लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, DCP पूर्वी जोन समेत थाना प्रभारियों को तलब

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लखनऊ। राजधानी लखनऊ में नाबालिग लड़कियों के लापता होने के मामलों को गंभीरता से लेते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने पुलिस कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने पूर्वी जोन की डीसीपी दीक्षा शर्मा को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही उनके अधिकार क्षेत्र के थाना प्रभारियों, क्षेत्राधिकारियों और संबंधित विवेचकों को भी अदालत में पेश होने का आदेश दिया गया है।

हाईकोर्ट ने कहा कि नाबालिग बालिकाओं के लापता होने जैसे संवेदनशील मामलों में प्रभावी निगरानी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। अदालत ने पुलिस अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब करते हुए लापता बालिकाओं की शीघ्र बरामदगी के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर चिंता व्यक्त की और कहा कि ऐसे मामलों में लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय होना आवश्यक है।

इस बीच पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था को लेकर भी बहस तेज हो गई है। विभिन्न मामलों में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं तथा विपक्षी दलों और अधिवक्ताओं द्वारा व्यवस्था की समीक्षा की मांग की जा रही है।

हालांकि, “उत्तर प्रदेश में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली पूरी तरह फेल है” अथवा “लखनऊ पुलिस आयुक्त के खिलाफ सुल्तानपुर कोर्ट ने कार्रवाई के आदेश दिए हैं” जैसे दावों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि इस समाचार के प्रकाशन तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष संबंधित न्यायालयों के आदेशों और सरकारी अभिलेखों के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।

फिलहाल हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद पुलिस प्रशासन में हलचल तेज हो गई है और मामले की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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