कौशांबी मे अवैध वाहनों का खेल, ARTO कार्यालय पर उठे गंभीर सवाल, RTI से खुल सकती है भ्रष्टाचार की परतें

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Kaushambi voice

👉 RTI से मचा हड़कंप: कौशांबी ARTO कार्यालय पर उठे भ्रष्टाचार और मिलीभगत के सवाल..
👉 बिना फिटनेस-परमिट दौड़ रहे वाहन, आखिर किसकी शह पर हो रहा परिवहन विभाग?..
👉 ओवरलोड बालू-गिट्टी वाहनों पर कार्रवाई या सिर्फ खानापूर्ति? RTI में मांगा पूरा हिसाब..
👉 सरकारी विभागों में प्राइवेट गाड़ियों का खेल! ARTO से मांगी गई जवाबदेही की पूरी जानकारी ।

कौशांबी। जिले में अवैध वाहन संचालन, ओवरलोडिंग, बिना फिटनेस और बिना परमिट गाड़ियों के खुलेआम दौड़ने के बीच अब परिवहन विभाग और विशेष रूप से एआरटीओ कार्यालय की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई है। जिले के पत्रकार अमरनाथ झा द्वारा दाखिल की गई 15 बिंदुओं वाली आरटीआई ने विभाग की जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
आरटीआई में पूछा गया है कि आखिर जिले में कितने ऑटो, ई-रिक्शा, टैक्सी, बस, ट्रक और बालू-गिट्टी ढोने वाले वाहन बिना वैध कागजात के चल रहे हैं और उन पर क्या कार्रवाई हुई। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि परिवहन विभाग नियमित जांच और कार्रवाई कर रहा है तो फिर सड़कों पर बिना फिटनेस, बिना परमिट और ओवरलोड वाहन आखिर किसकी शह पर दौड़ रहे हैं?
सूत्रों की मानें तो जिले में कई ऐसे वाहन वर्षों से संचालित हैं जिनका टैक्स बकाया है, फिटनेस समाप्त हो चुकी है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है। आरोप यह भी है कि अवैध रूप से मॉडिफाई वाहन और ओवरलोड ट्रैक्टर-डंपर रात-दिन सड़कों पर दौड़ते हैं, लेकिन विभागीय आंखें बंद रहती हैं।
आरटीआई में सरकारी विभागों में कमर्शियल वाहनों की जगह प्राइवेट नंबर की गाड़ियों के इस्तेमाल का मुद्दा भी उठाया गया है। सवाल यह है कि जब नियम स्पष्ट हैं तो आखिर सरकारी कार्यालयों में प्राइवेट गाड़ियां किस अनुमति से लगाई गई हैं? क्या परिवहन विभाग ने कभी इनकी जांच की? यदि नहीं, तो जिम्मेदार कौन है?
परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर यह भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर हर साल लाखों रुपये का टैक्स और चालान वसूले जाने के बावजूद अवैध वाहनों पर स्थायी रोक क्यों नहीं लग पा रही। क्या विभाग केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित है? या फिर अवैध वाहन माफियाओं और विभागीय मिलीभगत का खेल चल रहा है?
अब निगाहें एआरटीओ कार्यालय पर टिक गई हैं। यदि विभाग आरटीआई में मांगी गई जानकारी सही तरीके से सार्वजनिक करता है तो जिले में चल रहे अवैध वाहन नेटवर्क, टैक्स चोरी और विभागीय लापरवाही की बड़ी परतें खुल सकती हैं। वहीं यदि जानकारी देने में टालमटोल हुई तो पारदर्शिता और जवाबदेही पर और गंभीर सवाल उठेंगे।

अमरनाथ झा पत्रकार कौशांबी -9415254415

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