प्रकाशन और मौजूदा सर्वे के बीच अंतर को लेकर भी भ्रम की स्थिति है। हालांकि, इन दावों की पुष्टि के लिए नगर निगम के मूल अभिलेखों, सर्वे रिपोर्ट, प्रकाशन की तारीख और संबंधित आदेशों की जांच जरूरी है।
नगर आयुक्त से उठाए जा रहे है ये सवाल..
नगर निगम प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि वर्ष 2022-23 में न्यू जियो कंपनी से किस अनुबंध और कार्यादेश के तहत सर्वे कराया गया? सर्वे के लिए कितनी धनराशि खर्च हुई? सर्वे मैन्युअल, उपग्रह आधारित या किसी अन्य तकनीकी पद्धति से कराया गया? सर्वे रिपोर्ट और भवनवार विवरण का प्रकाशन कब और कहां किया गया? क्या विधिवत असेसमेंट रजिस्टर तैयार कर उसे सक्षम अधिकारी से अनुमोदित कराया गया?
यदि असेसमेंट रजिस्टर तैयार है तो भवन स्वामियों को उसकी नकल और अपने भवन का अद्यतन खसरा उपलब्ध कराने की व्यवस्था क्या है? यदि रजिस्टर तैयार नहीं है या सर्वे का विधिवत प्रकाशन नहीं हुआ, तो गृहकर निर्धारण और वसूली का आधार क्या है? साथ ही, पुराने अभिलेखों के आधार पर जारी किए जा रहे बिलों की समीक्षा और गलत आकलन को सुधारने के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई जा रही है?
जांच और पारदर्शिता की मांग….
मामले में सर्वे कंपनी के कार्यादेश, भुगतान विवरण, सर्वे रिपोर्ट, भवनवार अभिलेख, असेसमेंट रजिस्टर और प्रकाशन संबंधी दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए। साथ ही, प्रभावित भवन स्वामियों को अभिलेखों की नकल उपलब्ध कराने, गलत गृहकर का पुनर्मूल्यांकन करने और शिकायतों के निस्तारण की स्पष्ट व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।
अब नगर आयुक्त प्रयागराज से अपेक्षा है कि वह इन सवालों पर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट करें, ताकि यह पता चल सके कि सर्वे निर्धारित नियमों के अनुसार हुआ या नहीं और कहीं अभिलेखीय कमियों अथवा गलत आकलन का आर्थिक बोझ आम जनता पर तो नहीं पड़ रहा है।
अमरनाथ झा पत्रकार – 9415254415
