पीआरडी जवानों ने उठाए सेवा सुरक्षा और सेवानिवृत्ति लाभ के सवाल, सरकार से स्थायी समाधान की मांग
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) के जवानों ने अपनी सेवा सुरक्षा, मानदेय, बीमा और सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सहायता को लेकर सरकार से स्थायी समाधान की मांग की है। जवानों का कहना है कि वर्षों तक कानून-व्यवस्था बनाए रखने, यातायात नियंत्रण, कुंभ मेले, चुनाव, त्योहारों और अन्य प्रशासनिक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद उन्हें पर्याप्त सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध नहीं है।
पीआरडी जवानों के अनुसार उनकी भर्ती ब्लॉक स्तर पर की जाती है और प्रशिक्षण के बाद विभिन्न सरकारी ड्यूटी में तैनात किया जाता है। वर्तमान में उन्हें प्रतिदिन ₹500 मानदेय दिया जाता है, लेकिन सेवा के दौरान दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य सुरक्षा, व्यापक सामाजिक सुरक्षा तथा सेवानिवृत्ति के बाद किसी प्रकार की पेंशन या आर्थिक सहायता की व्यवस्था नहीं है।
जवानों का कहना है कि ड्यूटी पर आने-जाने के दौरान यदि कोई दुर्घटना हो जाती है तो इलाज का पूरा खर्च उन्हें स्वयं वहन करना पड़ता है। उनका यह भी दावा है कि 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर सेवा समाप्त होने के बाद अधिकांश पीआरडी जवान बिना किसी आर्थिक सहारे के घर लौटने को मजबूर हो जाते हैं।
प्रमुख मांगें
- सेवा के दौरान दुर्घटना एवं जीवन बीमा की व्यवस्था।
- सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन या एकमुश्त आर्थिक सहायता।
- मानदेय में वृद्धि और नियमित भुगतान।
- ड्यूटी के दौरान स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सुविधाएं।
- पीआरडी जवानों के लिए स्थायी सामाजिक सुरक्षा योजना लागू की जाए।
पीआरडी जवानों ने मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और राष्ट्रपति से उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है। साथ ही उन्होंने मीडिया से भी आग्रह किया है कि उनकी मांगों को प्रमुखता से उठाया जाए, ताकि सरकार उनके हित में उचित निर्णय ले सके।
नोट: यह समाचार पीआरडी जवानों द्वारा सार्वजनिक रूप से उठाई गई मांगों और दावों पर आधारित है। संबंधित विभाग या राज्य सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी समाचार में शामिल किया जाना चाहिए।
