कानपुर एक्सप्रेस-वे की बदहाली पर बड़े अफसर बचे, छोटे नपे:जिम्मेदारों ने आंखें मूंदकर फाइलें पास कीं, फील्ड पर गए ही नहीं

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कानपुर एक्सप्रेस-वे की बदहाली पर बड़े अफसर बचे, छोटे नपे:जिम्मेदारों ने आंखें मूंदकर फाइलें पास कीं, फील्ड पर गए ही नहीं

देश के सबसे महंगे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे की बदहाली ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय की इमेज चौपट कर दी। चारों तरफ विभाग और NHAI (नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया) की बदनामी होने लगी है। NHAI को भाजपा नेता के भाई की निर्माण कंपनी को ब्लैकलिस्ट करना पड़ा। आनन-फानन में कुछ अफसरों पर कार्रवाई करके अथॉरिटी ने दिखाना चाहा कि जिम्मेदारों को छोड़ेंगे नहीं। लेकिन सच्चाई यह है कि जिम्मेदार और भी हैं, जिन पर कार्रवाई नहीं हुई। क्योंकि लंबे समय तक एक्सप्रेस-वे बन रहा था, तब ऊपर बैठे अफसर क्या कर रहे थे? क्या उन्होंने क्वालिटी चेक की थी या अनुमान के आधार पर मोरंग और डामर बिछाने दिया? घटिया निर्माण के लिए क्या जिम्मेदारों को बचाया जा रहा है। दैनिक भास्कर की इस रिपोर्ट में हम बताएंगे कि इसके लिए और कौन जिम्मेदार हैं। पहले बताते हैं NHAI ने किन 3 अधिकारियों को जिम्मेदार माना और उन पर कार्रवाई की- गड़बड़ी के बड़े जिम्मेदार, जिन पर कार्रवाई नहीं हुई जिम्मेदारी – NHAI के रीजनल ऑफिसर गौतम लखनऊ में बैठते हैं। यूपी में NHAI के प्रोजेक्ट की निगरानी और समय-समय पर साइट विजिट करके क्वालिटी चेक करना इनका काम है। लापरवाही – शुरुआत में 26 जुलाई को पहली खराबी सामने आई। तब इन्होंने मामले को दबाने की कोशिश की। कहा, छोटे एरिया में बिटुमिनस (कोलतार) की दिक्कत है। मामला हाथ से निकलने के बाद प्रोजेक्ट मैनेजर से लेकर डायरेक्टर पर कार्रवाई की। दैनिक भास्कर ने विशाल गौतम से संपर्क करने की कोशिश की। फोन उठा, लेकिन तुरंत काट दिया गया। दोबारा कॉल करने पर फोन ही नहीं उठाया। जिम्मेदारी – सौरभ चौरसिया के बाद शरद लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे के प्रोजेक्ट डायरेक्टर बने और करीब 1 साल तक इस पद पर रहे। निर्माण के दौरान महत्वपूर्ण तकनीकी व्यवस्थाओं के प्रबंधन की जिम्मेदारी इन्हीं के पास थी। लापरवाही – अपने कार्यकाल में उन्होंने साइट पर जाकर गुणवत्ता की जांच करने के बजाय फाइलों और रिपोर्टों पर आंख मूंदकर भरोसा किया। ग्राउंड जीरो पर कम जाने के कारण निर्माण की कमियों को नजरअंदाज करते हुए हर फाइल पर ‘ओके’ करते चले गए। दैनिक भास्कर ने इनसे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन हो नहीं सका। जिम्मेदारी – एक्सप्रेस-वे बनाने वाली कंपनी PNC इंफ्राटेक के प्रमुख हैं। कंपनी का नाम 3 भाइयों- प्रदीप, नवीन और चक्रेश के नाम पर है। नवीन जैन BJP से राज्यसभा सांसद हैं। लापरवाही – ₹2926 करोड़ की कुल बोली लगाकर दो चरणों का टेंडर हासिल किया, लेकिन निर्माण के दौरान साइट मॉनिटरिंग और क्वालिटी कंट्रोल पर कोई ध्यान नहीं दिया। इनके बारे में भी कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी। कोशिश के बाद भी संपर्क नहीं हो सका। अब दो गड़बड़ियों के मामले जानिए, जिसमें कंपनी मालिक को जिम्मेदार माना गया- जिन अधिकारियों पर कार्रवाई हुई, उनकी क्या जिम्मेदारी थी जिम्मेदारी- फील्ड पर निर्माण कार्य के सबसे बड़े अफसर थे। मिट्टी और गिट्टी की हर लेयर की जांच कराकर रिपोर्ट ऊपर भेजना इनकी जिम्मेदारी थी। लापरवाही- गुणवत्ता की अनदेखी की और फील्ड पर अनियमितता बरती। कार्रवाई- 30 जुलाई को NHAI ने इन्हें प्रोजेक्ट से बाहर कर दिया और 2 साल के लिए बैन कर दिया। जिम्मेदारी- निर्माण की शुरुआत से लेकर 2024 तक प्रोजेक्ट डायरेक्टर रहे। सबसे ज्यादा निर्माण इन्हीं के कार्यकाल में हुआ। लापरवाही- मौके पर जाकर जांच करने के बजाय PNC की रिपोर्ट्स पर आंख बंद करके भरोसा किया। गड़बड़ी की नींव इन्हीं के समय पड़ी। कार्रवाई- NHAI ने आरोप तय करते हुए चार्जशीट जारी की है। जिम्मेदारी- पिछले 1 साल से पद पर तैनात। इन्हीं के कार्यकाल में काम पूरा हुआ और उद्घाटन कराया गया। लापरवाही- ग्रीनफील्ड एरिया का 95% काम साल भर पहले ही पूरा हो चुका था। फिर भी इन्होंने गुणवत्ता जांचे बिना ‘ऑल ओके’ की रिपोर्ट दे दी। कार्रवाई- NHAI से हटाकर PWD से अटैच किया है। धंसे एक्सप्रेस-वे को ठीक करने में 3 करोड़ लगे NHAI के मुताबिक, 63 किमी लंबे एक्सप्रेस-वे की मरम्मत में अब तक 3 करोड़ खर्च हो चुके हैं। ये खर्च PNC इंफ्राटेक ही उठाएगी। कंपनी पर परफारमेंस सिक्योरिटी का 2% जुर्माना भी लगाया गया है। निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी करने वाली थीम इंजीनियरिंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड की लापरवाही सामने आई है। इसलिए भविष्य के प्रोजेक्ट्स से इस कंपनी को बाहर रखा जाएगा। NHAI खुद करवा रहा क्वालिटी की जांच किरकिरी होने के बाद अब NHAI एक्सप्रेस-वे की जांच लेजर प्रोफिलोमीटर से कराएगा। इस तकनीक से किसी वस्तु की सतह की बनावट, खुरदरापन, ऊंचाई को मापने के लिए लेजर बीम का इस्तेमाल किया जाता है। यह बिना छुए सतह का सटीक थ्री डी नक्शा बनाता है, इससे सटीक तरीके से गड़बड़ी सामने आ जाएगी। नॉन परफॉर्मर कंपनी बहराइच एक्सप्रेस-वे कैसे बना रही? NHAI ने माना कि अर्थ वर्क, ड्रेनेज और गुणवत्ता की अनदेखी हुई है। फिर भी NHAI के अधिकारी कंपनी पर कार्रवाई से बचते रहे। PNC को बाराबंकी-बहराइच तक एक्सप्रेस-वे का काम मिला हुआ है। लखनऊ शहर के अंदर भी PNC को एक फ्लाईओवर बनाने का काम दिया गया है। PNC कंपनी का ‘दागदार’ रिकॉर्ड ————– ये भी पढ़ें- UP- सबसे महंगा एक्सप्रेस-वे 18 दिन में 84 जगह धंसा:गडकरी ने अमेरिका के जैसा बताया था; BJP सांसद के भाई की कंपनी को ठेका मिला NHAI को लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे बनाने वाली कंपनी PNC इंफ्राटेक लिमिटेड को नॉन-परफॉर्मर घोषित करना पड़ा। कंपनी के 3 अफसरों को हटा दिया। अब IIT खड़गपुर की टीम एक्सप्रेस-वे की जांच करेगी। हकीकत जानने दैनिक भास्कर ग्राउंड पर पहुंचा। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

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