कौशांबी में ऑनलाइन RTI व्यवस्था पर सवाल, 96 आवेदनों में 19 पर अधूरी जानकारी देने का आरोप
कौशांबी। जनपद में सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत ऑनलाइन मांगी जा रही सूचनाओं के निस्तारण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पत्रकार अमरनाथ झा ने आरोप लगाया है कि विभिन्न विभागों द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं और कई मामलों में अधूरी एवं गोलमोल जानकारी देकर सूचना छिपाने का प्रयास किया जा रहा है।
अमरनाथ झा के अनुसार, उन्होंने विभिन्न विभागों से जानकारी प्राप्त करने के लिए कुल 96 ऑनलाइन आरटीआई आवेदन दाखिल किए थे। इनमें से अब तक केवल 19 आवेदनों का निस्तारण दिखाया गया है, लेकिन अधिकांश मामलों में मांगी गई सूचनाओं का स्पष्ट और संतोषजनक उत्तर नहीं दिया गया। कई आवेदनों में केवल औपचारिक जवाब देकर मामले को बंद करने का प्रयास किया गया है।
उन्होंने बताया कि लगभग 50 आरटीआई आवेदन अभी भी लंबित हैं, जबकि 24 आवेदनों को अन्य लोक प्राधिकरणों के पास स्थानांतरित कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त मानव सेवा पोर्टल से संबंधित एक आरटीआई आवेदन पर भी अब तक कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
अमरनाथ झा का आरोप है कि नगर पालिका परिषद मंझनपुर, नगर पालिका परिषद भरवारी तथा नगर पंचायत अझुवा, सिराथू, चरवा, सराय अकिल और पश्चिम शरीरा से संबंधित आरटीआई आवेदनों का अब तक जवाब नहीं दिया गया है। इसके अलावा पंचायती राज विभाग, जिला विकास विभाग और लेखपाल ज्वाला सिंह से जुड़े मामलों में भी स्पष्ट और तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
उन्होंने कहा कि ग्राम भैला मकदूमपुर में सरकारी भूमि आराजी संख्या 618, 781 (बंजर) और 780 (आबादी) पर कथित कब्जों से संबंधित जानकारी मांगी गई थी, लेकिन सीधे जवाब देने के बजाय गोलमोल उत्तर देकर मामले को टालने का प्रयास किया गया। उनका आरोप है कि लेखपाल ज्वाला सिंह के लगभग 11 माह के कार्यकाल के दौरान कई सरकारी भूमि पर कब्जे हुए हैं। इस संबंध में गांव की सभी सरकारी जमीनों का विवरण तथा लोकपाल द्वारा कितनी भूमि खाली कराई गई, इसकी जानकारी भी उपलब्ध नहीं कराई गई।
इसी प्रकार आईटीआई एवं सेवायोजन विभाग से संबंधित आरटीआई आवेदनों में भी समय पर और तथ्यात्मक जानकारी नहीं दी गई है, जिससे सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठने लगे हैं।
अमरनाथ झा ने जिला प्रशासन से मांग की है कि ऑनलाइन आरटीआई व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कराई जाए, अधूरी या भ्रामक जानकारी देने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाए तथा सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि यदि सूचना मांगने वाले नागरिकों को समय पर और सही जानकारी नहीं मिलेगी, तो सूचना का अधिकार अधिनियम का मूल उद्देश्य प्रभावित होगा और सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता एवं जवाबदेही स्थापित करने का लक्ष्य अधूरा रह जाएगा।
