विकास के नाम पर करोड़ों खर्च, गुणवत्ता और टेंडर प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल
मंझनपुर में 23 करोड़ रुपये के 210 विकास कार्यों के टेंडर की जानकारी सामने आई, भरवारी में भी वित्तीय अनियमितताओं के आरोप
कौशांबी। जिले की नगर पालिका परिषद मंझनपुर और नगर पालिका परिषद भरवारी में विकास कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। हालांकि, कई विकास कार्यों की गुणवत्ता, वास्तविक मात्रा, टेंडर प्रक्रिया और भुगतान को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मंझनपुर नगर पालिका में हाल में करीब 23 करोड़ रुपये की लागत से 210 विकास कार्यों के टेंडर की जानकारी सामने आई है। वहीं, भरवारी नगर पालिका में वित्तीय अनियमितताओं और विकास कार्यों में कथित गड़बड़ी के आरोप भी सामने आ चुके हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि सरकारी धन से कराए जा रहे इन कार्यों की वास्तविक स्थिति मौके पर क्या है? सड़क, इंटरलॉकिंग, नाली निर्माण, स्ट्रीट लाइट, पेयजल समेत अन्य कार्यों में स्वीकृत लागत और निर्धारित मानकों के अनुरूप काम हुआ है या नहीं, इसकी जांच जरूरी है।
कागजों में पूरा काम, जमीन पर कितनी हकीकत?
नगर पालिकाओं में निर्माण कार्यों की जांच के दौरान BOQ, एमबी बुक और मौके पर हुए वास्तविक निर्माण का मिलान सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि किसी सड़क की लंबाई, चौड़ाई या मोटाई अभिलेखों में अधिक दर्ज है, जबकि मौके पर निर्माण कम पाया जाता है, तो सरकारी धन के संभावित दुरुपयोग का सवाल उठ सकता है।
इसी तरह नाली निर्माण में लंबाई, चौड़ाई, गहराई और इस्तेमाल की गई सामग्री की जांच जरूरी है। इंटरलॉकिंग कार्यों में ईंट की गुणवत्ता, बेस की मोटाई और वास्तविक क्षेत्रफल का मौके पर सत्यापन किया जाना चाहिए।
स्ट्रीट लाइट से लेकर नाली निर्माण तक जांच की जरूरत
मंझनपुर और भरवारी नगर पालिका में स्ट्रीट लाइट, सड़क, नाली, पेयजल और अन्य विकास कार्यों पर खर्च हुई धनराशि की निष्पक्ष तकनीकी जांच की जरूरत महसूस की जा रही है। भरवारी में करीब नौ लाख रुपये के सड़क कार्य को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप सामने आने के बाद इन आरोपों की जांच और अभिलेखों के सत्यापन की मांग और महत्वपूर्ण हो जाती है।
प्रत्येक कार्य की स्वीकृत लागत, टेंडर राशि, संबंधित फर्म या ठेकेदार, कार्यादेश, एमबी, बिल-वाउचर और भुगतान की तारीख जैसे अभिलेखों को पारदर्शी तरीके से सामने लाने की मांग भी उठ रही है।
15वें वित्त आयोग के कार्य भी हों जांच के दायरे में
नगर पालिकाओं को 15वें वित्त आयोग सहित विभिन्न मदों से विकास कार्यों के लिए धनराशि प्राप्त होती है। ऐसे में यह देखना जरूरी है कि इन मदों से स्वीकृत कार्य वास्तव में धरातल पर कितने पूरे हुए हैं और उनकी गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप है या नहीं।
यदि किसी कार्य का भुगतान पूरा हो चुका है, तो मौके पर उसकी वास्तविक स्थिति और अभिलेखों में दर्ज विवरण का मिलान कराया जाना चाहिए।
23 करोड़ के 210 कार्यों पर निगरानी जरूरी
मंझनपुर नगर पालिका में करीब 23 करोड़ रुपये के 210 विकास कार्यों के टेंडर की जानकारी सामने आने के बाद इतनी बड़ी धनराशि से होने वाले कार्यों की गुणवत्ता और टेंडर प्रक्रिया पर निगरानी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
प्रशासन को चाहिए कि दोनों नगर पालिकाओं में कराए जा रहे विकास कार्यों का तकनीकी ऑडिट कराए। प्रत्येक कार्य की मौके पर पैमाइश कराकर एमबी और भुगतान अभिलेखों से मिलान कराया जाए। यदि जांच में स्वीकृत मात्रा से कम निर्माण, घटिया सामग्री, गलत भुगतान अथवा टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित फर्म के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
जनता के पैसे से होने वाले विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सबसे महत्वपूर्ण है। सवाल केवल यह नहीं है कि कितना पैसा खर्च हुआ, बल्कि यह भी है कि खर्च हुए सरकारी धन के बदले जनता को जमीन पर कितना और किस गुणवत्ता का विकास मिला।
