मंझनपुर–भरवारी नगर पालिकाओं में मैनपावर संविदा पर सवाल, एजेंसी और कर्मचारियों का ब्योरा नहीं सार्वजनिक, कितने कर्मचारी, कितना वेतन और किसे मिला टेंडर? नगर पालिकाओं की मैनपावर व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

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Kaushambi voice

👉 कौशाम्बी की नगर पालिका परिषद मंझनपुर और नगर पालिका परिषद भरवारी में मैनपावर संविदा पर बड़ा सवाल।

👉 कर्मचारियों को उपलब्ध कराने वाली एजेंसी का नाम तक सार्वजनिक नहीं।

👉 टेंडर प्रक्रिया, अवधि और भाग लेने वाली कंपनियों का रिकॉर्ड भी अस्पष्ट। कितने कर्मचारी तैनात हैं और किन पदों पर काम कर रहे हैं, जानकारी नहीं।

👉 कर्मचारियों को कितना वेतन दिया जा रहा है, इसका भी खुलासा नहीं,कागजों में कर्मचारी दिखाकर भुगतान निकालने की चर्चा तेज।

👉 नगर निकायों की पारदर्शिता और वित्तीय व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, मामले की स्वतंत्र जांच और पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग तेज।

कौशाम्बी। मंझनपुर–भरवारी नगर पालिकाओं में मैनपावर संविदा पर बड़ा सवाल, एजेंसी और कर्मचारियों का रिकॉर्ड क्यों छिपा?

कौशाम्बी। जिले की नगर पालिका परिषद मंझनपुर और नगर पालिका परिषद भरवारी में मैनपावर संविदा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि पालिकाओं में कर्मचारियों की आपूर्ति करने वाली एजेंसी से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा रही है। एजेंसी का नाम, टेंडर प्रक्रिया, संविदा की अवधि, कर्मचारियों की संख्या, पदों का विवरण और वेतनमान जैसी बुनियादी जानकारियां तक स्पष्ट नहीं हैं। इससे पूरे मामले में पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार दोनों नगर पालिकाओं में कई कर्मचारी आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से कार्यरत बताए जाते हैं, लेकिन वास्तविक संख्या और तैनाती का पूरा विवरण सामने नहीं आ रहा है। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि कुछ कर्मचारियों को ही वास्तविक रूप से काम पर रखा गया है, जबकि कई नाम केवल कागजों में दर्ज कर उनके नाम पर भुगतान निकाले जाने की आशंका जताई जा रही है। यदि ऐसा है तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला हो सकता है।
नगर निकायों में मैनपावर या आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की नियुक्ति सामान्यतः निर्धारित नियमों और पारदर्शी निविदा प्रक्रिया के तहत की जाती है। इसके लिए ई-टेंडर या अन्य प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के माध्यम से एजेंसी का चयन किया जाता है। एजेंसी को कर्मचारियों की सूची, पदों का विवरण, पहचान पत्र, बैंक खाते और भुगतान का पूरा रिकॉर्ड संबंधित नगर निकाय को उपलब्ध कराना होता है। साथ ही कर्मचारियों को न्यूनतम मजदूरी या निर्धारित मानदेय के अनुसार भुगतान किया जाना भी अनिवार्य होता है।
लेकिन मंझनपुर और भरवारी नगर पालिकाओं में मैनपावर संविदा को लेकर कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब स्पष्ट नहीं हैं। पहला, मैनपावर उपलब्ध कराने वाली एजेंसी कौन है और उसे टेंडर कितने वर्षों के लिए दिया गया है। दूसरा, टेंडर प्रक्रिया में कितनी कंपनियों ने भाग लिया और एजेंसी का चयन किस आधार पर किया गया। तीसरा, दोनों नगर पालिकाओं में कुल कितने संविदा कर्मचारी तैनात हैं और उन्हें किन-किन पदों पर रखा गया है। चौथा, प्रत्येक कर्मचारी को कितना वेतनमान दिया जा रहा है और भुगतान किस प्रक्रिया से किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि सारी प्रक्रिया नियमों के अनुसार हुई है तो इन जानकारियों को सार्वजनिक करने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। सरकारी धन से कर्मचारियों का भुगतान होता है, इसलिए यह पूरी व्यवस्था जनता के प्रति जवाबदेह है। पारदर्शिता के अभाव से अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की आशंका स्वतः पैदा होती है।
मामले को लेकर यह भी चर्चा है कि कुछ एजेंसियां कम संख्या में कर्मचारियों को वास्तविक रूप से काम पर रखकर बाकी नामों पर भुगतान निकालने की कोशिश करती हैं। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यदि ऐसा है तो यह गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला हो सकता है।
अब जनपद में यह मांग जोर पकड़ रही है कि नगर पालिका परिषद मंझनपुर और नगर पालिका परिषद भरवारी में मैनपावर संविदा से संबंधित पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए। साथ ही टेंडर प्रक्रिया, कर्मचारियों की वास्तविक तैनाती और भुगतान की स्वतंत्र जांच कराई जाए, ताकि यदि कहीं गड़बड़ी हो तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

अमरनाथ झा पत्रकार कौशाम्बी – 9415254415

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