करारी थाना: अपराध पर नहीं, आंकड़ों पर कंट्रोल — 6 माह का रिकॉर्ड बना सबूत,सवालों के घेरे में कौशांबी की कानून व्यवस्था, करारी थाने पर मुकदमे दबाने और दलाल तंत्र के हावी का आरोप
👉 करारी थाना में कानून नहीं, ‘क्राइम मैनेजमेंट’ चल रहा — 6 माह के रिकॉर्ड ने खोली पुलिस की पोल…
👉 एफआईआर पर ताले, न्याय दलालों के हवाले — करारी थाना बना वसूली और संरक्षण का अड्डा…नहीं दर्ज होती है चोरियां
👉 नया साल आते ही अपराध गायब! करारी पुलिस पर आंकड़े दबाने का विस्फोटक आरोप, लम्बित हैं विवेचनाएं
👉 6 माह में 234 मुकदमे दिखाकर सैकड़ों अपराध दफन — करारी थाना में पुलिसिया सिस्टम पूरी तरह फेल…
👉 पत्रकारिता की आड़ में सक्रिय कुछ दलाल, दिनभर थाने की करते हैं परिक्रमा, सीसीटीवी फुटेज कैमरे की जांच में होगा खुलासा
1- छह माह का रिकॉर्ड: अपराध संख्या ने खोली हकीकत….
कौशाम्बी जनपद के करारी थाना क्षेत्र में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार 4 जून 2025 से 30 दिसंबर 2025 तक थाना करारी में अपराध संख्या 0188/25 से 0422/25 तक ही दर्ज की गई। इसका सीधा अर्थ है कि पूरे छह महीनों में कुल 234 मुकदमे दर्ज हुए। क्षेत्रीय जनता का आरोप है कि यह आंकड़ा वास्तविक अपराध स्थिति से मेल नहीं खाता, बल्कि मुकदमे न लिखने की नीति का परिणाम है।
2. महीनेवार आंकड़े: नया साल आते ही मुकदमे गायब….
यदि महीनेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो अक्टूबर 2025 में 43, नवंबर में 29 और दिसंबर 2025 में 33 मुकदमे दर्ज हुए। लेकिन जनवरी 2026 के पहले 15 दिनों में मात्र 9 मुकदमे दर्ज किए गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि नए वर्ष की शुरुआत के साथ ही करारी पुलिस मुकदमे दर्ज करने में जानबूझकर लापरवाही बरत रही है, ताकि अपराध दर कम दिखाई जा सके और आंकड़ों को नियंत्रित रखा जाए।
3. पीड़ितों का आरोप: सीधे नहीं, दलालों से होती है एफआईआर
पीड़ितों का दावा है कि थाने में सीधे पहुंचने पर उनकी सुनवाई नहीं होती। दलालों के माध्यम से ही मुकदमे दर्ज किए जाते हैं और इसके लिए कथित रूप से लेन-देन भी होता है। आरोप है कि थाना परिसर में दिनभर कुछ गिने-चुने दलालों का जमावड़ा लगा रहता है, जो पुलिस की मिलीभगत से मामलों का “सेटेलमेंट” कराते हैं। दलित, गरीब और कमजोर वर्ग के पीड़ितों की शिकायतें अक्सर नजरअंदाज कर दी जाती हैं।
4. विवेचना ठप, वसूली सक्रिय….
जो मुकदमे दर्ज हुए हैं, उनमें से बड़ी संख्या में विवेचनाएं लंबित बताई जा रही हैं। पीड़ितों का कहना है कि पुलिस का फोकस जांच और न्याय दिलाने पर नहीं, बल्कि वसूली और दबाव बनाने पर है। इससे अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और आम नागरिकों में पुलिस के प्रति भय और अविश्वास बढ़ता जा रहा है।
5. उच्च अधिकारियों से जांच की मांग…..
इन तमाम आरोपों से आक्रोशित क्षेत्रीय जनता ने पुलिस अधीक्षक कौशाम्बी, आईजी प्रयागराज और एडीजी प्रयागराज से हस्तक्षेप की मांग की है। लोगों ने थाना करारी के थाना प्रभारी और दरोगा नंदू यादव की भूमिका की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। जनता का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो करारी थाना क्षेत्र में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है।
अमरनाथ झा पत्रकार – 9415254415
